फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangabandhu to toppled statue Mujibur Rahman's contested legacy post Bdesh upheaval

बंग बंधु से लेकर प्रतिमा टूटने तक: बांग्लादेश में उथल-पुथल के बाद अब मुजीबुर्रहमान की विरासत पर विवाद

Mon, 26 Aug 2024 03:36 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: बशु जैन Updated Mon, 26 Aug 2024 03:36 PM IST
सार

आंदोलनकारियों ने अपने गुस्से की आग में बंग बंधु और राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को खूब तहस नहस किया। प्रदर्शनकारियों ने ढाका में लगी रहमान की विशाल प्रतिमा को गिरा दिया। वहीं धनमंडी में उनके घर, जिसे बाद में स्मारक में बदल दिया गया था, उसे तक क्षतिग्रस्त कर दिया।

विज्ञापन
Bangabandhu to toppled statue Mujibur Rahman's contested legacy post Bdesh upheaval
बांग्लादेश के ढाका विवि में शेख मुजीबुर्रहमान के चित्र पर पोती गई कालिख। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद और देश छोड़ना पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन के बीच बांग्लादेश में काफी उथल-पुथल रही। वहीं देश में अब बंग बंधु शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को बचाए रखने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। 

विज्ञापन


हालात यह हैं कि जिन्होंने बांग्लादेश को आजादी दिलाई,आज उसी देश में उनकी प्रतिमाओं को तोड़ा जा रहा है। दीवारों पर बने चित्रों पर कालिख पोती जा रही है। इसे लेकर बांग्लादेश के लोग दो धड़ों में बंट गए हैं। एक धड़ा ऐसा है जो राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियों और चित्रों के साथ हो रही छेड़छाड़ का विरोध कर रहा है। वहीं दूसरा धड़ा इसका समर्थन कर रहा है। लोगों का कहना है कि बांग्लादेश के लिए आजादी की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा और राष्ट्रपिता का ऐसा अपमान ठीक नहीं है।
विज्ञापन


बांग्लादेश में सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन और हिंसा के बीच पांच अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने पद से इस्तीफा देने के बाद देश छोड़ना पड़ा। आंदोलनकारियों ने अपने गुस्से की आग में बंग बंधु और राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को खूब तहस नहस किया। प्रदर्शनकारियों ने ढाका में लगी रहमान की विशाल प्रतिमा को गिरा दिया। वहीं धनमंडी में उनके घर, जिसे बाद में स्मारक में बदल दिया गया था, उसे तक क्षतिग्रस्त कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके अलावा ढाका विवि के प्रसिद्ध शिक्षक छात्र केंद्र (टीएससी) की इमारत के सामने की ओर दीवार पर बने मोजेक पैनल, जो ढाका में पाकिस्तानी सेनाओं के आत्मसमर्पण की कहानी बयां करते हैं, उसमें रहमान के पैनल को खराब कर दिया गया। उसका चेहरा काला कर दिया गया। वहीं विवि परिसर की दीवार पर बने शेख मुजीबुर्रहमान और शेख हसीना के चित्रों पर कालिख पोत दी गई। वहीं टीएसी के सामने बने राजू मेमोरियल और सुहरावर्दी उद्यान के सामने बने राष्ट्रीय स्मारक जहां से शेख मुजीबुर्रहमान ने सात मार्च 1971 को ऐतिहासिक भाषण दिया था, उसे भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ढाका मेट्रो के खंभों पर बने रहमान और हसीना के विशाल चित्रों को भी काला कर दिया। 

इसे लेकर बांग्लादेशियों के एक वर्ग में काफी डर है। ढाका विवि एक छात्र का कहना है कि यह बिल्कुल गलत था। उन्होंने हमारे देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। वह राष्ट्रपिता हैं। हमारे बंगबंधु हैं। वह गुस्से में इतने अपमानित कैसे हो सकते हैं। उनको डर है कि मुजीब की विरासत को धीरे-धीरे मिटाया जा सकता है। 

Bangabandhu to toppled statue Mujibur Rahman's contested legacy post Bdesh upheaval
बांग्लादेश में खराब किया गया बंग बंधु राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान का चित्र - फोटो : पीटीआई

विरासत पर हमला ठीक नहीं : अलिफ
ढाका के एक कॉलेज के छात्र अलिफ हुसैन का कहना है कि पीछे मुड़कर देखने पर हम पीछे नहीं जा सकते और मुजीबुर्रहमान की विरासत पर हमला शुरू नहीं कर सकते। इतिहास को मिटाया नहीं जाना चाहिए। उनकी बेटी शेख हसीना ने गलत काम किया और परिणाम भुगतने पड़े। लेकिन मूर्तियों को गिराना और बंगबंधु के चित्रों पर कालिख पोतना गलत है। वह कहते हैं कि बंगबंधु नेशनल स्टेडियम, बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान नोवो थिएटर और ढाका में बंगबंधु एवेन्यू, सभी बांग्लादेश के संस्थापक के नाम पर हैं। उन्हें बांग्लादेश के राष्ट्रपिता के रूप में माना जाता है। इसका अपमान ठीक नहीं है। 

अवामी लीग ने बताया गलत इतिहास
वहीं शेख मुजीबुर्रहमान का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अवामी लीग सरकार ने इतिहास में अनुचित स्थान दिया था। उनके जीवन के विवादास्पद पहलुओं को लोगों को नहीं बताया गया। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और बांग्लादेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री अब्दुल मोईन खान ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर निशाना साधा। उनका कहना है कि अगर वह असली नेता होतीं, तो देश को इस स्थिति में नहीं ले जातीं। रहमान की विरासत के अपमान को लेकर उन्होंने कहा कि आंदोलन मुक्ति संग्राम को कमजोर नहीं कर सकता। खान ने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है। आपको इसे तैयार करना और सुधारना होगा। मानव समाज किसी भी स्थान पर स्थिर नहीं रहता है। हालिया आंदोलन किसी भी चीज को कमजोर नहीं कर रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed