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जलवायु परिवर्तन का 300 करोड़ का बजट कहीं और फूंक डाला
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 10 Apr 2017 11:07 AM IST
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हाल ही में देहरादून में हुई कॉमनवेल्थ फॉरेस्ट्री कॉन्फ्रेंस-2017 में 49 देशों के प्रतिनिधियों ने जिस जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर गहरी चिंता जताई थी, उस पर उत्तराखंड सरकार रत्ती भर संजीदा नहीं है।
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आलम यह है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के आदेश के बावजूद किसी भी विभाग ने जलवायु परिवर्तन से संबंधित एक भी प्रस्ताव वित्त विभाग को नहीं भेजा। इसके लिए तीन सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसे सभी विभागों को अपने पांच से 10 फीसदी बजट से निकालना था।
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अब पता चला है कि यह पैसा अन्य मदों में फूंक दिया गया। उत्तराखंड के हिमालयी राज्य होने की वजह से केंद्र सरकार प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के मामले में अधिक गंभीर है। इसके लिए ऊर्जा, वन विभाग, कृषि, पेयजल निगम, जलागम, लोक निर्माण विभाग समेत एक दर्जन विभागों से प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। इन विभागों को उत्तराखंड क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान में भी शामिल किया गया है।
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केंद्र सरकार के दबाव बनाने पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सभी विभागों को निर्देश दिए थे कि अपने बजट की पांच से 10 फीसदी धनराशि से ऐसे विभागीय प्रोजेक्ट बनाएं जो जलवायु परिवर्तन एक्शन प्लान की परिधि में आते हों। सभी विभागों को इस संबंध में निर्देश भी जारी कर दिए गए, लेकिन एक साल बीत गया किसी विभाग ने एक भी प्रोजेक्ट का प्रस्ताव वित्त विभाग को नहीं भेजा है। ऐसा भी नहीं है कि इन विभाग को अलग से कोई प्रोजेक्ट बनाना था।
विभागों को अपने ही कार्यों से संबंधित प्रोजेक्ट बनाने थे और इतना ध्यान रखना था कि ये जलवायु परिवर्तन के दायरे में आएं। सभी विभागों को मिलाकर लगभग तीन सौ करोड़ के प्रोजेक्ट बनने थे, लेकिन कुछ काम ही नहीं हुआ। विभागों ने यह धनराशि अपनी किन्हीं और योजनाओं में खपा ली। ये हालात देखकर केंद्र सरकार अब सीधे विभागों से प्रोजेक्ट मांग रही है और विभाग सीधे केंद्र से बातचीत कर रहे हैं। इससे वित्त विभाग को अवगत नहीं कराया जा रहा।
जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर विभागों से कहा गया था कि वे पांच से 10 फीसदी अपने विभागीय बजट से प्रोजेक्ट बनाएं। लेकिन किसी विभाग ने प्रोजेक्ट नहीं दिया। केंद्र विभागों से सीधे प्रस्ताव तलब कर रहा है। इसकी जानकारी नहीं है।
- अमित नेगी, सचिव वित्त
क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान में शामिल विभाग
कृषि, वन एवं जैव विविधता, पशु धन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शहरी विकास, जल संसाधन, पर्यटन, ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग, उद्योग, परिवहन आदि।
प्रदेश सभी जिले जलवायु परिवर्तन से प्रभावित
उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के संबंध में जानकारी के लिए सीडी कैन एजेंसी ने जिलेवार सर्वेक्षण किया था। इसमें सामाजिक, आर्थिक, जलवायु, जल, वन, कृषि और स्वास्थ्य के संकेतकों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव के संबंध में बताया गया। इसमें कमोबेश सभी जिले प्रभावित पाए गए। जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक रिस्क चंपावत और टिहरी गढ़वाल और सबसे कम देहरादून और नैनीताल में बताया गया।
इन पर पड़ा असर
जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव जल संसाधनों, वनों, जड़ी-बूटियों, ग्लेशियर आदि पर पड़ रहा है। वृक्ष रेखा ऊपर चढ़ गई और वनस्पतियों का फ्लावरिंग सीजन बदल गया। वन विभाग मध्य हिमालयी क्षेत्र के नैनीताल में बांज-बुरांश, रानी खेत में हिसालू प्रजाति, उच्च हिमालयी क्षेत्र में ट्री लाइन का अध्ययन कर रहा है।
सीएफसी-2017 में अहम रहा था जलवायु परिवर्तन
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में 3 से 7 अप्रैल तक चली कॉमनवेल्थ देशों की फारेस्ट्री कॉंफ्रेंस में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा छाया रहा। कॉंफ्रेंस की छह सिफारिशों के संबंध में तैयार किए गए ‘देहरादून चार्टर’ में इसे शामिल किया गया। इसमें सभी कॉमनवेल्थ देशों ने संकल्प लिया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से सब मिलकर मुकाबला करेंगे। जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए सभी देश संयुक्त एक्शन प्लान बनाएंगे जो ग्लोबल एक्शन प्लान का आधार बनेगा।