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'डर लगता है जो मलाला के साथ हुआ कहीं मेरे साथ न हो'

Thu, 03 Oct 2013 08:47 AM IST
Updated Thu, 03 Oct 2013 08:47 AM IST
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taliban killed me when i return home?
अफगानिस्तान की रहने वाली मरियम भारत में फैशन डिजाइनिंग सीख रही हैं। उनका ये कोर्स तीन महीने का है। ये कोर्स अब पूरा होने की कगार पर है।
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मरियम इस बात से तो उत्साहित हैं कि उन्हें जल्द ही घर लौटना है लेकिन साथ ही उन्हें एक डर भी है।

डर तालिबान का। बीबीसी से हुई एक ख़ास बातचीत में मरियम ने बताया कि किस तरह तालिबान उनके घरवालों को धमकियां दे रहे हैं।

मरियम कहती हैं, ''मेरे भारत आने के बारे में मेरे परिवार के अलावा और कोई नहीं जानता था। न जाने तालिबान को कैसे इस बात का पता चल गया। तब से वो मेरे घरवालों को धमकियां दे रहे हैं।''

वो आगे कहती हैं, ''तालिबान कहते हैं कि अगर मैं वापस नहीं गई तो वो मेरे भाइयों के साथ कुछ बुरा कर देंगे। वो इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्यों मेरे परिवार ने मुझे भारत आने की इजाज़त दी है। क्यों मेरा परिवार मुझे पढ़ाई करने दे रहा है।''
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तालिबान की धमकी

मरियम कहती हैं, ''मुझे तालिबान की धमकियों से डर लगता है, ज़रूर लगता है। ये भी लगता है कि जैसा मलाला के साथ हुआ कहीं मेरे साथ भी वो लोग कुछ वैसा ही न कर दें। लेकिन मैं डर कर यहां तो नहीं बैठ सकती। मुझे घर तो वापस जाना ही है।''
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अफ़गान छात्र

मरियम के साथ 14 अफ़गानी छात्र भी भारत आए हैं।

मरियम कहती हैं कि उनके परिवार को एक लंबे समय से तालिबान से धमकियां मिल रही हैं।

वो कहती हैं, ''हम हर छह महीने में घर बदलते हैं ताकि तालिबान को हमारे बारे में पता न चल जाए। लेकिन फिर भी वो हमारे बारे में कहीं न कहीं से पता लगा ही लेते हैं।''

क्यों है तालिबान की नज़र

इस सवाल का जवाब देते हुए मरियम कहती हैं, ''मेरे पिता अफ़ग़ानिस्तान सरकार के रक्षा मंत्रालय में कार्यरत थे। वो दो बार सरकारी कामों की वजह से अमेरिका गए। वो ग्वांतानामो बे भी गए थे। तालिबान चाहते थे कि ग्वांतानामो बे में क़ैद उनके साथियों के बारे में मेरे पिता के पास जो भी जानकारी है वो उन्हें सौंप दे।''

अफ़गान छात्र

इन छात्रों में से ज़्यादातर के पिता या भाई तालिबान हमलों में मारे गए हैं।
अपनी बात को पूरा करते हुए मरियम कहती हैं, ''तालिबान मेरे पिता पर हर ओर से दबाव डलवा रहे थे। मेरे पिता ने स्पष्ट कर दिया था कि उनके पास तालिबान को देने के लिए कोई जानकारी नहीं है। लेकिन तालिबान नहीं माने। मेरे पिता की मृत्यु एक बम धमाके में हुई। अब तालिबान हमें भी परेशान कर रहे हैं। वो हमसे भी वही जानकारी मांगते रहते हैं। वो हमसे कहते हैं कि अगर हमारे पास उस इलाक़े का कोई नक्शा या तस्वीरें हैं तो हम उन्हें दे दें। लेकिन हमारे पास तालिबान को देने के लिए कोई जानकारी है ही नहीं।''

क्या है भविष्य

तो ख़ुद पर तालिबान के ख़तरे के मंडराते बादलों के बीच कहां देखती हैं मरियम अपना भविष्य?


मरियम कहती हैं कि स्नातक होने के बाद वो एक अध्यापक बनना चाहती हैं। वो कहती हैं, ''अफ़ग़ानिस्तान जा कर मैं अपने जैसी लड़कियों की मदद करना चाहती हूं। मैं भारत में जो भी फ़ैशन डिज़ाइनिंग सीख रही हूं वो मैं अपने देश जा कर वहां की लड़कियों को सिखाऊंगी ताकि वो आत्मनिर्भर बनें।''

भारत आए इन छात्रों में लड़कों की संख्या ज़्यादा है।

चलते चलते मरियम से एक आख़िरी सवाल ये भी पूछ लिया कि तालिबान के ख़िलाफ़ लड़ने की हिम्मत कहां से जुटाती हैं वो?

इस सवाल का जवाब देते हुए मरियम कहती हैं, ''जब मैं आए दिन अख़बारों में ये पढ़ती हूं कि तालिबान अफ़ग़ान औरतों पर कितना अत्याचार कर रहे हैं, तो मुझे बहुत ग़ुस्सा आता है। हाल ही में मैंने पढ़ा कि कैसे एक स्कूल जाने वाली लड़की को तालिबान ने पत्थरों से मार डाला। हम कब तक तालिबान की ये ज़्यादतियां बर्दाश्त करेंगे। जब भी मैं ऐसा कुछ देखती हूं तो मेरे अंदर तालिबान से लड़ने की हिम्मत और भी बढ़ जाती है।''

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