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पुराने दोस्त पाकिस्तान के पीछे क्यों पड़ा अमेरिका?

Fri, 05 Jan 2018 12:09 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 05 Jan 2018 12:09 PM IST
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Why America acting against its all time close ally Pakistan
पाकिस्तान को लेकर अमेरिका का रवैया नरम रहा है और वह इसे आर्थिक मदद भी देता रहा है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के हालिया ट्वीट के बाद हालात बदलते दिख रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि बीते वर्षों में पाकिस्तान को अरबों डॉलर की मदद देना बेवकूफी थी और इसके बदले में उन्हें पाकिस्तान की तरफ से धोखे के सिवाय कुछ नहीं मिला।
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इसके बाद अंतत: पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद रोक दी गई है। लेकिन ऐसा क्यों है कि कभी पाकिस्तान को भारी भरकम आर्थिक मदद देने वाला अमेरिका, अचानक उससे इतनी बेरुखी दिखा रहा है?
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इस बारे में बीबीसी ने पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों पर नजर रखने वाले अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डेनियल मार्की से बात की। मार्की ने 'नो एग्जिट फ्रॉम पाकिस्तान' नाम की किताब भी लिखी है। मार्की कहते हैं कि ट्रंप के हालिया बयानों से ऐसा लगता है कि पाकिस्तान को लेकर अमेरिका का रवैया अब ज्यादा सख़्त हो रहा है।
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उन्होंने कहा, "इससे पहले के राष्ट्रपतियों जैसे ओबामा और बुश को लगता था कि पाकिस्तान को फंडिंग देने से फायदा होगा लेकिन अब पाकिस्तान को पुचकारने के बजाय डंडा दिखाया जाने लगा है।"

अमेरिका अब पाकिस्तान को दी जाने वाले साढ़े पच्चीस करोड़ डॉलर की सैनिक मदद रोक रहा है जो फैसला अब तक टलता आ रहा था। अमेरिका पाकिस्तान को ये राशि हक्कानी नेटवर्क पर कार्रवाई करने की शर्त पर दे रहा था लेकिन इसका कोई ख़ास असर दिख नहीं रहा था।

मार्की का अनुमान है कि आने वाले वक्त में अमेरिका के फैसलों में और सख्ती आ सकती है। मसलन आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) जैसे संगठनों से अंतरराष्ट्रीय कर्ज के लिए समर्थन देने से पीछे हट सकता है। प्रोफेसर मार्की मानते हैं कि बेशक़ अमेरिका को भी पाकिस्तान की जरूरत है क्योंकि अफगानिस्तान में उसके सैनिक हैं और उनके आने-जाने के लिए दुनिया के नक्शे पर ज्यादा रास्ते नहीं बचे हैं।

ईरान बंद है और मध्य एशिया में रूस के साथ भी अमेरिका के सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं। ऐसे में पाकिस्तान से होकर जाना ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के लिए पाकिस्तान के अपने फायदे हैं। दूसरी बात ये कि पाकिस्तान परमाणु शक्ति संपन्न देश है जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है। ऐसा भी नहीं है कि पाकिस्तान एकदम अकेला है। चीन उसका पुराना साथी है जो उसे अरबों डॉलर की मदद देता आ रहा है।"

क्या पाकिस्तान पर इन धमकियों और चेतावनियों का असर होगा?

इसके जवाब में प्रोफेसर मार्की कहते हैं, "पाकिस्तान पर असर होने के बहुत कम आसार हैं। अफगानिस्तान उसके लिए भी बेहद अहम है। कड़े रवैये के साथ अमेरिका को उसे समझाना भी होगा कि हक्कानी नेटवर्क का ख़ात्मा पाकिस्तान के अपने हित में ही है।"

मार्की के मुताबिक, पाकिस्तान को अब भी यही लगता है कि अमेरिका अफगानिस्तान की मुसीबतें उनके लिए छोड़ जाएगा और उसके पास मदद के लिए कोई दोस्त नहीं बचेगा।

ट्रंप ने सोमवार को ट्वीट करके कहा था, "अमेरिका ने पिछले 15 सालों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दी और उसने बदले में झूठ और छल के सिवाय कुछ नहीं दिया। वह सोचता है कि अमरीकी नेता मूर्ख हैं। हम अफग़ानिस्तान में जिन आतंकवादियों को तलाश रहे हैं, उन्होंने उन्हें पनाह दी। अब और नहीं।"

ट्रंप के इस बयान पर पाकिस्तानी सोशल मीडिया में कड़ी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं और चीन भी उसके बचाव में उतर आया था।
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