Bangladesh: बांग्लादेश में अचानक क्यों और कैसे भिड़ गए अमेरिका और रूस?
Bangladesh: विश्लेषकों के मुताबिक इन दोनों देशों का ये टकराव एक नाजुक मौके पर उभरा है। बीएनपी ने हाल में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े जन प्रदर्शन आयोजित किए हैं। इस बीच इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ में शामिल दो देशों ने बांग्लादेश को अपने टकराव का स्थल बना दिया है...
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बांग्लादेश (Bangladesh) अचानक अमेरिका और रूस के बीच जुबानी जंग का केंद्र बन गया है। विवाद बांग्लादेश के घरेलू मसले में ढाका स्थित दोनों देशों के दूतावासों के दखल से उठा है। ये विवाद 14 दिसंबर को शुरू हुआ, जो अब तक नहीं थमा है। 14 दिसंबर को ढाका स्थित अमेरिकी राजदूत ने विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक लापता नेता के घर का दौरा किया। आरोप है कि बीएनपी के नेता को 2013 में जबरन गायब कर दिया गया था। तब से वे अपने घर नहीं लौटे। इस पूरे समय में बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के नेतृत्व वाली अवामी लीग का शासन रहा है।
अमेरिका ने इस मामले में अब कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा कि उसने यह मसला बांग्लादेश सरकार से सर्वोच्च स्तर पर उठाया है। साथ ही वाशिंगटन स्थित बांग्लादेश के दूतावास के सामने भी यह मुद्दा उठाया गया है। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह ‘मानवाधिकार के हनन के सभी मामलों को गंभीरता से लेता है।’ दूतवास ने कहा कि वह लगातार मानव अधिकार संगठनों से संपर्क में रहता है।
दूतावास की इस पहल पर रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। उसने कहा कि अमेरिकी दूतावास की इस गतिविधि से दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल न देने के अमेरिकी दावे की पोल खुल गई है। रूसी दूतावास ने एक बयान में कहा- ‘बांग्लादेश जैसे मुल्क किसी अन्य देश के निर्देश के मुताबिक नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिहाज से अपनी विदेश और आंतरिक नीति को तय करते हैं।’ रूसी दूतावास ने ये बयान 20 दिसंबर को जारी किया।
अगले ही दिन अमेरिकी दूतावास ने रूसी बयान का जवाब दिया। उसने एक बयान में कहा- ‘क्या रूस की ये बात यूक्रेन पर भी लागू होती है?’ उसका इशारा इस वर्ष फरवरी में यूक्रेन में शुरू की गई रूस की विशेष सैनिक कार्रवाई की तरफ था।
विश्लेषकों के मुताबिक इन दोनों देशों का ये टकराव एक नाजुक मौके पर उभरा है। बीएनपी ने हाल में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े जन प्रदर्शन आयोजित किए हैं। इस बीच इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ में शामिल दो देशों ने बांग्लादेश को अपने टकराव का स्थल बना दिया है। बड़ा व्यापार पार्टनर होने के नाते अमेरिका बांग्लादेश के लिए काफी अहम है। पहले रूस बांग्लादेश के लिए उतना अहम नहीं था, लेकिन हाल में उससे सस्ती दरों पर कच्चा तेल लेने की पहल बांग्लादेश ने की है। समझा जाता है कि बांग्लादेश की इस मुश्किल स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश अमेरिका और रूस दोनों कर रहे हैं।
अमेरिका की इलिनोइस स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर अली रियाज ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘बांग्लादेश में दिखी जुबानी जंग विश्व शक्तियों की होड़ का नतीजा है। इससे बांग्लादेश की विदेश नीति के सामने एक चुनौती खड़ी हुई है। वैसे इस घटनाक्रम का असर घरेलू राजनीति पर भी पड़ेगा।’
इस बीच रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा है कि अमेरिका ने बांग्लादेश में वही किया है, जो वह अकसर करता है। मानवाधिकार के नाम पर उसकी कोशिश विभिन्न देशों के घरेलू मामलों में दखल देने की रहती है। जखारोवा ने कहा कि ब्रिटेन और जर्मनी के दूतावास भी ऐसी ही भूमिका निभाते हैं।