Australia election 2022: ऑस्ट्रेलियाई चुनाव में छाया है चीन का मुद्दा, प्रधानमंत्री मॉरिसन की मुश्किलें बढ़ीं
ऑस्ट्रेलिया में 151 सदस्यीय संसद के निर्वाचन के लिए मतदान 21 मई को होगा। चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में सत्ताधारी गठबंधन लगातार पिछड़ा हुआ है।
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ऑस्ट्रेलिया में आम चुनाव के लिए मतदान होने में अब एक हफ्ते का ही वक्त बचा है। इस बीच प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन की चुनौतियां बढ़ रही हैँ। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष ने हमलावर तेवर अपना रखा है। पर्यवेक्षकों ने राय जताई है कि इस बहस में सत्ताधारी गठबंधन कमजोर पड़ता दिख रहा है। जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा सत्ताधारी लिबरल पार्टी का प्रमुख मुद्दा रहा है।
ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक लेबर पार्टी को 54 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन मिल रहा है, जबकि लिबरल- नेशनल पार्टी के गठबंधन 46 फीसदी मतदाताओं की पसंद है।
अखबार सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि चीन और सोलोमन आईलैंड्स के बीच हुए सुरक्षा समझौते की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सत्ताधारी गठबंधन बैकफुट पर जाने को मजबूर हो गया है। शुक्रवार को विदेश मंत्री मेरिसे पाइन और लेबर पार्टी की विदेश नीति संबंधी प्रवक्ता पेनी वॉन्ग के बीच बहस हुई। इसमें वॉन्ग ने उसी मुद्दे पर सत्ताधारी गठबंधन पर निशाना साधा, जिसे अब तक उसका सबसे मजबूत पक्ष समझा जाता रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक सोलोमन आइलैंड्स के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना कर लेबर पार्टी ने सत्ताधारी दल के इस आरोप को भोथरा कर दिया है कि चीन के प्रति उसका रुख नरम है। बहस के दौरान द ऑस्ट्रेलियन अखबार के रिपोर्टर ने वॉन्ग का ध्यान इस तरफ खींचा कि लेबर पार्टी के उप नेता रिचर्ड मार्लेस पिछले पांच वर्ष में दस बार चीन सरकार के अधिकारियों से मिले हैँ। इस वर वॉन्ग ने कहा- हम सभी जानते हैं कि चुनाव में ऐसी बातों को मुद्दा बनाया जा रहा है। लेकिन मैं साफ करना चाहती हूं कि देशभक्ति लिबरल पार्टी की जागीर नहीं है। हम सभी देशभक्त हैँ।
मार्लेस की चीनी अधिकारियों से मुलाकात का सवाल खुद प्रधानमंत्री मॉरिसन ने उठाया था। उन्होंने कहा- इसमें कुछ ऐसा है, जो ठीक मालूम नहीं पड़ता। लेकिन लेबर पार्टी सोलोमन आइलैंड्स के चीन के खेमे में चले जाने को लेकर मॉरिसन सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उसने कहा है कि मौजूदा सरकार की अयोग्यता के कारण ऑस्ट्रेलिया के पास के एक देश ने चीन के साथ सुरक्षा करार कर लिया।
शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री पीटर डूटन ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि हाल में एक चीनी जासूसी जहाज को ऑस्ट्रेलिया के तट पर देखा गया है। इसके पहले भी सरकार की तरफ से यह कहा चुका है कि चीन के जहाज ऑस्ट्रेलिया के जल क्षेत्र में देखे गए हैँ। विश्लेषकों के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौर में ऐसे बयान चीन को लेकर देश में जारी आशंकाओं को बढ़ाने के लिए दिए गए हैँ। सत्ताधारी गठबंधन ने इसके जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की है। लेकिन सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने अपने विश्लेषण में कहा है कि इस बार ये दांव कारगर नहीं हो रहा है। बल्कि चीन विरोधी सख्त रुख अपनाने की बहस में लेबर पार्टी बढ़त बनाती दिख रही है।
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