13 नवंबर को धरती से महज 386 किमी दूरी से निकला था बस के आकार का एस्टेरॉयड
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13 नवंबर को एक बस के आकार का एस्टेरॉयड धरती से महज 386 किलोमीटर की दूरी से होकर गुजरा था। खगोलविदों ने जानकारी दी है कि इसकी जानकारी अगले दिन तक नहीं हो पाई थी। इस एस्टेरॉयड को 2020VT4 नाम दिया गया है। हवाई के मौना लोआ में स्थित एस्टेरॉयड टेरेस्ट्रियल इंपैक्ट लास्ट अलर्ट सिस्टम ने इसके धरती के पास से गुजरने के 15 घंटे बाद शनिवार की सुबह देखा।
वैज्ञानिकों का कहना है कि करीब 16-33 फीट के आकार का यह एस्टेरॉयड अगर और नजदीक से गुजरा होता तो यह वायुमंडल में ही जल जाता। इस एस्टेरॉयड की कक्षा ने इसे पृथ्वी से उतनी ही दूरी पर पहुंचा दिया, जितनी दूर अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन है। इससे यह अब तक पृथ्वी के सबसे पास से गुजरने वाला एस्टेरॉयड बन गया। बता दें कि पहले इस एस्टेरॉयड को A10sHcN नाम दिया गया था।
Newly-discovered asteroid A10sHcN approached Earth yesterday, passing only a few hundred miles above the South Pacific Ocean. This encounter shortened its orbit, ensuring that this Earth-crosser will make more frequent close approaches.https://t.co/TmkzojIzPf pic.twitter.com/XrnKiiGTyJ
विज्ञापन विज्ञापन— Tony Dunn (@tony873004) November 14, 2020
विशेषज्ञों के अनुसार एक एस्टेरॉयड को पृथ्वी की सतह को नुकसान पहुंचाने के लिए कम से कम 25 मीटर का होना चाहिए। वहीं, कोई एस्टेरॉयड वैश्विक प्रभाव तब डाल सकता है जब उसका आकार एक से दो किलोमीटर तक हो। उदाहरण के तौर पर वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 66 मिलियन साल पहले जिस एस्टेरॉयड ने डॉयनासॉर का अस्तित्व मिटा दिया था वह करीब 12.1 किलोमीटर चौड़ा था।