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Ukraine-Taiwan Crisis: छोटा परमाणु युद्ध भी हुआ, तो दाने-दाने को तहस जाएंगे दुनिया भर के लोग
सार
विशेषज्ञों ने कहा है- युद्ध हो सकता है कि कुछ ही दिन या हफ्तों तक ही चले, लेकिन धरती के जलवायु पर उसका प्रभाव दस साल से ज्यादा समय तक कायम रहेगा। इस प्रभाव से खाद्य पैदावार में भारी गिरावट आएगी।
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क्या दुनिया में छिड़ेगा परमाणु युद्ध?
- फोटो : iStock
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विस्तार
यूक्रेन और ताइवान मसलों को लेकर अमेरिका की रूस और चीन के साथ युद्ध की आशंका गहराती जा रही है। परमाणु विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर दुनिया में कहीं भी सीमित रूप से परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल हुआ, तो उससे दुनिया भर में ऐसा खाद्य संकट खड़ा होगा, जो कम कम से एक दशक तक कायम रहेगा। विशेषज्ञों ने इस बारे में एक खास अध्ययन किया और उन्होंने अपनी मॉडलिंग के आधार पर सीमित परमाणु युद्ध के संभावित असर का अनुमान लगाया है। इस अध्ययन की रिपोर्ट नेचर फूड नाम के जर्नल में छपी है।
अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि शहरों और औद्योगिक इलाकों में परमाणु बम गिराए गए, तो उससे बड़ी मात्र में धुआं निकलेगा, जो धरती के वातावरण के ऊपरी सतह पर जमा हो जाएगा। उसके प्रभाव से दुनिया के तापमान में भारी गिरावट आएगी। इससे धरती ठंडी हो जाएगी। विशेषज्ञों ने कहा है- युद्ध हो सकता है कि कुछ ही दिन या हफ्तों तक ही चले, लेकिन धरती के जलवायु पर उसका प्रभाव दस साल से ज्यादा समय तक कायम रहेगा। इस प्रभाव से खाद्य पैदावार में भारी गिरावट आएगी।
इस अध्ययन से जुड़े रहे विशेषज्ञ रेयान हेनेघम ने अध्ययन से सामने आए निष्कर्षों को लेकर वेबसाइट द कन्वर्सेसन पर एक रिपोर्ट लिखी है। हेनेघम क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में व्याख्याता हैं। उन्होंने बताया है कि अध्ययन के दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि दुनिया के किसी हिस्से में सीमित परमाणु युद्ध भी हुआ तो उसके दुनिया में किस प्रकार के असर देखने को मिलेंगे। खास कर यह समझने की कोशिश की गई कि उसका खाद्य आपूर्ति पर क्या असर होगा। यह समझने के लिए फसल उत्पादन, मछली कारोबार और पशुपालन पर वैश्विक जलवायु के होने वाले प्रभाव को आधार बनाते हुए मॉडल तैयार किए गए।
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हेनेघम ने लिखा है कि परमाणु युद्ध का असर कितना व्यापक होगा, यह इस निर्भर करेगा कि ये युद्ध किन देशों के बीच होता है। अगर अमेरिका और रूस ने एक दूसरे खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया, तो उसका असर सबसे ज्यादा भयंकर होगा। आज की परिस्थितियों में जिन परमाणु ताकतों के बीच तनाव है, उनके बीच युद्ध की कल्पना करते हुए विशेषज्ञों ने छह परिदृश्यों पर विचार किया। उनके मुताबिक सबसे हलके युद्ध से 50 लाख टन परमाणु धुआं धरती के वातावरण में जाएगा। जबकि रूस और अमेरिका के बीच ये युद्ध हुआ, तो डेढ़ करोड़ टन धुआं वातावरण में छा जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर सबसे हलका युद्ध हुआ, तब भी वैश्विक जलवायु पर उसका बहुत खतरनाक असर देखने को मिलेगा। उसके प्रभाव से खाद्य उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। युद्ध के कुछ वर्षों के अंदर ही खाद्य पैदावार में कम से कम 10 फीसदी की कमी आ जाएगी। विशेषज्ञों क कहना है कि औद्योगिक क्रांति के बाद से जितना धुआं आसमान में गया है, उससे कहीं ज्यादा धुआं सीमित परमाणु युद्ध से ही वहां पहुंच जाएगा।
वैसे विशेषज्ञों ने कहा है कि सीमित परमाणु युद्ध जैसा कुछ नहीं होता है। परमाणु हथियारों का चाहे जितनी कम संख्या में इस्तेमाल हो, उनसे विकिरण होता ही है। साथ ही उनसे उठने वाला धुआं वातावरण में लंबे समय तक कायम रहेगा, यह भी निर्विवाद है।
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अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि शहरों और औद्योगिक इलाकों में परमाणु बम गिराए गए, तो उससे बड़ी मात्र में धुआं निकलेगा, जो धरती के वातावरण के ऊपरी सतह पर जमा हो जाएगा। उसके प्रभाव से दुनिया के तापमान में भारी गिरावट आएगी। इससे धरती ठंडी हो जाएगी। विशेषज्ञों ने कहा है- युद्ध हो सकता है कि कुछ ही दिन या हफ्तों तक ही चले, लेकिन धरती के जलवायु पर उसका प्रभाव दस साल से ज्यादा समय तक कायम रहेगा। इस प्रभाव से खाद्य पैदावार में भारी गिरावट आएगी।
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इस अध्ययन से जुड़े रहे विशेषज्ञ रेयान हेनेघम ने अध्ययन से सामने आए निष्कर्षों को लेकर वेबसाइट द कन्वर्सेसन पर एक रिपोर्ट लिखी है। हेनेघम क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में व्याख्याता हैं। उन्होंने बताया है कि अध्ययन के दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि दुनिया के किसी हिस्से में सीमित परमाणु युद्ध भी हुआ तो उसके दुनिया में किस प्रकार के असर देखने को मिलेंगे। खास कर यह समझने की कोशिश की गई कि उसका खाद्य आपूर्ति पर क्या असर होगा। यह समझने के लिए फसल उत्पादन, मछली कारोबार और पशुपालन पर वैश्विक जलवायु के होने वाले प्रभाव को आधार बनाते हुए मॉडल तैयार किए गए।
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हेनेघम ने लिखा है कि परमाणु युद्ध का असर कितना व्यापक होगा, यह इस निर्भर करेगा कि ये युद्ध किन देशों के बीच होता है। अगर अमेरिका और रूस ने एक दूसरे खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया, तो उसका असर सबसे ज्यादा भयंकर होगा। आज की परिस्थितियों में जिन परमाणु ताकतों के बीच तनाव है, उनके बीच युद्ध की कल्पना करते हुए विशेषज्ञों ने छह परिदृश्यों पर विचार किया। उनके मुताबिक सबसे हलके युद्ध से 50 लाख टन परमाणु धुआं धरती के वातावरण में जाएगा। जबकि रूस और अमेरिका के बीच ये युद्ध हुआ, तो डेढ़ करोड़ टन धुआं वातावरण में छा जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर सबसे हलका युद्ध हुआ, तब भी वैश्विक जलवायु पर उसका बहुत खतरनाक असर देखने को मिलेगा। उसके प्रभाव से खाद्य उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। युद्ध के कुछ वर्षों के अंदर ही खाद्य पैदावार में कम से कम 10 फीसदी की कमी आ जाएगी। विशेषज्ञों क कहना है कि औद्योगिक क्रांति के बाद से जितना धुआं आसमान में गया है, उससे कहीं ज्यादा धुआं सीमित परमाणु युद्ध से ही वहां पहुंच जाएगा।
वैसे विशेषज्ञों ने कहा है कि सीमित परमाणु युद्ध जैसा कुछ नहीं होता है। परमाणु हथियारों का चाहे जितनी कम संख्या में इस्तेमाल हो, उनसे विकिरण होता ही है। साथ ही उनसे उठने वाला धुआं वातावरण में लंबे समय तक कायम रहेगा, यह भी निर्विवाद है।