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विश्लेषण: ट्रंप जैसा झूठा नहीं देखा... चार साल में 8,500 बेबुनियाद दावे; पत्रकार की पड़ताल में और क्या मिला?

Mon, 28 Sep 2026 10:27 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 28 Sep 2026 10:27 AM IST
सार

कनाडाई फैक्ट चेकर डैनियल डेल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पोल खोली है। 10 साल से बयानों की सत्यता जांचने में जुटे डेल का कहना है कि उन्होंने चार साल में 8,500 बेबुनियाद दावे किए हैं।

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Analysis no liar like donald Trump 8500 baseless claims in four years canadian journalist 10 yr investigation
कनाडा के पत्रकार ने खोली ट्रंप की पोल - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एजेंसी

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर कई बार झूठे दावे करने का आरोप लगता है। ऑपरेशन सिंदूर की बात करें तो जंग रुकवाने के उनके दावे को भारत भी सरासर झूठ करार दे चुका है। लेकिन कनाडाई पत्रकार और फैक्ट चेकर डैनियल डेल की मानें तो शायद ही कोई राजनेता उनसे बड़ा झूठा होगा। डेल का विश्लेषण बताता है कि 2016 से 2020 के दौरान सिर्फ चार वर्षों में ट्रंप ने 8,500 झूठे दावे किए थे।

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डैनियल डेल ने सीएनएन की एक रिपोर्ट में बताया कि उन्होंने 2016 में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रंप के दावों की सत्यता पता लगाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। डेल ने बताया कि सितंबर 2016 से लेकर 2020 (जब ट्रंप राष्ट्रपति पद पर आसीन थे) तक उन्होंने 8,500 से अधिक झूठे दावों को दर्ज किया।
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डेल कहते हैं, 2022 में जब ट्रंप ने फिर से राष्ट्रपति चुनाव अभियान की शुरुआत की तो मैंने उनके भाषण में 20 से अधिक झूठे या भ्रामक दावे गिने। तब से लेकर अब तक उनके बयानों की सच्चाई में कोई सुधार नहीं आया है। उनका लगातार झूठ बोलना अब अमेरिकी और वैश्विक राजनीति का एक मुख्य हिस्सा बन चुका है। एजेंसी
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संकट जितना बड़ा, उतना ही ज्यादा झूठे बयान दिए
डेल ने 10 वर्षों के अपने अनुभव से पाया कि राजनीतिक मुश्किलों के समय ट्रंप सबसे ज्यादा झूठ बोलते हैं। 2018 के मध्यावधि चुनाव, 2019 का महाभियोग मामला, 2020 की कोविड महामारी और 2020 का चुनाव हारना... इन मौकों पर उनके झूठे दावों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

लोगों को यही लगता है कि नेता अपनी नीतियों को बेहतर दिखाने के लिए झूठ बोलते होंगे। लेकिन ट्रंप ने जिन बातों पर झूठ बोला है उनमें बॉय स्काउट्स से आया नकली फोन कॉल, मिशिगन का एक गैर-मौजूद मैन ऑफ द ईयर अवॉर्ड जैसी बातें शामिल हैं। कुछ झूठ तो वह 100 से ज्यादा बार दोहरा चुके हैं।


हावभाव से जाहिर हो जाता है बातों में कितनी सच्चाई
ट्रंप के हावभाव बता देते हैं कि वह कब झूठ बोलने वाले हैं। अगर वह कोई ऐसी कहानी सुनाते हैं जिसमें कोई अज्ञात व्यक्ति उन्हें सर कहकर संबोधित करता है, तो वह अक्सर काल्पनिक होती है। ट्रंप की तरफ से महंगाई दर, पेट्रोल की कीमतें, रैलियों में आई भीड़ या अर्थव्यवस्था को लेकर जो आंकड़े पेश किए जाते हैं, उनमें ज्यादातर गलत होते हैं।

जनता जानना चाहती है सच्चाई
सर्वेक्षणों से पता चलता है कि दो-तिहाई अमेरिकी ट्रंप की ईमानदारी पर भरोसा नहीं करते। सीधा मतलब है, देश का एक बड़ा वर्ग आज भी सच्चाई जानना चाहता है। यह अलग बात है कि पहले कार्यकाल की तुलना में अब ट्रंप के प्रवक्ता उनके उन दावों का भी बेझिझक समर्थन करते हैं जो पूरी तरह गलत साबित हो चुके होते हैं।

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