फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   As reports of Taliban Leader Mullah Baradar held hostage and Akhundzada presumed dead know the whole issue with Haqqani network

बरादर बंधक, अखुंदजादा की मौत?: पंजशीर-अफगान झंडे पर विवाद, फिर बैठक में झड़प, क्या इन मुद्दों पर बिखर गया तालिबान?

Tue, 21 Sep 2021 03:32 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 21 Sep 2021 03:32 PM IST
विज्ञापन
सार
तालिबान में मंत्री पद के बंटवारे के बाद तनाव शुरु होने की बात सामने आई है। दो धड़ों के बीच टकराव के बीच संगठन के सह-संस्थापक हैबतुल्ला अखुंदजादा की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। 
loader
As reports of Taliban Leader Mullah Baradar held hostage and Akhundzada presumed dead know the whole issue with Haqqani network
तालिबान का सहसंस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (बाएं) और हक्कानी नेटवर्क का सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी। - फोटो : Social Media

विस्तार

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की विदाई के बाद तालिबान का जो शासन कायम हुआ था, उसमें अब दरारें दिखने लगी हैं। दरअसल, हाल ही में एक ब्रिटिश मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्ला अखुंदजादा की मौत की अफवाहें उड़ने लगी हैं। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तालिबान का राजनीतिक चेहरा मुल्ला अब्दुल गनी बरादर भी तालिबानी नेताओं के बीच चल रहे तनाव में घिर गया है और उसे बंधक बना लिया गया। मैगजीन के इन दावों पर फिलहाल तो तालिबान की ओर से कोई सफाई नहीं दी गई। हालांकि, काबुल पर कब्जा करने के बाद बरादर और अन्य तालिबानी नेता जिस तरह जनसंपर्क बनाने में जुटे थे, अब वो कोशिशें मीडिया से गायब हैं। इतने दिनों में खुद बरादर भी एक ही बार इन अटकलों पर सफाई देने सामने आया। 

तालिबान में कौन से दो गुटों के बीच तनाव?

दो हफ्ते पहले ही तालिबान की तरफ से अफगानिस्तान में सरकार गठन का एलान किया गया था। इसमें मुल्ला हसन अखुंद को अफगानिस्तान की नई सरकार का नेता बनाया गया, जबकि लंबे समय से दुनिया के सामने तालिबान का चेहरा रहे मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को अखुंद के नीचे डिप्टी लीडर का पद सौंपा गया। इन दोनों के अलावा तालिबान में शामिल हक्कानी गुट को नई सरकार में कई अहम पद सौंपे गए। बताया गया है कि इसी को लेकर तालिबान के पुराने नेताओं ने बगावत छेड़ दी। 

हक्कानी नेटवर्क के पास अफगान सरकार के अहम पद

जहां गृह मंत्री एफबीआई के मोस्ट वॉन्टेड और हक्कानी नेटवर्क के सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी को बनाया गया, वहीं उसके चाचा खलील-उर-रहमान हक्कानी को शरणार्थी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। उधर इसी गुट के नजीबुल्ला हक्कानी को संचार मंत्री और शेख अब्दुल बाकी हक्कानी को उच्च शिक्षा के मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इतना ही नहीं काबुल की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिराजुद्दीन के भाई अनस हक्कानी को सौंपी गई। 

पांच पॉइंट में समझें क्यों बढ़ा तनाव, कैसे हुआ टकराव? 

1. तालिबान में मंत्री पद के इस बंटवारे के बाद ही तनाव की शुरुआत होने की बात सामने आई है। दरअसल, मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तालिबान के संस्थापकों में से एक रहा है। अमेरिकी सेना की वापसी के एलान के दौरान भी बरादर ने ही पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप से लेकर मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार से बातचीत की। उसे कतर में तालिबान के दफ्तर का प्रभार सौंपा गया था। यानी बरादर तालिबान का राजनीतिक चेहरा रहा और उसे ही अफगानिस्तान की अगली सरकार का शीर्ष नेता माना गया। 

2. हालांकि, सरकार गठन में उसे अफगानिस्तान का डिप्टी लीडर बनाया गया और लंबे समय तक तालिबान से अलग काम करने वाले खतरनाक हक्कानी नेटवर्क को अहम पद सौंप दिए गए। ब्रिटिश मैगजीन 'द स्पेक्टेटर' के मुताबिक, बरादर खुद को सीमित किए जाने से नाराज था। उसने अफगान सरकार में और भी पद सौंपे जाने की मांग उठाई, जिसे लेकर उसका हक्कानी गुट के नेताओं के साथ जमकर विवाद हुआ। 

3. रिपोर्ट के मुताबिक, बरादर ने अमेरिका से समझौते के दौरान अफगानिस्तान में मानवाधिकार नियमों के सम्मान और महिलाओं को अधिकार दिलाने की बात भी कही थी। अपने इस वादे के तहत उसने नई सरकार में बड़े बदलावों का विरोध किया और अलग-अलग अल्पसंख्यकों को भी शामिल किए जाने की पैरवी कर दी। इसके अलावा उसने सफेद तालिबानी झंडे के साथ हरे, लाल और काले अफगान झंडे के फहराए जाने का भी समर्थन किया था। एक मीडिया ग्रुप ने बताया कि बरादर ने लड़कियों-महिलाओं को शिक्षा और नौकरी करने देने की बात भी आगे रखी थी और पंजशीर में तालिबान की लड़ाई से पैदा हुई वैश्विक नकारात्मकता का मुद्दा भी उठाया। 

4. लेकिन बरादर की इन मांगों को लेकर तालिबान से भी खौफनाक और कट्टरपंथी संगठन माने जा रहे हक्कानी नेटवर्क के नेताओं ने आपत्ति जता दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मुद्दों पर चर्चा के लिए काबुल के राष्ट्रपति भवन में जो बैठक रखी गई थी, उसमें बरादर गुट और खलील हक्कानी के समर्थक आपस में भिड़ गए। इस दौरान दोनों गुटों के बीच कुर्सियां और मेजें फेंकी गईं। कुछ समर्थकों ने तो एक-दूसरे पर गर्म चाय के प्याले तक उठाल दिए। मैगजीन के मुताबिक एक प्रत्यक्षदर्शी ने तो बैठक में फायरिंग की बात भी कही, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। 

5. मीडिया ग्रुप बीबीसी ने भी तालिबान के सूत्रों के हवाले से तालिबान में फूट पड़ने का दावा किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि दोनों गुटों के बीच बैठक में इस बात पर टकराव हुआ था कि किसने अमेरिका को अफगानिस्तान छोड़ने पर मजबूर किया और इस लिहाज से किसे कैबिनेट में ज्यादा ताकत मिलनी चाहिए। जहां बरादर ने तर्क दिया कि नई सरकार में डिप्लोमेसी पर जोर दिया जाना चाहिए, वहीं हक्कानी नेटवर्क का कहना था कि उसकी लड़ाई के बगैर अमेरिका को भगाना नामुमकिन था। एक सूत्र ने बताया था कि बैठक में मुल्ला बरादर और सिराजुद्दीन के चाचा खलील उर-रहमान हक्कानी के बीच जबरदस्त बहस हुई थी, जिस पर उनके समर्थक आपस में भिड़ गए थे। 

दो हफ्तों में सिर्फ एक बार जारी हुआ बरादर का बयान

दोनों गुटों के बीच हुई इस जंग के बारे में पश्चिमी मीडिया ने भी रिपोर्टिंग की। कहा गया कि टकराव के बाद मुल्ला बरादर  कुछ समय के लिए अंडरग्राउंड हो गया और बाद में कंधार में फिर देखा गया। यहां उसने कई कबायली नेताओं से समर्थन जुटाने के लिए बैठक की। लेकिन तालिबान में दो गुटों के टकराव की खबरें बाहर आने के बाद बरादर को मजबूरन एक रटा हुआ बयान पढ़ाया गया। कई विश्लेषकों का कहना है कि वीडियो में बरादर के भाव किसी बंधक की तरह लग रहे थे।

अखुंदजादा के मारे जाने की भी अफवाहें

तालिबान के दो धड़ों के बीच टकराव की इन खबरों के आने के बाद इस संगठन के सह-संस्थापक हैबतुल्ला अखुंदजादा को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ऐसी अफवाहें उड़ रही हैं कि अखुंदजादा, जिसे अब तक कैमरे के सामने नहीं देखा गया, उसकी पहले ही मौत हो चुकी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि तालिबान में शीर्ष नेता की कमी के चलते ही ताकत के लिए यह जंग शुरू हुई है, जिस पर अब तक नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

बताया गया है कि तालिबानी नेतृत्व के इस फैसले के बाद से ही यह आतंकी संगठन दो धड़ों में बंट चुका है। इसमें एक धड़ा मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का है, जो कि उन्हें देश की कमान न सौंपे जाने से नाराज है, जबकि दूसरा धड़ा हक्कानी गुट का है। जिसकी पहचान तालिबान से अलग एक ज्यादा खूंखार संगठन के तौर पर बन चुकी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed