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Australia: ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ता का 2014 में लापता MH370 विमान का पता लगाने का दावा; किए चौंकाने वाले खुलासे
Wed, 28 Aug 2024 09:53 AM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 28 Aug 2024 09:53 AM IST
सार
विंसेंट लाइन यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के इंस्टीट्यूट फॉर मरीन एंड अंटार्कटिक स्टडीज में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व-मुख्य कनाडाई एयर-दुर्घटना जांचकर्ता लैरी वेंस के विश्लेषण के आधार पर एमएच 370 जब खाई के ऊपर से गुजरा तब इसमें ईंधन और चलने वाले इंजन थे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : istock
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विस्तार
एक ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक ने दावा किया कि उन्होंने कई साल पहले लापता हुए MH370 विमान का पता लगा लिया है। 2014 में कुआला लंपुर से 239 यात्रियों के साथ उड़ान भरने के बाद ही मलयेशियाई एयरलाइंस की उड़ान रडार से बाहर हो गई थी। इस विमान को ढूंढने के लिए विमानन इतिहास में सबसे बड़ा खोज अभियान चलाया गया, लेकिन आज भी इस विमान का पता नहीं चल पाया। अब तस्मानिया के शोधकर्ता विंसेंट लाइन ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि उन्होंने इस विमान को खोज निकाला। उन्होंने दावा किया कि विमान को विमान को जान बूझकर हिंद महासागर के 20,000 फीट गहरे ब्रोकन रिज में गिराया गया है।
शोधकर्ता विंसेंट लाइन ने कहा, "MH370 के गायब होने की कहानी, बिना किसी संदेह के 7वें आर्क पर ईंधन की कमी, हाई स्पीड डाइव से लेकर हिंद महासागर में विमान को गायब करने को अंजाम देने का मास्टरमाइंड पायलट की तरफ इशारा करता है। यह मिशन कामयाब हो गया होता अगर विमान का दाहिना पंख लहरों के बीच से नहीं निकला होता।"
जानबूझकर गायब किया गया था विमान
विंसेंट लाइन यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के इंस्टीट्यूट फॉर मरीन एंड अंटार्कटिक स्टडीज में काम करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि विमान के पंखों, फ्लैपों और फ्लैपरॉन को हुए नुकसान से पता चलता है कि यह घटना जान बूझकर किया गया है। लाइन ने आगे कहा कि पूर्व-मुख्य कनाडाई एयर-दुर्घटना जांचकर्ता लैरी वेंस के विश्लेषण के आधार पर एमएच 370 जब खाई के ऊपर से गुजरा तब इसमें ईंधन और चलने वाले इंजन थे।
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तस्मानिया के शोधकर्ता ने कहा, "इसकी खोज की जाएगी या नहीं, यह अधिकारियों और कंपनियों पर निर्भर है। जहां तक विज्ञान का सवाल है, हम जानते हैं कि पिछली खोजें क्यों विफल रहीं। विज्ञान भी स्पष्ट रूप से बताता है कि MH370 कहां है। हमने MH370 के रहस्य को सुलझा लिया है।" बता दें कि आठ मार्च 2014 में 227 यात्रियों और 12 चालक दल के सदस्यों के साथ MH370 दक्षिणी मलेशिया के कुआलालंपुर हवाई अड्डे से बीजिंग के लिए उड़ान भरने के बाद ही गायब हो गया था। हिंद महासागर में तीन साल तक 120,000 वर्ग किलोमीटर की खोज में भी विमान के हिस्से का कोई सबूत नहीं मिला। केवल मलबे के टुकड़े मिले थे। हालांकि, विमान का पता न लगने पर 2017 में तलाशी अभियान को रोक दिया गया था।
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शोधकर्ता विंसेंट लाइन ने कहा, "MH370 के गायब होने की कहानी, बिना किसी संदेह के 7वें आर्क पर ईंधन की कमी, हाई स्पीड डाइव से लेकर हिंद महासागर में विमान को गायब करने को अंजाम देने का मास्टरमाइंड पायलट की तरफ इशारा करता है। यह मिशन कामयाब हो गया होता अगर विमान का दाहिना पंख लहरों के बीच से नहीं निकला होता।"
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जानबूझकर गायब किया गया था विमान
विंसेंट लाइन यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के इंस्टीट्यूट फॉर मरीन एंड अंटार्कटिक स्टडीज में काम करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि विमान के पंखों, फ्लैपों और फ्लैपरॉन को हुए नुकसान से पता चलता है कि यह घटना जान बूझकर किया गया है। लाइन ने आगे कहा कि पूर्व-मुख्य कनाडाई एयर-दुर्घटना जांचकर्ता लैरी वेंस के विश्लेषण के आधार पर एमएच 370 जब खाई के ऊपर से गुजरा तब इसमें ईंधन और चलने वाले इंजन थे।
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तस्मानिया के शोधकर्ता ने कहा, "इसकी खोज की जाएगी या नहीं, यह अधिकारियों और कंपनियों पर निर्भर है। जहां तक विज्ञान का सवाल है, हम जानते हैं कि पिछली खोजें क्यों विफल रहीं। विज्ञान भी स्पष्ट रूप से बताता है कि MH370 कहां है। हमने MH370 के रहस्य को सुलझा लिया है।" बता दें कि आठ मार्च 2014 में 227 यात्रियों और 12 चालक दल के सदस्यों के साथ MH370 दक्षिणी मलेशिया के कुआलालंपुर हवाई अड्डे से बीजिंग के लिए उड़ान भरने के बाद ही गायब हो गया था। हिंद महासागर में तीन साल तक 120,000 वर्ग किलोमीटर की खोज में भी विमान के हिस्से का कोई सबूत नहीं मिला। केवल मलबे के टुकड़े मिले थे। हालांकि, विमान का पता न लगने पर 2017 में तलाशी अभियान को रोक दिया गया था।