बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन: हसीना सरकार की मंशा पर उठे सवाल
बांग्लादेश सरकार की तरफ जारी जानकारी के मुताबिक कई वक्ता सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि कई इसे वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगे। बांग्लादेश सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री शेख हसीना बंगबंधु की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं...
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद ने अपने पिता और बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के नायक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान को अंतरराष्ट्रीय शख्सियत के रूप में स्थापित करने की कोशिश को और आगे बढ़ाया है। शनिवार को ढाका में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ, जिसमें शेख मुजीब के राजनीतिक विचारों और शांति के लिए उनके संघर्ष की चर्चा की जाएगी। इस सम्मेलन में कई मशहूर अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को आमंत्रित किया गया है।
बांग्लादेश इस वर्ष अपनी आजादी की 50वीं सालगिरह मना रहा है। उसी सिलसिले में यहां विश्व शांति सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसमें राष्ट्रपति मोहम्मद हमीद समेत देश के सभी बड़े पदाधिकारी भाग ले रहे हैं। जिन वक्ताओं को इसमें आमंत्रित किया गया है, उनमें संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बांग की मून और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन भी हैं। इसके अलावा कई लेखक, चिंतक, कवि, और गायक भी इसमें अपनी राय या रचनाओं की प्रस्तुति करेंगे।
बंगबंधु की विरासत को बढ़ा रहीं हैं आगे
बांग्लादेश सरकार की तरफ जारी जानकारी के मुताबिक कई वक्ता सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि कई इसे वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगे। बांग्लादेश सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री शेख हसीना बंगबंधु की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। वे एक शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण, लोगों के अधिकार सुरक्षित करने वाले, समावेशी, और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। बयान के मुताबिक यही बंगबंधु का सपना था।
आलोचकों का कहना है कि शेख हसीना सरकार ने देश की आजादी की स्वर्ण जयंती को एक दलगत मौका बना दिया है। आरोप है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना खुद को बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम की विरासत की अकेली वारिस के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही हैं। शांति सम्मेलन के जरिए वे यही संदेश देश-दुनिया में फैलाना चाहती हैं।
जारी होगा ‘ढाका शांति घोषणापत्र’
इस सम्मेलन की समाप्ति पर ‘ढाका शांति घोषणापत्र’ नाम से एक विशेष दस्तावेज जारी किया जाएगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन ने कहा है कि भविष्य में यही दस्तावेज बांग्लादेश की सभी शांति और सुरक्षा संबंधी पहल का आधार बनेगा। मोमिन ने कहा कि सरकार ने जानबूझ कर किसी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख को इस सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया। इसमें अलग-अलग देशों से शांतिवादी कार्यकर्ताओं और बौद्धिक एवं कला कर्म से जुड़े व्यक्तियों को ही आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन को लगभग 50 देशों के प्रतिनिधि संबोधित करेंगे। 30 देशों के 59 प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से सम्मेलन में मौजूद होंगे।
बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि बीते पांच दशक में उसकी कूटनीति शांति-केंद्रित रही है। इस दौरान बांग्लादेश ने टिकाऊ विकास, मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं, सामाजिक न्याय और समावेशन को बढ़ावा देने की नीति अपनाई है। लेकिन बांग्लादेश के भीतर बड़ी संख्या में ऐसे समूह और व्यक्ति हैं, जो शेख हसीना सरकार के इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका आरोप है कि हसीना सरकार लगातार अपनी आलोचना के प्रति असहनशील होती जा रही है। उसने विरोधियों का कथित दमन भी किया है। ऐसे में शांति सम्मेलन उसके लिए सिर्फ अपनी छवि सुधारने का मौका बन कर रह गया है।