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भारतीय मूल की नहीं हैं अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार तुलसी गबार्ड, सामने आई यह बात
Mon, 25 Nov 2019 07:51 AM IST
देव कश्यप
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 25 Nov 2019 07:51 AM IST
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नरेंद्र मोदी-तुलसी गबार्ड
- फोटो : PTI
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अमेरिकन कांग्रेस की पहली हिंदू सांसद और डेमोक्रेट पार्टी से राष्ट्रपति पद की दावेदार तुलसी गबार्ड के बारे में कहा जाता है कि वह भारतीय मूल की हैं। वह भारतीय-अमेरिकी तबके में खासी लोकप्रिय भी हैं। तुलसी गबार्ड का जन्म 12 अप्रैल 1981 को अमेरिका के लेलोआलोआ में हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका के दौरे के दौरान तुलसी गबार्ड ने भी प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका में स्वागत किया था और उन्होंने 22 सितंबर को हाउडी मोदी कार्यक्रम में शामिल न हो पाने को लेकर माफी मांगी थी। 38 साल की गबार्ड अमेरिकी कांग्रेस की पहली हिंदू महिला हैं। गबार्ड चार बार सांसद रह चुकी हैं। वह कांग्रेस सदस्यों के उस समूह का हिस्सा थीं जिसने 2016 में प्रधानमंत्री मोदी का तब स्वागत किया था जब उन्होंने कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था।
गबार्ड भारत और अमेरिका के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने की वकालत करती रही हैं। उन्होंने 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर मोदी को बधाई दी थी। वह अमेरिका की पहली हिंदू महिला हैं जो राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाली हैं। वह हिंदू अमेरिकियों के बीच काफी मशहूर हैं। इसलिए उनके बारे में कहा जाता है कि वह भारतीय मूल की हैं।
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डेट्रॉयट में बहस के दौरान तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वह देशभक्त की तरह बर्ताव नहीं कर रहे हैं। गबार्ड का यह बयान ट्रंप के उस ट्वीट के बाद आया था, जिसमें उन्होंने चार डेमोक्रेट महिलाओं पर नस्लीय टिप्पणी की थी।
ट्रंप ने 15 जुलाई को अपने ट्वीट में इन डेमोक्रेट से कहा था कि वे जहां से आई हैं, वहां वापस चली जाएं। इसके बाद ट्रंप की टिप्पणी पर अमेरिकी संसद में संकल्प पारित कर निंदा की गई थी। गबार्ड ने राष्ट्रपति पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें देशभक्ति के मायने मालूम हैं। उन्होंने कहा, मुझे हमारे देश (अमेरिका) से प्रेम है।
मैंने बतौर सैनिक 16 साल सेवाएं दी हैं। दो बार मध्यपूर्व में तैनात रही हूं और संसद में करीब सात साल से हूं। गबार्ड ने कहा, बतौर राष्ट्रपति मैं व्हाइट हाउस में असली देशभक्ति की भावना स्थापित करूंगी। सिर्फ अमीरों के लिए नहीं बल्कि आम अमेरिकी के हित में काम करूंगी।
गबार्ड के बारे में की कई अन्य मीडिया आउटलेट्स ने भी लेख प्रकाशित किए हैं जहां यह दावा किया जा रहा है कि गबार्ड अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के लिए पहली भारतीय मूल की महिला उम्मीदवार हैं।
तुसली गबार्ड ने भारतीय मूल के होने का खंडन करते हुए अक्टूबर 2012 में एक ट्वीट भी किया था। जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह भारतीय मूल की नहीं हैं।
इसके अलावा, एक भारतीय अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, गैबार्ड का जन्म अमेरिकी सेमोन वंश के एक परिवार में हुआ था, जो अमेरिकी राज्य हवाई के मूल निवासी है। उनके पिता एक कैथोलिक थे और उनकी मां हिंदू धर्म में परिवर्तित हो गईं। गबार्ड जब वह किशोरी थी तो उन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया था। तुलसी गबार्ड का जन्म 12 अप्रैल 1981 को अमेरिका के लेलोआलोआ में हुआ था।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका के दौरे के दौरान तुलसी गबार्ड ने भी प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका में स्वागत किया था और उन्होंने 22 सितंबर को हाउडी मोदी कार्यक्रम में शामिल न हो पाने को लेकर माफी मांगी थी। 38 साल की गबार्ड अमेरिकी कांग्रेस की पहली हिंदू महिला हैं। गबार्ड चार बार सांसद रह चुकी हैं। वह कांग्रेस सदस्यों के उस समूह का हिस्सा थीं जिसने 2016 में प्रधानमंत्री मोदी का तब स्वागत किया था जब उन्होंने कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था।
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गबार्ड भारत और अमेरिका के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने की वकालत करती रही हैं। उन्होंने 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर मोदी को बधाई दी थी। वह अमेरिका की पहली हिंदू महिला हैं जो राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाली हैं। वह हिंदू अमेरिकियों के बीच काफी मशहूर हैं। इसलिए उनके बारे में कहा जाता है कि वह भारतीय मूल की हैं।
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डेट्रॉयट में बहस के दौरान तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वह देशभक्त की तरह बर्ताव नहीं कर रहे हैं। गबार्ड का यह बयान ट्रंप के उस ट्वीट के बाद आया था, जिसमें उन्होंने चार डेमोक्रेट महिलाओं पर नस्लीय टिप्पणी की थी।
ट्रंप ने 15 जुलाई को अपने ट्वीट में इन डेमोक्रेट से कहा था कि वे जहां से आई हैं, वहां वापस चली जाएं। इसके बाद ट्रंप की टिप्पणी पर अमेरिकी संसद में संकल्प पारित कर निंदा की गई थी। गबार्ड ने राष्ट्रपति पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें देशभक्ति के मायने मालूम हैं। उन्होंने कहा, मुझे हमारे देश (अमेरिका) से प्रेम है।
मैंने बतौर सैनिक 16 साल सेवाएं दी हैं। दो बार मध्यपूर्व में तैनात रही हूं और संसद में करीब सात साल से हूं। गबार्ड ने कहा, बतौर राष्ट्रपति मैं व्हाइट हाउस में असली देशभक्ति की भावना स्थापित करूंगी। सिर्फ अमीरों के लिए नहीं बल्कि आम अमेरिकी के हित में काम करूंगी।
गबार्ड के बारे में की कई अन्य मीडिया आउटलेट्स ने भी लेख प्रकाशित किए हैं जहां यह दावा किया जा रहा है कि गबार्ड अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के लिए पहली भारतीय मूल की महिला उम्मीदवार हैं।
तुसली गबार्ड ने भारतीय मूल के होने का खंडन करते हुए अक्टूबर 2012 में एक ट्वीट भी किया था। जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह भारतीय मूल की नहीं हैं।
@ronejoq @amisri I am not of Indian origin.
— Tulsi Gabbard (@TulsiGabbard) October 17, 2012
इसके अलावा, एक भारतीय अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, गैबार्ड का जन्म अमेरिकी सेमोन वंश के एक परिवार में हुआ था, जो अमेरिकी राज्य हवाई के मूल निवासी है। उनके पिता एक कैथोलिक थे और उनकी मां हिंदू धर्म में परिवर्तित हो गईं। गबार्ड जब वह किशोरी थी तो उन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया था। तुलसी गबार्ड का जन्म 12 अप्रैल 1981 को अमेरिका के लेलोआलोआ में हुआ था।