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Australia: भारत से बुलाया, पासपोर्ट छीना और बनाया गुलाम... अब भारतीय मूल के दंपती को जेल; जुर्माने में बिका घर
Sat, 08 Nov 2025 08:28 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनेबरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनेबरा
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 08 Nov 2025 08:28 PM IST
सार
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के एक दंपती ने एक भारतीय महिला को आठ साल तक गुलाम बनाकर रखा। यह मामला जब उजागर हुआ तो पुलस ने उन्हें गिरफ्तार किया। वहीं, अदालत ने उनपर 1.40 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लगाया। ऐसे में इस खबर में जानेंगे कि कैसे इस दंपती ने तमिलनाडु की महिला को बुलाकर गुलाम बना लिया।
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जेल में बंद (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : iStock
विस्तार
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के एक दंपती को एक महिला को आठ साल तक गुलाम बनाकर रखने के मामले में पहले से ही जेल की सजा काटते हुए अब एक और बड़ा झटका लगा है। ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के मुताबिक, अदालत ने शुक्रवार को इस दंपती पर नया आर्थिक दंड लगाया है और उनके घर की बिक्री से मिली रकम भी जब्त कर ली गई है।
61 वर्षीय कंदासामी कन्नन और उनकी पत्नी 58 वर्षीय कुमुथिनी को अब अपने घर की बिक्री से मिली रकम का हिस्सा राज्य को सौंपना होगा। अदालत ने आदेश दिया है कि दोनों को संयुक्त रूप से 1.40 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 90,874 अमेरिकी डॉलर का दंड देना होगा। यह घर मेलबर्न के माउंट वेवरली इलाके में था, जिसे 2016 में 14 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बेचा गया था।
मामला कैसे शुरू हुआ?
यह मामला 2007 में शुरू हुआ जब तमिलनाडु की एक महिला टूरिस्ट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया पहुंची। यात्रा और वीजा की व्यवस्था कन्नन दंपती ने खुद की थी। वे उसे घरेलू कामकाज के लिए अपने घर ले गए और पहुंचते ही उसका पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। यह महिला अगले आठ साल तक उसी घर में रही, बच्चों की देखभाल की, खाना बनाया और घर के सारे काम किए, लेकिन उसे किसी तरह की स्वतंत्रता नहीं दी गई।
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पीड़िता की हालत और खुलासा
जुलाई 2015 में यह मामला तब उजागर हुआ जब एक इमरजेंसी कॉल के बाद एंबुलेंस पीड़िता के घर पहुंची। वहां वह बाथरूम में बेहोश, मूत्र के तालाब में पड़ी मिली। उस वक्त उसका वजन केवल 40 किलो था और वह गंभीर बीमारियों हाइपोथर्मिया, मूत्र संक्रमण और अनुपचारित डायबिटीज से जूझ रही थी। अस्पताल पहुंचने के बाद दंपती ने पुलिस और मेडिकल स्टाफ को महिला की पहचान और उनके रिश्ते के बारे में झूठी जानकारी दी, जिससे मामला संदिग्ध हो गया।
जांच, गिरफ्तारी और सजा
पीड़िता के परिवार ने जब भारत में उसकी स्थिति को लेकर चिंता जताई, तो मामला ऑस्ट्रेलिया की मानव तस्करी टीम तक पहुंचा। अक्टूबर 2015 में कन्नन दंपती के घर की तलाशी ली गई और 2016 में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। 2021 में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए कंदासामी को छह और कुमुथिनी को आठ साल की जेल की सजा सुनाई।
अदालत ने माना कि पीड़िता उनके घर में गुलाम की तरह रह रही थी। 2023 में पीड़िता को 4.85 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की आर्थिक सहायता दी गई। अब अदालत ने दोनों से अतिरिक्त जुर्माना वसूलने और संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है।
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61 वर्षीय कंदासामी कन्नन और उनकी पत्नी 58 वर्षीय कुमुथिनी को अब अपने घर की बिक्री से मिली रकम का हिस्सा राज्य को सौंपना होगा। अदालत ने आदेश दिया है कि दोनों को संयुक्त रूप से 1.40 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 90,874 अमेरिकी डॉलर का दंड देना होगा। यह घर मेलबर्न के माउंट वेवरली इलाके में था, जिसे 2016 में 14 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बेचा गया था।
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मामला कैसे शुरू हुआ?
यह मामला 2007 में शुरू हुआ जब तमिलनाडु की एक महिला टूरिस्ट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया पहुंची। यात्रा और वीजा की व्यवस्था कन्नन दंपती ने खुद की थी। वे उसे घरेलू कामकाज के लिए अपने घर ले गए और पहुंचते ही उसका पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। यह महिला अगले आठ साल तक उसी घर में रही, बच्चों की देखभाल की, खाना बनाया और घर के सारे काम किए, लेकिन उसे किसी तरह की स्वतंत्रता नहीं दी गई।
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पीड़िता की हालत और खुलासा
जुलाई 2015 में यह मामला तब उजागर हुआ जब एक इमरजेंसी कॉल के बाद एंबुलेंस पीड़िता के घर पहुंची। वहां वह बाथरूम में बेहोश, मूत्र के तालाब में पड़ी मिली। उस वक्त उसका वजन केवल 40 किलो था और वह गंभीर बीमारियों हाइपोथर्मिया, मूत्र संक्रमण और अनुपचारित डायबिटीज से जूझ रही थी। अस्पताल पहुंचने के बाद दंपती ने पुलिस और मेडिकल स्टाफ को महिला की पहचान और उनके रिश्ते के बारे में झूठी जानकारी दी, जिससे मामला संदिग्ध हो गया।
जांच, गिरफ्तारी और सजा
पीड़िता के परिवार ने जब भारत में उसकी स्थिति को लेकर चिंता जताई, तो मामला ऑस्ट्रेलिया की मानव तस्करी टीम तक पहुंचा। अक्टूबर 2015 में कन्नन दंपती के घर की तलाशी ली गई और 2016 में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। 2021 में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए कंदासामी को छह और कुमुथिनी को आठ साल की जेल की सजा सुनाई।
अदालत ने माना कि पीड़िता उनके घर में गुलाम की तरह रह रही थी। 2023 में पीड़िता को 4.85 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की आर्थिक सहायता दी गई। अब अदालत ने दोनों से अतिरिक्त जुर्माना वसूलने और संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है।