मौलाना फजलुर रहमान ने दिया इमरान को अल्टीमेटम, कहा- दो दिनों में दें इस्तीफा, वरना परिणाम भयावह होगा
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पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार के खिलाफ विपक्ष आजादी मार्च निकाल रहा है। इसकी अगुवाई मौलाना फजलुर रहमान कर रहे हैं जो जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के अध्यक्ष हैं। इस मार्च की शुरुआत कराची के सोहराब गोथ से 27 अक्तबूर को हुई थी। शुक्रवार को यह अपने आखिरी गंतव्य स्थान इस्लामाबाद पहुंच गया।
शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद मौलाना फजलुर रहमान ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं इमरान खान की सरकार को चेतावनी देता हूं कि वह दो दिनों के भीतर पद प्रधानमंत्री पद से अपना इस्तीफा दें। फजलुर रहमान ने इमरान खान की तुलना सोवियत संघ के नेता 'मिखाइल गोर्बाचेव' से की।
मौलाना ने कहा कि 'पाकिस्तान के गोर्बाचेव' को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के संयम की परीक्षा लिए बगैर ही पद से इस्तीफा देना चाहिए, वरना इसके नतीजे भयावह होंगे।
रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान को चलाने का अधिकार यहां की जनता को ना कि किसी सरकारी संस्थान को। साथ ही उन्होंने अपने आवास पर सरकार के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए बहुदलीय सम्मेलन का आयोजन किया।
इस सम्मेलन में 'पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी' के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी, 'पख्तूनख्वा मिली अवामी पार्टी' के अध्यक्ष महमूद खान अच्काजई, 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज' (पीएमएल-एन) के नेता अहसान इकबाल और ख्वाजा आसिफ और 'अवामी नेशनल पार्टी' (एएनपी) के महासचिव मियां इफ्तिखार हुसैन ने भाग लिया।
रहमान के साथ, पीएमएल-एन, पीपीपी और एएनपी के नेताओं ने प्रधान मंत्री खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार को गिराने के लिए आयोजित मार्च में भाग लिया।
मौलाना ने कहा कि 25 जुलाई के चुनाव धोखाधड़ी के चुनाव थे। हम न तो उन परिणामों को स्वीकार करते हैं और न ही उन चुनावों के बाद सत्ता में आई सरकार को। हमने इस सरकार को एक साल दिया है, लेकिन अब हम उन्हें और समय नहीं दे सकते।
उन्होंने कहा कि इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया जबकि देश की मौजूदगी को भी खतरे में डाल दिया। पाकिस्तान के गार्बाचेव को सत्ता छोड़नी होगी। हम उन्हें (इमरान खान) इस्तीफे के लिए दो दिनों की मोहलत देते हैं, वरना हम भविष्य के बारे में फैसला करेंगे।
इससे पहले, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) समेत विपक्षी दलों के समर्थक भी सरकार विरोधी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। यह प्रदर्शनकारी पेशावर मोड के निकट एक विशाल मैदान में रुके थे जहां विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को ठहराने के लिये तंबू लगा रखे थे।
यहां प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा था कि इमरान खान एक कठपुतली हैं और राष्ट्र अपना सिर एक चयनित प्रधानमंत्री और उसका चयन करने वालों के सामने झुकाने के लिए तैयार नहीं हैं।
वहीं, दूसरी ओर रहमान ने एक ट्वीट में सभी प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं को उनके समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया था। उन्होंने कहा था कि यह रैली अब शुक्रवार की प्रार्थना के बाद शुरू होगी और सभी वरिष्ठ विपक्षी नेता इसमें मौजूद होंगे।
इस बीच पाकिस्तानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मुख्य मार्गों को पूरी तरह या आंशिक तौर पर बंद कर दिया गया है। प्रमुख सरकारी इमारतों और राजनयिक क्षेत्र समेत ‘रेड जोन’ की तरफ प्रदर्शनकारियों को जाने से रोकने के लिये कंटीले तार लगाए गए थे। अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। संवेदनशील जगहों पर सैनिकों को भी तैनात किया गया।
इस प्रदर्शन से इमरान की सत्ता हिलती नजर आई। क्योंकि सरकार ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सेना को तैनात किया। वहीं सेना ने हाईवे पर शिपिंग कंटेनर बिछा दिए गए थे, ताकि प्रदर्शनकारी इस्लामाबाद न पहुंच पाएं। लोगों का मानना है कि एक साल पहले बनी सरकार के खिलाफ इतना बड़ा आंदोलन अप्रत्याशित है।
बता दें कि सरकार विरोधी यह रैली पहले गुरुवार को होने वाली थी लेकिन लाहौर रेल त्रासदी की वजह से इसे एक दिन के लिए रोक दिया गया। इस त्रासदी में कम से कम 74 लोगों की मौत हुई है। दक्षिणपंथी जेयूआई-एफ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने इमरान पर 2018 के आम चुनावों में ‘धांधली’ करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की है। रहमान ने इमरान खान पर आर्थिक कुप्रबंधन, अकुशल एवं खराब शासन के चलते आम लोगों की जिंदगी की कठिनाइयों को बढ़ाने का भी आरोप लगाया है।
जेयूआई-एफ के वरिष्ठ नेता दुर्रानी ने कहा था कि इस्लामाबाद की रैली अब शुक्रवार की नमाज के बाद शुरू होगी और विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता इसे संबोधित करेंगे। पीएमएल-एन के नेता अहसान इकबाल ने कहा कि विपक्षी दलों ने दुखद रेल अग्निकांड के मद्देनजर इस्लामाबाद रैली को स्थगित करने का फैसला किया है। खान और उनकी पार्टी ने उनके इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया है, लेकिन चुनाव व्यवस्था या प्रशासन में सुधार की मांगों पर विचार करने को तैयार है।