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जलवायु बिगाड़ रहा है भारत, हम कैसे हुए जिम्मेदार: डोनाल्ड ट्रंप
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Mon, 01 May 2017 12:48 PM IST
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डोनाल्ड ट्रंप के लिए 'करो या मरो' की स्थिति
- फोटो : Reuters
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल़्ड ट्रंप ने पैरिस समझौते के नाम पर भारत समेत एशिया के कई बड़े देशों पर निशाना साधा है। ट्रंप ने रविवार को हैरिसबर्ग, पेन्सिल्वेनिया में आयोजित रैली में कहा कि पैरिस समझौता 'एक तरफा' है। इस समझौते के तहत अमेरिका खरबों डॉलर खर्च कर रहा है, जबकि रूस, चीन और भारत जैसे प्रदूषण फैलाने वाले देश 'कुछ नहीं' दे रहे।
ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस समझौते पर अगले 15 दिनों में 'बड़ा फैसला' लिया जाएगा। रैली में उन्होंने वैश्विक पर्यावरण को लेकर हुई इस क्लाइमेट डील को 'एकतरफा' बताया। इसके तहत पैसों का भुगतान करने के लिए अमेरिका को 'गलत तरीके' से निशाना बनाया जाता है, जबकि प्रदूषण फैलाने वाले रूस, चीन और भारत जैसे बड़े देश कुछ भी योगदान नहीं दे रहे।
जलवायु परिवर्तन को लेकर 2015 में संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक ड्राफ्ट पर 194 देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। 143 देशों ने इसके प्रति दृढ़ता भी दिखाई थी। दरअसल, इस समझौते का मकसद दुनिया के बढ़ते औसत जलवायु तामपान को दो डिग्री तक नीचे लाना था।
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ट्रंप के दावे के अनुसार, इस समझौते के साथ प्रतिबद्धता दिखाने के तहत अमेरिकी जीडीपी को एक दशक में 2.5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 1606 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का नुकसान हुआ है। ट्रंप ने कहा कि इस 'अतिरिक्त' खर्च के चलते अमेरिका में कई फैक्ट्रियां और प्लांट्स बंद हो जाएंगे।
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ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस समझौते पर अगले 15 दिनों में 'बड़ा फैसला' लिया जाएगा। रैली में उन्होंने वैश्विक पर्यावरण को लेकर हुई इस क्लाइमेट डील को 'एकतरफा' बताया। इसके तहत पैसों का भुगतान करने के लिए अमेरिका को 'गलत तरीके' से निशाना बनाया जाता है, जबकि प्रदूषण फैलाने वाले रूस, चीन और भारत जैसे बड़े देश कुछ भी योगदान नहीं दे रहे।
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जलवायु परिवर्तन को लेकर 2015 में संयुक्त राष्ट्र के पारंपरिक ड्राफ्ट पर 194 देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। 143 देशों ने इसके प्रति दृढ़ता भी दिखाई थी। दरअसल, इस समझौते का मकसद दुनिया के बढ़ते औसत जलवायु तामपान को दो डिग्री तक नीचे लाना था।
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ट्रंप के दावे के अनुसार, इस समझौते के साथ प्रतिबद्धता दिखाने के तहत अमेरिकी जीडीपी को एक दशक में 2.5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 1606 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का नुकसान हुआ है। ट्रंप ने कहा कि इस 'अतिरिक्त' खर्च के चलते अमेरिका में कई फैक्ट्रियां और प्लांट्स बंद हो जाएंगे।