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गलवां झड़प में मारे गए थे चीन के 60 से ज्यादा सैनिक, अमेरिकी अखबार का खुलासा

Sun, 13 Sep 2020 12:00 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: अनवर अंसारी Updated Sun, 13 Sep 2020 12:00 PM IST
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American News Paper Newsweek Reoprt Says 60 Chinese Troops Killed In Galwan Clash in Ladakh
india china disputes - फोटो : ANI

लद्दाख की गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प को लेकर अमेरिकी अखबार न्यूज वीक ने बड़ा खुलासा किया है। अपने आलेख में न्यूजवीक ने कहा है कि 15 जून को हुई हिंसक झड़प में चीन के 60 से ज्यादा सैनिक मारे गए। बताया गया है कि भारतीय क्षेत्र में आक्रामक गतिविधि के वास्तुकार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग थे, लेकिन उनकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) इसमें फ्लॉप हो गई। 

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आलेख में कहा गया है कि भारतीय सीमा पर पीएलए की विफलता के परिणाम दूरगामी होंगे। चीनी सेना ने शुरुआत में ही जिनपिंग को कहा था कि वह फौज में विरोधियों को बाहर करने और वफादारों को भर्ती करने पर जोर दें। जाहिर है इस बात का परिणाम यह होगा कि कुछ बड़े अफसरों पर भी गाज गिरेगी। 
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यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विफलता के चलते चीन के शासक शी जिनपिंग भारत के खिलाफ एक और आक्रामक कदम उठाने के लिए उत्तेजित होंगे। गौरतलब है कि जिनपिंग पार्टी के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के अध्यक्ष भी हैं और पीएलए के नेता भी हैं। 
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मई की शुरुआत में ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के दक्षिण में चीन की फौजें आगे बढ़ीं, यहां लद्दाख में तीन अलग-अलग इलाकों में यह एशिया के दो सबसे बड़े देशों के बीच अस्थायी सीमा है। यहां पर सीमा तय नहीं है और इसलिए पीएलए भारत की सीमा में घुसती रहती है। यहां घुसपैठ तब से ज्यादा बढ़ गई है, जब 2012 में शी जिनपिंग पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बनें।

मई में सीमा पर हुई घुसपैठ से भारत चौंक गया था। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के क्लिओ पास्कल ने बताया कि रूस ने मई महीने में भारत को बताया था कि तिब्बत के स्वायत्तशासी क्षेत्र में चीन बीजिंग का लगातार युद्धाभ्यास इस इलाके में छिपकर आगे बढ़ने की तैयारियां हैं। 

वहीं, चीन द्वारा 15 जून को गलवां घाटी में हुई घुसपैठ को लेकर भारत चकित रह गया। यह पूरी तरह से सोची-समझी चाल थी और चीन के सैनिकों के साथ झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए। दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों के बीच पिछले 45 सालों में हुई यह पहली भिड़ंत थी। 


बीजिंग द्वारा विवादित इलाकों में घुसपैठ करना उसकी पुरानी आदत है। वहीं, 1962 की हार से भारतीय नेता और जवान मानसिक रूप से लकवाग्रस्त हो चुके हैं और इसलिए वे सीमा पर सुरक्षात्मक रहते हैं। हालांकि, गलवां घाटी में ऐसा नहीं हुआ। इस झड़प में चीन के 43 जवानों की मौत हुई। वहीं, पास्कल ने बताया कि यह आंकड़ा 60 से अधिक हो सकता है। भारतीय जवान बहादुरी से लड़े। दूसरी तरफ, चीन ने खुद को हुए नुकसान को नहीं बताया है। 

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