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Balochistan: विद्रोहियों ने ही मार गिराए हेलीकॉप्टर समेत पाक सेना के छह अधिकारी, आगे बनाई यह नई रणनीति
सार
बलूचिस्तान में विद्रोहियों के नेता बलोच खान ने बयान जारी कर इस घटना की न सिर्फ जिम्मेदारी ली है बल्कि पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह आगे भी इस तरीके की घटनाओं को अंजाम देते रहेंगे।
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बलोच नेता ने किया पाकिस्तानी सेना का हेलीकॉप्टर गिराने का दावा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पाकिस्तानी सेना के शीर्ष कमांडर और वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर जा रहा सेना का हेलीकॉप्टर बलूचिस्तान के विद्रोहियों ने ही मार गिराया। बलूचिस्तान में विद्रोहियों के नेता बलोच खान ने बयान जारी कर इस घटना की न सिर्फ जिम्मेदारी ली है बल्कि पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह आगे भी इस तरीके की घटनाओं को अंजाम देते रहेंगे। फिलहाल पाकिस्तानी सेना ने बलोचिस्तान इलाके में अपनी फौज बढ़ा दी है। वहीं बलोचिस्तान को आजाद कराने वाले विद्रोही नेताओं ने अपनी अगली प्लानिंग भी सेट कर ली है।
दरअसल, पाकिस्तानी सेना के शीर्ष कमांडर और सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर 1 अगस्त को जा रहा हेलीकॉप्टर गायब हो गया था। चूंकि हेलीकॉप्टर में बलूचिस्तान के इलाके में तैनात फ्रंटियर कॉर्प्स के चीफ और पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज अली समेत सेना के पांच अन्य अधिकारी मौजूद थे।
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही सेना का हेलीकॉप्टर बलूचिस्तान के निचले इलाकों से होकर गुजरा उसके बाद से ही पाकिस्तानी सेना के रडार से गायब हो गया। अनुमान यही लगाया जा रहा था कि बलूचिस्तान के विद्रोहियों ने हेलीकॉप्टर को मार गिराया होगा। लेकिन इसकी आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हो पा रही थी। पाकिस्तानी सेना और एविएशन मिनिस्ट्री ने बड़ा ऑपरेशन चलाया। तब जाकर पता चला कि हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है और इस घटना में सभी छह अधिकारियों की मौत हो गई है।
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घटना के पता चलने के अगले दिन यानी बुधवार को ही बलूचिस्तान में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले विद्रोही संगठन बीआरएएस ने इस पूरी घटना की जिम्मेदारी ली है। संगठन के प्रवक्ता बलोच खान ने बताया कि 1 अगस्त को दुश्मन की फौज (पाकिस्तानी सेना) का यह जहाज बहुत ही कम ऊंचाई पर बलूचिस्तान के मूसा गोथ इलाके से उड़ रहा था।
बलोच खान ने अपने बयान में कहा कि उनके लड़ाकों ने एंटी एयरक्राफ्ट गन से हेलीकॉप्टर पर हमला किया और थोड़ी देर बाद ही मूसा गोथ इलाके में सेना के लोगों को ले जा रहा यह हेलीकॉप्टर पूरी तरीके से ध्वस्त हो गया। इसमें बैठे हुए सभी लोग मारे गए।
पाकिस्तानी सेना के टॉप कमांडर और वरिष्ठ अधिकारियों की हत्या के बाद सेना ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान से लगते हुए इलाकों में न सिर्फ अपनी सेना की टुकड़ी भेजनी शुरू की है बल्कि वहां पर तमाम तरह के संगठनों पर अपनी ओर से कड़ाई भी शुरू कर दी है।
इस पूरी घटना के बाद बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ने की बात करने वाले तमाम संगठनों के चीफ की एक बैठक भी हुई है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में फिलहाल कुछ दिनों के लिए अंडरग्राउंड होकर अपने सभी ऑपरेशनों को रोक देने की बात की गई है।
हालांकि पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को मारने वाले संगठन के प्रवक्ता बलोच खान ने मीडिया को जारी एक पत्र के माध्यम से इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह आगे भी ऐसे ही हमले करते रहेंगे। उनका कहना है कि जब तक बलूचिस्तान की जमीन से दुश्मन की सेनाएं (पाकिस्तानी सेनाएं) नहीं हट जाती तब तक उनके लड़ाके इस तरीके के बड़े हमले करते रहेंगे।
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ और अफगानिस्तान समेत अन्य जगहों पर काम कर चुके ब्रिगेडियर दीपक आहूजा कहते हैं कि बलूचिस्तान में बीते लंबे समय से बलूच लिबरेशन आर्मी समेत तमाम अन्य संगठन अपनी आजादी के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। यही वजह है कि सिर्फ सेना के अधिकारी नहीं बल्कि वहां पाकिस्तानी सेना से जुड़े तमाम इस्टैब्लिशमेंट पर लगातार बलूचिस्तान से जुड़े संगठन हमला करते रहते हैं।
"पाकिस्तान के कराची विश्वविद्यालय में 26 अप्रैल को एक आत्मघाती हमले में तीन चीनी नागरिकों को मार दिया गया था। बाद में जानकारी हुई कि आत्मघाती बस्ती में जो महिला शामिल थी वह बलोच लिबरेशन आर्मी से संबंधित थी। यही नहीं, इससे पहले भी बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद कराने के लिए लगातार तमाम तरह के संगठन मांग करते हुए पाकिस्तानी सेना या अन्य पाकिस्तानी समर्थक देशों के लोगों पर हमले करते आए हैं।"
विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर अभिषेक सिंह कहते हैं कि बलूचिस्तान, पाकिस्तान से आजादी की मांग करता रहा है। बलोचों के अलगाववादी संगठन लगातार पाकिस्तान सरकार पर बलूचिस्तान के हितों को न सिर्फ अनदेखा करने का आरोप लगाते रहे हैं बल्कि अपने इलाके में पाकिस्तानी सेना को ज्यादा से ज्यादा भेजकर माहौल खराब करने का भी आरोप लगाते आए हैं।
अभिषेक कहते हैं कि पाकिस्तान में तमाम अलगाववादी संगठन लंबे समय से अपनी जमीन के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान की लड़ाई में शामिल ज्यादातर अलगाववादी संगठन अफगानिस्तान और ईरान की सटी हुई सीमा पर सक्रिय रहते हैं। यह लड़ाई बलूचिस्तान की आजादी को लेकर लड़ी जा रही है इसलिए बलूचिस्तान में इन अलगाववादी संगठनों को काफी समर्थन मिलता है।
रक्षा मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट कर्नल आरएन शाहा कहते हैं कि बलूचिस्तान के अलगाववादी संगठन कहने को तो 1964 से सक्रिय हैं लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में तब आए जब सन 2000 में पाकिस्तान के अधिकारियों के ऊपर हमला किया गया। उसके बाद से लगातार बलूचिस्तान के अलगाववादी संगठन पाकिस्तान को दुश्मन की सेना करार देते हुए लगातार हमले करते रहते है।
कर्नल शाहा कहते हैं कि एक अगस्त को जिस तरीके से बलोच अलगाववादी संगठन ने पाकिस्तानी सेना के टॉप कमांडर समेत छह अधिकारियों को मार गिराया है यह हाल के दिनों की सबसे बड़ी घटना है।
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दरअसल, पाकिस्तानी सेना के शीर्ष कमांडर और सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर 1 अगस्त को जा रहा हेलीकॉप्टर गायब हो गया था। चूंकि हेलीकॉप्टर में बलूचिस्तान के इलाके में तैनात फ्रंटियर कॉर्प्स के चीफ और पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज अली समेत सेना के पांच अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही सेना का हेलीकॉप्टर बलूचिस्तान के निचले इलाकों से होकर गुजरा उसके बाद से ही पाकिस्तानी सेना के रडार से गायब हो गया। अनुमान यही लगाया जा रहा था कि बलूचिस्तान के विद्रोहियों ने हेलीकॉप्टर को मार गिराया होगा। लेकिन इसकी आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हो पा रही थी। पाकिस्तानी सेना और एविएशन मिनिस्ट्री ने बड़ा ऑपरेशन चलाया। तब जाकर पता चला कि हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है और इस घटना में सभी छह अधिकारियों की मौत हो गई है।
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घटना के पता चलने के अगले दिन यानी बुधवार को ही बलूचिस्तान में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले विद्रोही संगठन बीआरएएस ने इस पूरी घटना की जिम्मेदारी ली है। संगठन के प्रवक्ता बलोच खान ने बताया कि 1 अगस्त को दुश्मन की फौज (पाकिस्तानी सेना) का यह जहाज बहुत ही कम ऊंचाई पर बलूचिस्तान के मूसा गोथ इलाके से उड़ रहा था।
बलोच खान ने अपने बयान में कहा कि उनके लड़ाकों ने एंटी एयरक्राफ्ट गन से हेलीकॉप्टर पर हमला किया और थोड़ी देर बाद ही मूसा गोथ इलाके में सेना के लोगों को ले जा रहा यह हेलीकॉप्टर पूरी तरीके से ध्वस्त हो गया। इसमें बैठे हुए सभी लोग मारे गए।
पाकिस्तानी सेना के टॉप कमांडर और वरिष्ठ अधिकारियों की हत्या के बाद सेना ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान से लगते हुए इलाकों में न सिर्फ अपनी सेना की टुकड़ी भेजनी शुरू की है बल्कि वहां पर तमाम तरह के संगठनों पर अपनी ओर से कड़ाई भी शुरू कर दी है।
इस पूरी घटना के बाद बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ने की बात करने वाले तमाम संगठनों के चीफ की एक बैठक भी हुई है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में फिलहाल कुछ दिनों के लिए अंडरग्राउंड होकर अपने सभी ऑपरेशनों को रोक देने की बात की गई है।
हालांकि पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को मारने वाले संगठन के प्रवक्ता बलोच खान ने मीडिया को जारी एक पत्र के माध्यम से इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि वह आगे भी ऐसे ही हमले करते रहेंगे। उनका कहना है कि जब तक बलूचिस्तान की जमीन से दुश्मन की सेनाएं (पाकिस्तानी सेनाएं) नहीं हट जाती तब तक उनके लड़ाके इस तरीके के बड़े हमले करते रहेंगे।
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ और अफगानिस्तान समेत अन्य जगहों पर काम कर चुके ब्रिगेडियर दीपक आहूजा कहते हैं कि बलूचिस्तान में बीते लंबे समय से बलूच लिबरेशन आर्मी समेत तमाम अन्य संगठन अपनी आजादी के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। यही वजह है कि सिर्फ सेना के अधिकारी नहीं बल्कि वहां पाकिस्तानी सेना से जुड़े तमाम इस्टैब्लिशमेंट पर लगातार बलूचिस्तान से जुड़े संगठन हमला करते रहते हैं।
"पाकिस्तान के कराची विश्वविद्यालय में 26 अप्रैल को एक आत्मघाती हमले में तीन चीनी नागरिकों को मार दिया गया था। बाद में जानकारी हुई कि आत्मघाती बस्ती में जो महिला शामिल थी वह बलोच लिबरेशन आर्मी से संबंधित थी। यही नहीं, इससे पहले भी बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद कराने के लिए लगातार तमाम तरह के संगठन मांग करते हुए पाकिस्तानी सेना या अन्य पाकिस्तानी समर्थक देशों के लोगों पर हमले करते आए हैं।"
विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर अभिषेक सिंह कहते हैं कि बलूचिस्तान, पाकिस्तान से आजादी की मांग करता रहा है। बलोचों के अलगाववादी संगठन लगातार पाकिस्तान सरकार पर बलूचिस्तान के हितों को न सिर्फ अनदेखा करने का आरोप लगाते रहे हैं बल्कि अपने इलाके में पाकिस्तानी सेना को ज्यादा से ज्यादा भेजकर माहौल खराब करने का भी आरोप लगाते आए हैं।
अभिषेक कहते हैं कि पाकिस्तान में तमाम अलगाववादी संगठन लंबे समय से अपनी जमीन के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान की लड़ाई में शामिल ज्यादातर अलगाववादी संगठन अफगानिस्तान और ईरान की सटी हुई सीमा पर सक्रिय रहते हैं। यह लड़ाई बलूचिस्तान की आजादी को लेकर लड़ी जा रही है इसलिए बलूचिस्तान में इन अलगाववादी संगठनों को काफी समर्थन मिलता है।
रक्षा मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट कर्नल आरएन शाहा कहते हैं कि बलूचिस्तान के अलगाववादी संगठन कहने को तो 1964 से सक्रिय हैं लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में तब आए जब सन 2000 में पाकिस्तान के अधिकारियों के ऊपर हमला किया गया। उसके बाद से लगातार बलूचिस्तान के अलगाववादी संगठन पाकिस्तान को दुश्मन की सेना करार देते हुए लगातार हमले करते रहते है।
कर्नल शाहा कहते हैं कि एक अगस्त को जिस तरीके से बलोच अलगाववादी संगठन ने पाकिस्तानी सेना के टॉप कमांडर समेत छह अधिकारियों को मार गिराया है यह हाल के दिनों की सबसे बड़ी घटना है।