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यूनुस राज के जुल्म की कहानी: बांग्लादेश में कितने हिंदू मारे गए, अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध के क्या आंकड़े?
Sat, 27 Dec 2025 08:25 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 27 Dec 2025 08:25 PM IST
सार
बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से हटने और यूनुस के शासन में आने के बाद से क्या हालात हैं? इस दौर में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति रही है? बांग्लादेश के आधिकारिक आंकड़े इस मामले में क्या कहते हैं? इसके अलावा अलग-अलग संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स में बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के हालात पर क्या कहा गया है? आइये जानते हैं...
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बांग्लादेश में प्रदर्शनों के बीच हिंसा।
- फोटो : ANI
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विस्तार
बांग्लादेश में हालिया दिनों में हुई हिंसा की घटनाओं ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। छात्र नेता उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या के बाद पूरे देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़की। हिंदू युवक दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल इस हिंसा की भेंट चढ़ गए। मॉब लिंचिंग की इन घटनाओं ने पूरी दुनिया में बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष राजनीति को कठघरे में खड़ा कर दिया। खासकर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के शासन पर सवालिया निशान लगा दिया।
ऐसे में यह जानना अहम है कि बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से हटने और यूनुस के शासन में आने के बाद से क्या हालात हैं? इस दौर में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति रही है? बांग्लादेश के आधिकारिक आंकड़े इस मामले में क्या कहते हैं? इसके अलावा अलग-अलग संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स में बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के हालात पर क्या कहा गया है? आइये जानते हैं...
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ऐसे में यह जानना अहम है कि बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से हटने और यूनुस के शासन में आने के बाद से क्या हालात हैं? इस दौर में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति रही है? बांग्लादेश के आधिकारिक आंकड़े इस मामले में क्या कहते हैं? इसके अलावा अलग-अलग संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स में बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के हालात पर क्या कहा गया है? आइये जानते हैं...
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युनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की स्थिति पर कई विरोधाभासी रिपोर्ट्स और चिंताएं सामने आई हैं।
- न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक गैटस्टोन इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सक्रिय रूप से उन कट्टरपंथी समूहों को सक्षम बनाया है जो अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस्लामी कट्टरपंथियों, जिहादियों और आतंकवादियों को देश में कमजोर शासन का फायदा उठाने की मूक इजाजत दी है। इसके चलते धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और धर्मनिरपेक्ष आवाजों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। यूनुस के अंतरिम शासन में ऐसे हजारों कैदियों को रिहा किया गया है, जिन पर कट्टरपंथ से जुड़े मामलों और अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा के केस दर्ज थे। इनमें जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन के कई नेताओं की रिहाई शामिल है।
- बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 अगस्त 2024 को शेख हसीना को अपदस्थ किए जाने के बाद से 30 जून 2025 तक कुल 330 दिनों में, धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर 2,442 हिंसा की घटनाएं हुईं।
- इनमें से सबसे अधिक हिंसा की घटनाएं 14 अगस्त से 20 अगस्त 2024 के बीच हुईं। इन घटनाओं की कुल संख्या 2,010 थी। इस अवधि में कम से कम 32 हिंदुओं की हत्या हुई, महिलाओं के खिलाफ दुष्कर्म और उत्पीड़न की 13 घटनाएं दर्ज की गईं, साथ ही हिंदू मंदिरों पर 133 हमले हुए।
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- इन आंकड़ों की मानें तो यूनुस सरकार की ओर से शुरुआती हिंसा पर रोक लगाए जाने के दावे भी हवा साबित होते हैं। 20 अगस्त 2024 से लेकर इस साल के मध्य तक हिंसा की कुल 432 घटनाएं दर्ज हुईं।
- साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल (एसएटीपी) के मुताबिक, बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जनवरी से लेकर मार्च 2025 के बीच जानलेवा हिंसा की 142 घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें हमले से लेकर महिलाओं से दुष्कर्म और संपत्ति की तबाही से जुड़े मामले शामिल हैं। अकेले मार्च में ही हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की 50 घटनाएं दर्ज हुई हैं। पुलिस में दर्ज केसों के मुताबिक, इनमें पांच हत्याएं, आठ दुष्कर्म के मामले और 13 मंदिरों पर हमले से जुड़े केस शामिल रहे। इसके अलावा अपहरण, लूट, तोड़फोड़ के कई और केस दर्ज हुए।
- संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन- यूएनएचआरसी में ब्यूरो ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस (BHRJ) के अध्यक्ष दीपन मित्रा के मुताबिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू, बौद्ध, ईसाई और आदिवासी समुदायों पर लगातार भेदभाव किया गया है, और यूनुस सरकार में स्थिति भयानक रूप ले चुकी है।
- उन्होंने सरकारी नौकरियों से हिंदू अधिकारियों और शिक्षकों को बाहर निकालने के लिए एक चरणबद्ध अभियान चलाए जाने का मुद्दा उठाया। पिछले एक साल में कम से कम 176 हिंदू शिक्षकों को बर्खास्त या इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है।
- बीएचआरजे के मुताबिक, बांग्लादेश पुलिस से 100 से अधिक पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है और गृह मंत्रालय ने कथित तौर पर निर्देश दिया है कि बांग्लादेश पुलिस में किसी भी हिंदू को नियुक्त न किया जाए।
- 2025 में अर्धसैनिक बलों (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश- बीजीबी) में भर्ती किए गए 693 लोगों में से कोई भी अल्पसंख्यक समूह से संबंधित नहीं था।
- नवंबर 2024 में ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आई थीं, जिनमें कहा गया था कि यूनुस शासन ने कथित तौर पर इस्लामवादियों को खुश करने के लिए प्राथमिक विद्यालयों में संगीत और शारीरिक शिक्षा के सहायक शिक्षकों के पद समाप्त कर दिए।
चरमपंथियों की रिहाई, चुनाव लड़ने की इजाजत
- यूनुस के शासन के दौरान, प्रतिबंधित भारत-विरोधी और इस्लामी संगठन जमात-ए-इस्लामी से पाबंदियां हटा दी गईं और और इस्लामी नेताओं को जेल से रिहा कर दिया गया।
- अगस्त 2024 में, यूनुस की अंतरिम सरकार ने इस्लामी चरमपंथी समूह अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के प्रमुख जशिमुद्दीन रहमानी को रिहा कर दिया, जो 2013 में एक ब्लॉगर की हत्या में शामिल होने के लिए दोषी ठहराया गया था और आतंकवाद के कई अन्य मामलों में विचाराधीन था।
हिंदुओं-अल्पसंख्यकों के खिलाफ कुछ प्रमुख घटनाएं
- नवंबर 2024 में यूनुस के शासन के दौरान, ISKCON के एक भिक्षु, चिनमय कृष्ण दास पर हिंदू अधिकारों की वकालत करने के कारण देशद्रोह का आरोप लगाया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
- दिसंबर 2025 की शुरुआत में रंगपुर शहर में एक बुजुर्ग हिंदू जोड़े की उनके घर में नृशंस हत्या कर दी गई। 75 वर्षीय योगेश चंद्र रॉय और उनकी पत्नी, सुबर्णा रॉय के शव उनके गले कटे हुए पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दोहरे हत्याकांड के संबंध में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया न ही कोई गिरफ्तारी की गई।
- दिसंबर 2024 में, आकाश दास (20 वर्ष) नामक एक हिंदू युवक को दोवाराबाजार में पुलिस ने इस्लाम की आलोचना करने वाली कथित फेसबुक पोस्ट के बाद हिरासत में लिया था, जिससे स्थानीय स्तर पर तनाव फैल गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद, एक भीड़ ने हिंदू समुदाय के घरों, दुकानों और एक मंदिर पर हमला और तोड़फोड़ की।
- अगस्त 2024 में, कम से कम 60 हिंदू शिक्षकों/प्रोफेसरों/सरकारी अधिकारियों को अपनी धार्मिक पहचान के कारण इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।
- हिंदू संगठन की तरफ से दावा है कि निर्वाचन आयोग के सचिव अशोक कुमार देबनाथ और प्राथमिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक उत्तम कुमार दास जैसे अधिकारी भी नौकरी से हटा दिए गए।
हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की हालिया घटनाएं
संबंधित वीडियो
- जून महीने के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से हिंदू समुदाय के लोगों के खिलाफ धमकी, मारपीट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की छिटपुट घटनाएं रिपोर्ट की गईं। अल्पसंख्यक संगठनों के अनुसार, इस दौरान कई परिवारों ने असुरक्षा की भावना के चलते स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा की मांग की।
- 26–27 जुलाई को रंगपुर जिले के गंगाचारा उपजिला में हिंदू बहुल इलाके पर हमला किया गया। कथित तौर पर धार्मिक अपमान की अफवाहों के बाद भीड़ ने 15 से 20 हिंदू परिवारों के घरों में तोड़फोड़ की, लूटपाट की और आग लगा दी। इस हमले के बाद कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।
- अगस्त–नवंबर 2025 के बीच बड़े पैमाने पर किसी एक घटना की तुलना में छोटे स्तर की हिंसा, धमकी और सामाजिक बहिष्कार की शिकायतें सामने आती रहीं। अल्पसंख्यक नेताओं का कहना है कि कई मामलों में पीड़ितों ने भय के कारण औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई। मानवाधिकार समूहों ने इस दौरान मंदिरों और हिंदू संपत्तियों पर हमलों की भी बात कही।
संबंधित वीडियो
दिसंबर 2025
18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले के भालुका क्षेत्र में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या किए जाने की घटना सामने आई। युवक पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उसे पीटा गया और उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना की देश-विदेश में कड़ी निंदा हुई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।
20 दिसंबर को चटगांव जिले के राउजान उपजिला में हिंदू समुदाय के कम से कम नौ घरों को निशाना बनाकर आगजनी की गई। इस हमले में कई परिवार बेघर हो गए और उन्हें स्थानीय स्तर पर अस्थायी राहत की जरूरत पड़ी।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में राजबाड़ी जिले में एक हिंदू युवक 29 वर्षीय अमृत मंडल को भीड़ ने चोरी के आरोप में जान से मार दिया।
दिसंबर के अंत में इन घटनाओं के विरोध में भारत सहित कई देशों में प्रदर्शन हुए। भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले के भालुका क्षेत्र में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या किए जाने की घटना सामने आई। युवक पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उसे पीटा गया और उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना की देश-विदेश में कड़ी निंदा हुई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।
20 दिसंबर को चटगांव जिले के राउजान उपजिला में हिंदू समुदाय के कम से कम नौ घरों को निशाना बनाकर आगजनी की गई। इस हमले में कई परिवार बेघर हो गए और उन्हें स्थानीय स्तर पर अस्थायी राहत की जरूरत पड़ी।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में राजबाड़ी जिले में एक हिंदू युवक 29 वर्षीय अमृत मंडल को भीड़ ने चोरी के आरोप में जान से मार दिया।
दिसंबर के अंत में इन घटनाओं के विरोध में भारत सहित कई देशों में प्रदर्शन हुए। भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।