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India-Bangladesh: तल्खी बढ़ने की आशंका के बीच करीब आए भारत-बांग्लादेश; खालिदा जिया से अलग तारिक रहमान का रुख

Sun, 29 Mar 2026 05:16 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Sun, 29 Mar 2026 05:16 AM IST
सार

भारत-बांग्लादेश के संबंधों में सुधार दिख रहा है। नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने एक तरफ जहां जनसंहार दिवस पर पाकिस्तान को लताड़ा है, वहीं हालिया विवादों को खत्म करते हुए अपने देश में आईपीएल के प्रसारण पर लगी रोक को हटा दिया है। तारिक रहमान का ये रुख पूरी तरह उनकी मां खालिदा जिया के उलट हैं।

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Amid fears of escalate tensions, India-Bangladesh come closer; Tarique Rahman's stance differs from his Mother
तारिक रहमान, बांग्लादेशी प्रधानमंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में भारत से रिश्तों में आई तल्खी इसी साल फरवरी महीने में आम चुनाव के नतीजे आने के बाद और बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। कारण था पाकिस्तान का करीबी और भारत से दूरी बनाए रखने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की जीत। हालांकि पूर्वानुमानों और आशंकाओं के उलट भारत और बांग्लादेश के बीच दूरी की जगह करीबी बढ़ रही है।
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प्रधानमंत्री तारिक रहमान की जनसंहार दिवस पर पाकिस्तान को खरी-खरी, आईपीएल प्रसारण पर लगा प्रतिबंध हटना और विदेश मंत्री खलील उर रहमान का भारत दौरा तय होना बता रहा है कि बांग्लादेश अंतरिम सरकार के दौरान ठंडे पड़े द्विपक्षीय रिश्तों में गर्माहट लाना चाहता है। खासकर पीएम तारिक का 1971 में पाकिस्तानी सेना के कत्लेआम पर अपनी ही पार्टी से अलग रुख अपनाना चर्चा का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि रहमान ने इस संगठित हत्याकांड का प्रतिरोध नहीं करने पर तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया। इतना ही नहीं नरसंहार दिवस के जरिये वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता के मूल्य और महत्व समझाने पर जोर भी दिया।
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खालिदा जिया देती थीं पाकिस्तान को तरजीह
दरअसल सत्ता में आने के बाद जब शेख हसीना सरकार ने जनसंहार की जांच शुरू की तब बीएनपी ने इसे राजनीति प्रेरित बताते हुए इसका विरोध किया था। तब बीएनपी की कमान वर्तमान पीएम तारिक की दिवंगत मां और पूर्व पीएम खालिदा जिया के हाथों में थी। इतना ही नहीं 1991 से 1996, 2001 से 2006 तक पीएम रहने के दौरान खालिदा ने भारत पर पाकिस्तान को तरजीह दी।

भारत की सुरक्षा चिंताओं का ध्यान
बांग्लादेश की जमीन के दुरुपयोग की भारत की चिंता को भी दूर करने की कोशिश की गई है। माह की शुरुआत में बांग्लादेश डायरेक्टर जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस मेजर जनरल राशिद चौधरी की रॉ प्रमुख पराग जैन और अपने समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ अहम बैठक हुई थी।


विदेश मंत्री के दौरे पर नजर
फिलहाल संबंधों में सुधार की इस कड़ी में सबकी निगाहें 7 अप्रैल को भारत दौरे पर आ रहे बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान पर है। इस दौरे से पूर्व दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर की तल्खी खत्म हो चुकी है। वीजा सेवाएं शुरू हो गई हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत ने बांग्लादेश को ऊर्जा संकट से निपटने में मदद की है। ऐसे में रहमान के भारत दौरे में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सहित कई मामले में आगे बढ़ने पर सहमति बन सकती है।

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भारत से दूरी की कीमत पड़ी है भारी
दरअसल बांग्लादेश के पास भारत से अपने ऐतिहासिक, आर्थिक और भौगोलिक संबंधों का विकल्प नहीं है। अंतरिम सरकार के दौरान भारत विरोधी गतिविधि की कीमत बांग्लादेश कई मोर्चे पर भुगत चुका है। फिर दोनों देशों के बीच गंगा नदी संधि की मियाद भी इस साल दिसंबर में खत्म हो रही है। ऐसे में संकेत है कि बांग्लादेश शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग से पहले अपने आर्थिक हित को तरजीह देना चाहता है।

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