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Australia: हत्या के मामले में वकील ने कोर्ट में एआई से फर्जी तथ्य जुटाकर पेश की दलील, खुलासे के बाद मांगी माफी

Fri, 15 Aug 2025 02:22 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न Published by: बशु जैन Updated Fri, 15 Aug 2025 02:22 PM IST
सार

कोर्ट में वकील ने हत्या के मामले में ऐसे तथ्य और फैसलों की दलील दी जो कहीं दर्ज नहीं थे। इसके बाद वकील ने कोर्ट से माफी मांगी। 

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Australia the lawyer presented his argument in the court by collecting fake facts from AI, apologized
अदालत (सांकेतिक) - फोटो : ANI

विस्तार

ऑस्ट्रेलिया से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां कोर्ट में एक वकील ने हत्या के मामले में एआई से फर्जी तथ्य जुटाकर दलील पेश की। वकील ने कोर्ट को ऐसे मामलों और फैसलों के बारे में बताया, जो अस्तित्व में थे ही नहीं। जांच के बाद जब खुलासा हुआ तो वकील ने कोर्ट से माफी मांगी। 
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विक्टोरिया राज्य के सर्वोच्च न्यायालय में बचाव पक्ष के वकील ऋषि नाथवानी ने हत्या के आरोपी एक किशोर के मामले में प्रस्तुतियों में गलत जानकारी दाखिल करने की पूरी जिम्मेदारी ली। वकील ने न्यायमूर्ति जेम्स इलियट से कहा कि जो कुछ हुआ उसके लिए हम बेहद दुखी और शर्मिंदा हैं। एआई की गलती की वजह से मामले के निपटारे में 24 घंटे की देरी हुई। मामले में जज इलियट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि नाथवानी का मुवक्किल मानसिक रूप से विकलांग होने के कारण हत्या का दोषी नहीं है।
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वकील की फर्जी प्रस्तुतियों में राज्य विधानमंडल में दिए गए भाषण के मनगढ़ंत उद्धरण तथा सर्वोच्च न्यायालय के कथित रूप से गैर-मौजूद मामले के उद्धरण शामिल थे। इलियट के सहयोगियों ने जब वकील की दलीलों की जांच तो वह फर्जी पाई गईं। इस पर वकील से दलील के सबूत मांगे गए। अदालती दस्तावेजों के अनुसार वकीलों ने स्वीकार किया कि उद्धरण मौजूद नहीं हैं और प्रस्तुत किए गए उद्धरण काल्पनिक हैं। वकीलों ने बताया कि उन्होंने जांच की थी कि प्रारंभिक उद्धरण सही थे, इसलिए उन्होंने यह मान लिया था कि अन्य उद्धरण भी सही होंगे।
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जज इलियट ने वकीलों से कहा कि जिस तरह से ये हुआ है, वह असंतोषजनक है। वकील द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कों की सटीकता पर भरोसा करने की न्यायालय की क्षमता न्याय के समुचित प्रशासन के लिए मौलिक है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष वकीलों द्वारा एआई के उपयोग के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए थे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तब तक स्वीकार्य नहीं है जब तक कि उस उत्पाद का स्वतंत्र और पूर्ण सत्यापन न हो जाए।

अमेरिका में सामने आया था मामला
2023 में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक ऐसे ही मामले में एक संघीय न्यायाधीश ने दो वकीलों और एक कानूनी फर्म पर 5,000 डॉलर का जुर्माना लगाया था। न्यायाधीश पी. केविन कास्टेल ने कहा था कि वकीलों ने दुर्भावना से काम किया। लेकिन उन्होंने उनकी क्षमा याचना और यह स्पष्ट करने के लिए उठाए गए सुधारात्मक कदमों की सराहना की कि कठोर प्रतिबंधों की आवश्यकता क्यों नहीं थी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे या अन्य लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों के ज़रिए अपनी दलीलों में फर्जी कानूनी इतिहास पेश न कर पाएं।


बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व निजी वकील माइकल कोहेन के वकीलों द्वारा दायर कानूनी दस्तावेजों में एआई द्वारा गढ़े गए और अधिक काल्पनिक अदालती फैसलों का हवाला दिया गया। कोहेन ने दोष स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें यह एहसास नहीं था कि कानूनी शोध के लिए वे जिस गूगल टूल का उपयोग कर रहे थे, वह तथाकथित एआई मतिभ्रम पैदा करने में भी सक्षम था।
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