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सेना प्रमुख नरवणे दौरा : बांग्लादेश में चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब में भारत की ‘वैक्सीन डिप्लोमेसी’
Fri, 09 Apr 2021 03:06 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, ढाका।
एजेंसी, ढाका।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 09 Apr 2021 03:06 AM IST
सार
- पांच दिन के दौरे पर पहुंचे सेना प्रमुख नरवणे ने बांग्लादेशी सेना को दिया एक लाख खुराक का तोहफा
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भारतीय सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे
- फोटो : ANI
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विस्तार
बांग्लादेश में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत ने भी वहां की सेना के साथ संबंधों को और गहरा करने पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। इसके लिए भारत ने ‘वैक्सीन डिप्लोमेसी’ का सहारा लिया है।
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सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने बृहस्पतिवार को ढाका पहुंचने पर बांग्लादेशी सेना अध्यक्ष जनरल अजीज अहमद को उनके जवानों के लिए कोविड-19 वैक्सीन की 100,000 खुराक तोहफे में सौंपी।
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जनरल नरवणे का यह पांच दिवसीय दौरान पिछले महीने बांग्लादेशी स्वतंत्रता दिवस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने के महज दो सप्ताह बाद हो रहा है। इस कारण यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
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जनरल अजीज अहमद के आमंत्रण पर बांग्लादेश पहुंचे जनरल नरवणे ने ढाका कैंट में शिखा अनिर्वाण की वेदी पर माल्यार्पण कर 1971 के मुक्ति युद्ध के नायकों को भी श्रद्धांजलि दी। उन्हें सेनाकुंज पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
भारतीय दूतावास ने कहा, सेना प्रमुख का दौरा दोनों देशों की सेनाओं के बीच मौजूदा करीबी और भाईचारे के संबंधों को और ज्यादा मजबूत बनाने जा रहा है।
भारतीय सेना के अधिकृत ट्विटर हैंडल एडीजीपी आई ने कई ट्वीट कर बताया कि जनरल नरवणे ने ढाका पहुंचने के बाद जनरल अहमद के अलावा बांग्लादेश नेवी के चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल एम. शाहीन इकबाल और उसके बाद बांग्लादेशी वायुसेना के कार्यवाहक चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर वाइस मार्शल एम. अबुल बशर के साथ मुलाकात की। इन मुलकातों में उन्होंने तीनों सेनाओं के प्रमुखों से दोनों देशों के आपसी हितों वाले सैन्य मुद्दों और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत की।
अपने इस दौरे में सेना प्रमुख बांग्लादेश के कई सैन्य स्टेशनों का जायजा लेंगे। साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति सहयोग अभियानों पर आयोजित एक सेमिनार में अपने अनुभव भी युवा अधिकारियों के साथ बांटेंगे।
आगे वह 4 अप्रैल को शुरू हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘शिशिर उग्रोसेना’ के समापन समारोह और हथियारों के प्रदर्शन के भी गवाह बनेंगे। यह बहुस्तरीय यूएन समर्थित आतंकवाद निरोधी अभ्यास है, जो 12 अप्रैल तक चलेगा। इस अभ्यास में बांग्लादेश और भारत की सेनाओं के इतर भूटान व श्रीलंका की सेनाएं भी हिस्सेदारी कर रही हैं, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, तुर्की और सऊदी अरब के पर्यवेक्षक भी भी इसमें पहुंचे हुए हैं।
बांग्लादेश की मुक्ति का 50वां साल होने के कारण खास
यह साल बांग्लादेशी मुक्ति संग्राम की 50वीं सालगिरह और ‘बंगबंधु’ शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी के चलते भारत-बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद अहम है। सेना प्रमुख नरवणे धनमंडी स्थित मुजीबुर रहमान स्मृति संग्रहालय पहुंचकर बांग्लादेश के संस्थापक पिता को भी श्रद्धांजलि देंगे।
तोहफे में दी टी-55 टैंक की प्रतिकृति
एडीजी पीआई ने ट्वीट में बताया कि जनरल एमएम नरवणे ने बृहस्पतिवार को बांग्लादेश को टी-55 टैंक की प्रतिकृति और 75/24 मिमी हॉवित्जर तोप की तस्वीर का तोहफा भी दिया। 1971 के मुक्ति संग्राम में टी-55 टैंक और हॉवित्जर तोप ने गजब की भूमिका निभाई थी। असली टी-55 टैंक और हॉवित्जर तोप भारतीय सेना की तरफ से बांग्लादेश में संग्रहालयों को तोहफे में दिए जा रहे हैं।