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अमेरिका में तेजी से फैल रहे हैं यौन रोग, पुरानी सफलताओं पर फिरा पानी

Fri, 16 Apr 2021 02:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 16 Apr 2021 02:43 PM IST
सार

आंकड़ों के मुताबिक एसटीडी से पीड़ित होने वालों में ब्लैक समुदाय के लोगों की संख्या श्वेत समुदाय के लोगों की तुलना में पांच से आठ गुना तक ज्यादा है। पीड़ित हए हिस्पैनिक (स्पेनी भाषी) लोगों की संख्या श्वेत समुदाय के लोगों से दो गुना ज्यादा है...

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Americans are acute infected by sexually transmitted diseases like chlamydia, gonorrhea and syphilis for the sixth consecutive year
अमेरिकी नागरिक - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिका में यौन संक्रमण के जरिए फैलने वाले रोगों (एसटीडी) की स्थिति और गंभीर हो गई है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक लगातार छठे साल इन रोगों से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हुआ। 2019 में इन रोगों से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या 25 लाख तक पहुंच गई, जो एक रिकॉर्ड है।

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ये जानकारी अमेरिका सेंटर फॉर डीजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट में दी गई है। इसके मुताबिक 2019 में क्लैमाइडिया, प्रमेह (गोनोरिया) और सिफलिस से लाखों लोग संक्रमित हुए। सीडीसी ने कहा है कि 2020 के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक इन रोगों के फैलने का ट्रेंड बीते साल भी जारी रहा। सीडीसी के मुताबिक इन रोगों से सबसे ज्यादा प्रभावित नस्लीय अल्पसंख्यक, समलैंगिक या बाइसेक्सुअल पुरुष और नौजवान हो रहे हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक एसटीडी से पीड़ित होने वालों में ब्लैक समुदाय के लोगों की संख्या श्वेत समुदाय के लोगों की तुलना में पांच से आठ गुना तक ज्यादा है। पीड़ित हए हिस्पैनिक (स्पेनी भाषी) लोगों की संख्या श्वेत समुदाय के लोगों से दो गुना ज्यादा है। अमेरिका के कुछ इलाकों में देखा गया कि गोनोरिया से विषमलिंगी पुरुष तकरीबन 42 फीसदी ज्यादा पीड़ित हुए। लेकिन सिफलिस से ज्यादातर समलैंगिक या बायसेक्सुअल पुरुष ज्यादा पीड़ित हुए।
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साल 2019 में नौजवानों में क्लैमाइडिया के मामलों में 61 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस उम्र वर्ग के लोगों में गोनोरिया से पीड़ित होने वालों की संख्या 2018 की तुलना में 42 फीसदी ज्यादा रही। नवजात शिशुओं में सिफलिस के मामले तेजी से बढ़े हैं। 2019 में ऐसे मामलों की संख्या चार गुना बढ़ गई।

सीडीसी में एसटीडी रोकथाम विभाग के कार्यवाहक निदेशक डॉ राउल रोमागुएरा ने पत्रकारों से कहा- ‘अभी 20 साल भी नहीं गुजरे, जब अमेरिका में गोनोरिया के मामले इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। सिफलिस का लगभग सफाया कर दिया गया था। क्लैमाइडिया के निदान की दिशा में प्रगति हुई थी, जिससे उससे संक्रमित लोगों की पहचान आसान हो गई थी। लेकिन 2015 से 2019 तक इन रोगों से पीड़ित लोगों की संख्या में 30 फीसदी बढ़ोतरी हो गई।’ डॉ रोमागुएरा ने कहा कि एसटीडी को रोकने में जो ऐतिहासिक सफलता मिली थी, वह हाल के वर्षों में आकर हाथ से निकल गई है।

अब कुछ विशेषज्ञों ने आंशका जताई है कि 2020 के जब पूरे आंकड़े सामने आएंगे और 2021 में भी यौन संक्रमण से होने वाले रोगों की संख्या और तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह कोरोना महामारी के दौरान ऐसे रोगों की जांच में खड़ी हुई दिक्कतें हैं। अस्पतालों में कर्मचारियों को कोरोना महामारी से निपटने में लगा दिया गया। एसटीडी जांच का काम बहुत सी जगहों पर आउटसोर्स कर दिया गया है। इसका मतलब है कि बहुत से लोगों के संक्रमण की जांच ही नहीं हो पाएगी। एसडीटी से पीड़ित कई मरीजों में रोग का लक्षण नहीं दिखते हैँ। खास खतरा ऐसे मरीजों के लिए है। क्योंकि उनकी जांच समय पर नहीं होगी, जबकि रोग फैलता रहेगा।  


विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण का निदान और उपचार सही समय पर ना होने पर मरीजों के यौनांग क्षेत्र में कभी-कभी या लगातार दर्द, नपुसंकता, और महिलाओं में गर्भधारण संबंधी दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबी अवधि में इनका खतरनाक असर हो सकता है। डॉ रोमागुएरा ने कहा- ‘नए आंकड़ों से इस समस्या पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत सामने आई है। अगर ऐसा किया गया, तभी भविष्य में आने वाली रिपोर्टों से अलग सूरत उभरेगी।’ दूसरे विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि अगर अभी जरूरी ध्यान नहीं दिया गया, तो इन रोगों की रोकथाम लगातार मुश्किल होती चली जाएगी।

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