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अमेरिका ने माना भारतीय आईटी पेशेवरों का लोहा, मिल सकती है राहत
एजेंसी/ वाशिंगटन
Updated Wed, 15 Feb 2017 04:04 AM IST
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : SE
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अमेरिका में भारतीय आईटी पेशेवरों का लोहा मानते हुए आखिरकार ट्रंप प्रशासन भी मान रहा है कि कोई ऐसा रास्ता खोजा जाना चाहिए जिससे कि अमेरिका में रोजगार के अवसर भी कम नहीं हों और भारतीयों की भी परेशानी न बढ़े। इसी के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली का समर्थन किया है जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था व रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के साथ साथ भारतीयों के लिए भी अच्छा विकल्प बन सकेगी।
व्हाइट हाउस ने इस आशय की जानकारी देते हुए बताया कि ट्रंप के इस विचार का भारतीय आईटी पेशेवर और उद्यमी भी स्वागत करेंगे। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ नीति सलाहकार स्टीफन मिलर ने एनबीसी न्यूज को बताया कि - ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश में योग्यता आधारित प्रणाली होनी चाहिए। इसके तहत अमेरिका में आने वाले लोग हमारी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए आर्थिक तौर पर विभिन्न प्रकार के लाभ लेकर आएं और सभी के रोजगार में वृद्धि के लिए मदद करें।’ अमेरिका में भारतीय आईटी पेशेवरों और उद्यमियों को सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि रोजगार सृजन के लिए भी जाना जाता है।
इसके साथ ही मिलर ने यह भी कहा कि कोई भी वैध आव्रजन व्यवस्था अमेरिकी कर्मचारियों को न तो विस्थापित और न ही ‘धोखाधड़ी’ करे। एच-1बी वीजा प्रणाली के खिलाफ अक्सर ये दो आरोप लगते रहे हैं। अमेरिकी सांसद, संघीय नेता और ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारी इस वीजा प्रणाली पर लगातार हमला बोलते रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि - ‘हम एक कानून सम्मत आव्रजन प्रणाली लेकर आएंगे। हम अपने देश को समृद्ध बनाएंगे और लाभांवित करेंगे।’ मिलर का मानना है कि अमेरिका में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो पहले अमेरिकियों को रोजगार देती हो।
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व्हाइट हाउस ने इस आशय की जानकारी देते हुए बताया कि ट्रंप के इस विचार का भारतीय आईटी पेशेवर और उद्यमी भी स्वागत करेंगे। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ नीति सलाहकार स्टीफन मिलर ने एनबीसी न्यूज को बताया कि - ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश में योग्यता आधारित प्रणाली होनी चाहिए। इसके तहत अमेरिका में आने वाले लोग हमारी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए आर्थिक तौर पर विभिन्न प्रकार के लाभ लेकर आएं और सभी के रोजगार में वृद्धि के लिए मदद करें।’ अमेरिका में भारतीय आईटी पेशेवरों और उद्यमियों को सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि रोजगार सृजन के लिए भी जाना जाता है।
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इसके साथ ही मिलर ने यह भी कहा कि कोई भी वैध आव्रजन व्यवस्था अमेरिकी कर्मचारियों को न तो विस्थापित और न ही ‘धोखाधड़ी’ करे। एच-1बी वीजा प्रणाली के खिलाफ अक्सर ये दो आरोप लगते रहे हैं। अमेरिकी सांसद, संघीय नेता और ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारी इस वीजा प्रणाली पर लगातार हमला बोलते रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि - ‘हम एक कानून सम्मत आव्रजन प्रणाली लेकर आएंगे। हम अपने देश को समृद्ध बनाएंगे और लाभांवित करेंगे।’ मिलर का मानना है कि अमेरिका में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो पहले अमेरिकियों को रोजगार देती हो।
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ट्रंप प्रशासन पर बढ़ता रहा है भारतीयों के लिए दबाव
डोनाल्ड ट्रम्प
अमेरिका में ट्रंप की प्रवासी नीतियों को लेकर एक तरफ तो आईटी पेशेवरों में अनिश्चितता को लेकर डर फैला हुआ है और दूसरी तरफ बड़ी आईटी कंपनियों में नीतियों के खिलाफ गुस्सा है।
ट्रंप द्वारा अमेरिकियों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए एच-1 बी वीजा को और सख्त करते हुए सस्ते दामों पर विदेशियों को नौकरी देने पर रोक लगनी है। इससे भारतीयों को सबसे ज्यादा नुकसान होना तय है, जबकि अमेरिका की अधिकांश कंपनियों में प्रतिभाशाली भारतीयों को संख्या सबसे अधिक है।
ट्रंप की इस नीति के खिलाफ एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर और फेसबुक जैसी कंपनियों ने भी विरोध जताते हुए दबाव बनाया है। हाल ही में भारतीय मूल के सैकड़ों अमेरिकी आईटी पेशेवरों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए सिलिकॉन वेली में विरोध दर्ज कराया था। ग्लोबल इंडियन टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन ने भी किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकने का समर्थन किया था।
ट्रंप द्वारा अमेरिकियों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए एच-1 बी वीजा को और सख्त करते हुए सस्ते दामों पर विदेशियों को नौकरी देने पर रोक लगनी है। इससे भारतीयों को सबसे ज्यादा नुकसान होना तय है, जबकि अमेरिका की अधिकांश कंपनियों में प्रतिभाशाली भारतीयों को संख्या सबसे अधिक है।
ट्रंप की इस नीति के खिलाफ एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर और फेसबुक जैसी कंपनियों ने भी विरोध जताते हुए दबाव बनाया है। हाल ही में भारतीय मूल के सैकड़ों अमेरिकी आईटी पेशेवरों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए सिलिकॉन वेली में विरोध दर्ज कराया था। ग्लोबल इंडियन टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन ने भी किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकने का समर्थन किया था।