{"_id":"5dcb2aee8ebc3e5afa2fc3be","slug":"art-work-from-medicine-have-you-ever-tried","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कला से औषधि का काम: क्या आपने कभी आजमाया है!","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
कला से औषधि का काम: क्या आपने कभी आजमाया है!
Wed, 13 Nov 2019 06:04 AM IST
संजीव कुमार झा
यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 13 Nov 2019 06:04 AM IST
विज्ञापन
कला
- फोटो : यूएन हिंदी समाचार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ये जानना वाकई दिलचस्प है कि जन्म होने के पहले से और जीवन का अंत होने तक, नृत्य, गायन या पेंटिंग जैसी गतिविधियों से हमारे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है। इस आर्ट थैरेपी यानी कला के विभिन्न रूपों द्वारा किए जाने वाले उपचार पारंपरिक तरीकों से भी ज्यादा किफायती साबित हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को जारी एक ताजा रिपोर्ट में कला और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक रिपोर्ट जारी की है।
विज्ञापन
रिपोर्ट तैयार करने के लिए 900 से ज्यादा प्रकाशनों का आकलन करने और यह समझने का प्रयास किया गया है कि कला किस तरह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में बेहतरी लाने में मददगार साबित हो सकती है।
विज्ञापन
यह पहली बार है जब इतने व्यापक पैमाने पर ऐसी समीक्षा तैयार की गई है। रिपोर्ट में कला को पांच श्रेणियों में विभाजित करते हुए उनमें हिस्सा लेने से होने वाले शारीरिक लाभ की समीक्षा की गई है।
विज्ञापन
ये पांच श्रेणियां इस प्रकार हैं: प्रदर्शन कला (संगीत, नृत्य, गायन, थिएटर, फिल्म), दृश्य कला (शिल्प, डिजायन, पेंटिंग,फोटोग्राफ़ी); साहित्य (लेखन, पाठन, साहित्यिक समारोहों में शिरकत); संस्कृति (संग्रहालयों, कला- दीर्घाओं, संगीत समारोहों, थिएटर में जाना); ऑनलाइन कला (एनीमेशन व डिजिटल कला)।
योरोप में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के क्षेत्रीय निदेशक पिरोसका ओस्तलिन ने सोमवार को एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि इस अध्ययन में जो उदाहरण शामिल किए गए हैं उनसे स्वास्थ्य व कल्याण को समाज और समुदाय के विस्तृत परिप्रेक्ष्य में समझने में मदद मिलती है।
इसके अलावा कुछ मुश्किलों के समाधान भी प्रस्तुत किए गए हैं जो अब तक सामान्य चिकित्सा तरीकों के जरिए नहीं मिल पा रहे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक विविध प्रकार के सांस्कृतिक और कला के अवसरों से जुड़ने से मनोवैज्ञानिक, दैहिक, सामाजिक और व्यावहारिक असर पड़ता है जिसके नतीजे स्वास्थ्य पर देखने को मिलते हैं।
औषधि के रूप में कला को दो भागों में देखा जा सकता है: रोकथाम व बढ़ावा और प्रबंधन व उपचार। उदाहरण के तौर पर विशेष रूप से संगीत का चयन करने से एचआईवी मरीजों में स्वतंत्रता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में मदद मिली और वे अपनी उपचार प्रक्रियाओं में कायम रहे।
वहीं, कैंसर के उपचार में आर्ट थैरेपी से उपचार के दुष्प्रभावों – उनींदापन, भूख न लगना, मानसिक अवसाद - को कम करने में मदद मिली। प्रबंधन व उपचार पर ध्यान केंद्रित करने से, साप्ताहिक आर्ट थेरेपी में हिस्सा लेने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव से जुड़े भय, सामान्य डिप्रैशन व अभिभावक बनने की बेचैनी को कम कर पाना संभव हुआ है।
गर्भावस्था के दौरान गाना गाने से मां और शिशु के बीच रिश्ता मजबूत होता है, बच्चा कम रोता है और रात में उन्हें बेहतर नींद आती है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ सांस्कृतिक गतिविधियां भी पारंपरिक उपचार के तरीकों जैसी ही किफायती हैं।
किसी कला गतिविधि में हिस्सा लेने से कई प्रकार के लाभ होते हैं इसलिए माना जा रहा है कि इससे बीमारियों की रोकथाम करने में भी मदद मिल सकती है। नीतिगत कमियों को दूर करने की आवश्यकता है।
इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय नीति-निर्माताओं के लिए सिफारिशें भी पेश की गई हैं ताकि स्वास्थ्य कार्यक्रमों तक पहुंच, कला से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के प्रति जागरूकता और भविष्य में शोध पर निवेश सुनिश्चित किया जा सके।
21वीं सदी की शुरुआत से ही, कई बड़े शोधों में कला से स्वास्थ्य-कल्याण पर होने वाले असर के बारे में समझ बढ़ाने का प्रयास किया जाता रहा है।
लेकिन युरोपीय क्षेत्र के सदस्य देशों में अभी इस संबंध में कोई नीतिगत विकास नहीं हो पाया है और यही देश इस अध्ययन के केंद्र में रहे हैं।
लेकिन वर्ष 2000 के बाद से ही इंग्लैंड, फिनलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे और स्वीडन ने ऐसी नीतियाँ अपनाई हैं जिनसे कला के जरिए मानव स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा मिलता है।
वहीं, कैंसर के उपचार में आर्ट थैरेपी से उपचार के दुष्प्रभावों – उनींदापन, भूख न लगना, मानसिक अवसाद - को कम करने में मदद मिली। प्रबंधन व उपचार पर ध्यान केंद्रित करने से, साप्ताहिक आर्ट थेरेपी में हिस्सा लेने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव से जुड़े भय, सामान्य डिप्रैशन व अभिभावक बनने की बेचैनी को कम कर पाना संभव हुआ है।
गर्भावस्था के दौरान गाना गाने से मां और शिशु के बीच रिश्ता मजबूत होता है, बच्चा कम रोता है और रात में उन्हें बेहतर नींद आती है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ सांस्कृतिक गतिविधियां भी पारंपरिक उपचार के तरीकों जैसी ही किफायती हैं।
किसी कला गतिविधि में हिस्सा लेने से कई प्रकार के लाभ होते हैं इसलिए माना जा रहा है कि इससे बीमारियों की रोकथाम करने में भी मदद मिल सकती है। नीतिगत कमियों को दूर करने की आवश्यकता है।
इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय नीति-निर्माताओं के लिए सिफारिशें भी पेश की गई हैं ताकि स्वास्थ्य कार्यक्रमों तक पहुंच, कला से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के प्रति जागरूकता और भविष्य में शोध पर निवेश सुनिश्चित किया जा सके।
21वीं सदी की शुरुआत से ही, कई बड़े शोधों में कला से स्वास्थ्य-कल्याण पर होने वाले असर के बारे में समझ बढ़ाने का प्रयास किया जाता रहा है।
लेकिन युरोपीय क्षेत्र के सदस्य देशों में अभी इस संबंध में कोई नीतिगत विकास नहीं हो पाया है और यही देश इस अध्ययन के केंद्र में रहे हैं।
लेकिन वर्ष 2000 के बाद से ही इंग्लैंड, फिनलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे और स्वीडन ने ऐसी नीतियाँ अपनाई हैं जिनसे कला के जरिए मानव स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा मिलता है।