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Hindi News ›   World ›   Axiom-4 Mission: Shubhanshu Shukla is growing fenugreek and green gram seeds In International Space Station

Farming in Space: अंतरिक्ष में किसान बने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला; मेथी और मूंग के बीज के साथ कर रहे प्रयोग

Wed, 09 Jul 2025 04:12 PM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 09 Jul 2025 04:12 PM IST
सार

एक्सिओम-4 मिशन के दौरान भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आईएसएस पर कई वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने माइक्रोग्रैविटी में मूंग और मेथी के बीजों का अंकुरण का प्रयोग किया है। इसका उद्देश्य बीजों की आनुवंशिकी, सूक्ष्मजीवी पारिस्थितिकी तंत्र और पोषण प्रोफाइल में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करना है। 
 

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Axiom-4 Mission: Shubhanshu Shukla is growing fenugreek and green gram seeds In International Space Station
अंतिरक्ष में माइक्रोग्रैविटी में बीजों का अंकुरण कर रहे शुभांशु शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने 14 दिवसीय प्रवास के 12 दिन पूरे कर चुके हैं। इन 10 दिनों में उन्होंने कई प्रयोग किए। प्रयोगों के क्रम में उन्होंने किसान की भी भूमिका निभाई। उन्होंने अपने साथ ले गए मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण किया। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में स्प्राउट्स प्रोजेक्ट को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अंकुरण और पौधों के शुरुआती विकास और उन पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करने के लिए अंजाम दिया जा रहा है।  

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बता दें कि पृथ्वी पर स्प्राउट्स प्रोजेक्ट का नेतृत्व कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ के रविकुमार होसामणि और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़ के सुधीर सिद्धपुरेड्डी कर रहे हैं।  एक्सिओम स्पेस की ओर से इस शोध को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि पृथ्वी पर वापस आने के बाद इन बीजों को कई पीढ़ियों तक उगाया जाएगा। जिससे कि उनके आनुवंशिकी, सूक्ष्मजीवी पारिस्थितिकी तंत्र और पोषण प्रोफाइल में होने वाले परिवर्तनों की जांच की जा सके। 
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'भारतीय वैज्ञानिकों के लिए खुलेंगे नए रास्ते'
अपने प्रयोगों को लेकर शुभांशु ने एक्सिओम स्पेस की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. लूसी लोव से बात की। इस बातचीत में भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने उनके द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयोगों की जानकारी दी और बोले की वे बेहद व्यस्त हैं। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि 'जब से हम यहां आए हैं, तब से ही काफी व्यस्त हैं। हम अंतरिक्ष स्टेशन पर बहुत सारे प्रयोग कर रहे हैं, जिन्हें लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। इस मिशन से माइक्रोग्रैविटी के लिए रास्ते खुलेंगे और इससे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए नई राह खुलेगी। मुझे बेहद गर्व है कि इसरो दुनियाभर के संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है।' 
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कई और वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे शुभांशु
शुभांशु ने बताया कि वह कई वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं, जिनमें स्टेम सेल का अध्ययन, माइक्रोग्रैविटी में बीजों का विकास, अंतरिक्ष में मस्तिष्क पर पड़ने वाला असर आदि प्रयोग शामिल हैं। शुभांशु ने कहा कि वे स्टेम सेल के अध्ययन वाले प्रयोग को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इससे पता चलेगा कि क्या सप्लीमेंट्स लेने से चोट की रिकवरी तेज होती है या नहीं। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के बीच पुल बनना मेरे लिए गर्व की बात है।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के क्रू का हिस्सा हैं। जिसने 25 जून को नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से उड़ान भरी थी। एक्सिओम-4 मिशन 14 दिन का है। अपने अंतरिक्ष प्रवास को खत्म कर 10 जुलाई के बाद मौसम की स्थिति के आधार पर किसी भी दिन पृथ्वी पर वापसी कर सकते हैं। वे फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे। हालांकि नासा ने अभी तक एक्सिओम-4 मिशन को अंतरिक्ष स्टेशन से अलग करने की तारीख की घोषणा नहीं की है।

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