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Bapsi Sidhwa: मशहूर लेखिका बाप्सी सिधवा का अमेरिका में निधन, पाकिस्तान की सबसे बड़ी लेखिकाओं में थीं शुमार

Thu, 26 Dec 2024 03:44 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 26 Dec 2024 03:44 PM IST
सार

अपनी रचनाओं में इतिहास और संस्कृति के कमाल के चित्रण के लिए उन्हें पूरी दुनिया में प्रशंसा मिली। उनके उपन्यास आइस कैंडी मैन पर भारतीय-कनाडाई फिल्म निर्माता दीपा मेहता ने चर्चित फिल्म अर्थ का निर्माण किया था। 

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Author Bapsi Sidhwa passes away at 86 in USA south asian literature pioneer
bapsi sidhwa - फोटो : फेसबुक

विस्तार

दक्षिण एशियाई साहित्य की अग्रणी लेखिका बाप्सी सिधवा का अमेरिका के ह्यूस्टन में निधन हो गया है। बाप्सी सिधवा 86 साल की थीं। बाप्सी सिधवा को उनके प्रतिष्ठित उपन्यास 'आइस कैंडी मैन' के लिए जाना जाता है। बाप्सी सिधवा के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है। 
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पाकिस्तान की सबसे बड़ी लेखिकाओं में हैं शुमार
बाप्सी के भाई फिरोज भंडारा ने बताया कि तीन दिनों तक बाप्सी के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बाप्सी का अंतिम संस्कार ह्यूस्टन में किया जाएगा। 11 अगस्त, 1938 को पाकिस्तान के कराची में जन्मीं बाप्सी सिधवा पाकिस्तान के एक प्रमुख पारसी परिवार से ताल्लुक रखतीं थी। अपने जन्म के कुछ समय बाद ही वे लाहौर चलीं गईं, जहां उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय बिताया। बाप्सी को पाकिस्तान की सबसे प्रभावशाली लेखिकाओं में से एक माना जाता है। अपनी रचनाओं में इतिहास और संस्कृति के कमाल के चित्रण के लिए उन्हें पूरी दुनिया में प्रशंसा मिली। उनके उपन्यास आइस कैंडी मैन पर भारतीय-कनाडाई फिल्म निर्माता दीपा मेहता ने चर्चित फिल्म अर्थ का निर्माण किया था। 
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पाकिस्तान के सितारा ए इम्तियाज सम्मान से हुईं थी सम्मानित
बीबीसी ने बाप्सी सिधवा के उपन्यास आइस कैंडी मैन को दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली उपन्यासों की सूची में शामिल किया था। सिधवा की साहित्यिक शुरुआत 'द क्रो ईटर्स' नामक उपन्यास से हुई, जिसमें पारसी जीवन और इतिहास चित्रण किया गया था। इनके अलावा बाप्सी ने क्रैकिंग इंडिया, एन अमेरिकन ब्रैट, द पाकिस्तानी ब्राइड और वाटर जैसी कृतियों की भी रचना की। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें पाकिस्तान के प्रतिष्ठित 'सितारा-ए-इम्तियाज' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने लिखा है कि, 'उनका जाना साहित्य जगत, पाकिस्तान, भारत और दुनिया भर के पारसी समुदाय के लिए एक गहरा नुकसान है।'
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