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West Asia: ट्रंप की धमकी के बीच अराघची-मुनीर की बैठक, क्यों पश्चिम एशिया के लिए मानी जा रही आखिरी कोशिश?
Sat, 23 May 2026 02:38 PM IST
रिया दुबे
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: रिया दुबे
Updated Sat, 23 May 2026 02:38 PM IST
सार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बीच पश्चिम एशिया के हालात पर अहम बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान संकट और तनाव कम करने के कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की। आइए विस्तार से जानते हैं।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच जारी टकराव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच शुक्रवार देर रात तक बातचीत चली, जिसमें पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, ईरान संघर्ष और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
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रुबियो ने कहा कि उम्मीद है कि ईरान भविष्य में जलडमरूमध्य को खोल देगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका और उसके सहयोगियों को प्लान बी तैयार रखना होगा। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है और यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।
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बैठक में किन-किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रोकने के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों और नई पहलों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि इस पाकिस्तान पहले भी ऐसी चर्चा के साथ सुलह की कोशिशे कर चुका है लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है।
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अराघची ने गुटेरेस से की बात
इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी फोन पर बातचीत की। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगें शांति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन ने बार-बार अपने वादे तोड़े, विरोधाभासी रुख अपनाया और सैन्य आक्रामकता दिखाई, जिससे कूटनीतिक प्रक्रिया कमजोर हुई।
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अराघची ने क्या स्पष्ट किया?
हालांकि, अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान युद्धविराम और शांति वार्ता में शामिल बना हुआ है। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने किसी भी देश की संप्रभुता के खिलाफ बल प्रयोग का विरोध करते हुए क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए कूटनीति पर जोर दिया।अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या धमकी दी?
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की तैयारी में जुटा हुआ है। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर रणनीति तैयार कर रहा है, हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।ईरानी विदेश मंत्री ने मतभेदों का किया जिक्र
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने दोनों देशों के बीच गहरे मतभेदों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका को पहले ही 14 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा है। उन्होंने कहा कि परमाणु मुद्दों पर बातचीत की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, क्योंकि पहले भी अमेरिका की “लालच” के कारण हालात युद्ध तक पहुंच गए थे। बघाई ने कहा कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है और उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा इस्तेमाल करने का अधिकार है।नाटो को लेकर रुबियो ने क्या कहा?
उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि उन्होंने नाटो सहयोगियों के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही बहाल करने की संभावित परिस्थितियों पर चर्चा की है। स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग में आयोजित मंत्रिस्तरीय शिखर सम्मेलन में रूबियो ने कहा कि यदि जलडमरूमध्य में कोई हमला होता है, तो उसके लिए वैकल्पिक योजना तैयार रखना जरूरी है।रुबियो ने कहा कि उम्मीद है कि ईरान भविष्य में जलडमरूमध्य को खोल देगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका और उसके सहयोगियों को प्लान बी तैयार रखना होगा। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है और यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।