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अमेरिका-यूरोप में बढ़ी आयुर्वेदिक दवाओं की मांग: आज दुनिया के 150 देशों में आयुर्वेद दिवस, क्या होगा खास?
सार
अमेरिका और यूरोप में आयुर्वेदिक दवाओं की मांग बढ़ रही है। आज दुनिया के 150 देशों में आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। दुनियाभर में आयुर्वेद के बढ़ते ट्रेंड के मद्देनजर सरकार देश में आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा को मिलाकर प्रोटोकॉल बना रही है।
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150 देशों में आज आयुर्वेद दिवस (सांकेतिक)
- फोटो : फ्रीपिक
विस्तार
दुनिया के 150 देशों में आज 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। भारतीय आयुर्वेद के बढ़ते ट्रेंड का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अमेरिका और यूरोप में भारतीय आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। यही नहीं, चीन भी इन उत्पादों के प्रमुख विदेशी बाजारों में शामिल है।
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इलाज के प्रोटोकॉल तैयार करने की तैयारी
वर्ष 2025-26 में अमेरिका को 151.57 मिलियन डॉलर, जर्मनी को 64.32 मिलियन डॉलर और इटली को 36.08 मिलियन डॉलर के आयुष एवं हर्बल उत्पादों का निर्यात हुआ। चीन को भी 16.27 मिलियन डॉलर के उत्पाद भेजे गए। दुनियाभर में आयुर्वेद के बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए अब सरकार देश में आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा को साथ लेकर इलाज के प्रोटोकॉल तैयार करने की तैयारी कर रही है।
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बीमारियों के इलाज पर सरकार की नीति क्या?
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर और दूसरी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में दोनों पद्धतियों के उपचार को साथ इस्तेमाल करने पर काम होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने अमर उजाला से बातचीत में यह जानकारी दी।
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| देश | हर्बल उत्पादों का निर्यात |
|---|---|
| अमेरिका | 5.157 करोड़ डॉलर |
| जर्मनी | 6.432 करोड़ डॉलर |
| इटली | 3.608 करोड़ डॉलर |
| यूएई | 3.243 करोड़ डॉलर |
| वियतनाम | 2.457 करोड़ डॉलर |
| फ्रांस | 24.53 करोड़ डॉलर |
| चीन | 1.627 करोड़ डॉलर |
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में आयुष और हर्बल उत्पादों के प्रमुख बाजारों में अमेरिका सबसे आगे रहा। वहां करीब 151.57 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,272 करोड़ रुपये के उत्पाद भेजे गए। चीन में 16.27 मिलियन डॉलर यानी करीब 137 करोड़ रुपये के आयुष एवं हर्बल उत्पाद पहुंचे। 2030 तक बाजार दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।