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क्या चरस की बिक्री की इजाज़त होनी चाहिए?

Mon, 19 Nov 2012 03:54 PM IST
Updated Mon, 19 Nov 2012 03:54 PM IST
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should marijuana be allowed for the sale

अमरीका के दो राज्यों वॉशिंगटन और कोलोराडो में मारियुआना यानी चरस रखने और मौजमस्ती के लिए उसके इस्तेमाल को कानूनी बना दिया गया है.

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लेकिन ये संघीय नियमों के खिलाफ है. ऐसे में इन राज्यों का राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के साथ तनाव हो सकता है.

इन दो राज्यों के फैसले से ये बहस तेज हो गई है कि क्या प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की कानूनी तौर पर बिक्री को मंजूरी दे दी जाए.

इस कदम से न सिर्फ एक विशाल बाजार पैदा होगा बल्कि इससे कर के रूप में बड़ी मात्रा में राजस्व भी प्राप्त होगा.

'यथार्थवादी रवैया'

वैसे इस मुद्दे पर नीदरलैंड्स जैसे देश में भी बहुत विवाद रहा है. वो दुनिया का पहला देश है जहां चरस कैफे हैं. लेकिन अब इस नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

नीदरलैंड्स में चरस औपचारिक रूप से वैध नहीं है लेकिन विशेष लाइसेंस के साथ कॉफी शॉप कम मात्रा में उसे परोस सकते हैं.

हाल ही में दक्षिणी नीदरलैंड्स में नए कानून बनाए गए हैं जिनके अनुसार विदेशी सैलानी उन कैफेज़ में नहीं जा सकते हैं जहां चरस परोसी जाती है.

लेकिन कैफे मालिकों के कारोबार पर इस प्रतिबंध का बुरा असर हुआ है और वे इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं.

मासत्रिश्ट शहर में कॉफी शॉप मालिकों के संघ के अध्यक्ष मार्क योसेमन कहते हैं, “नशीले पदार्थों के खिलाफ जंग आप कभी नहीं जीत सकते हैं, आप सिर्फ यथार्थवादी रवैया अपना कर इसे नियंत्रित कर सकते हैं.”
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नियमों का टकराव

वॉशिंगटन और कोलोराडो में चिकित्सा उद्देश्यों के लिए पहले से ही चरस के इस्तेमाल की अनुमति थी, लेकिन अब मनोरंजन के लिए उसके इस्तेमाल को वैध बनाने से अमरीका की संघीय सरकार के साथ उनका टकराव तय है. संघीय नियमों के अनुसार चरस एक अवैध नशीला पदार्थ है.
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अमरीका के हार्वर्ड विश्विविद्यालय के जेफ मिरॉन नशीले पदार्थों के मामले में नीदरलैंड्स के हालिया रुख को निराशाजनक बताते हैं.

वो बताते है कि अमरीकी सरकार नशीले पदार्थों को बाजार से दूर रखने की अपनी कोशिशों पर सालाना 44 अरब डॉलर खर्च करती है.

उनके अनुसार, “लोगों को ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल करने से रोकना कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है. इन पर लगे प्रतिबंध लागू करने पर न सिर्फ बड़ी रकम खर्च की जाती है, बल्कि इससे भूमिगत बाजार बनते हैं, जिनमें काफी हिंसा और भ्रष्टाचार होता है. साथ ही वहां क्वॉलिटी पर भी नियंत्रण नहीं हो सकता है. इसका दुष्प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है.”

वो कहते है कि बहुत से देशों में नशीले पदार्थों की रोकथाम प्राथमिकता नहीं है क्योंकि गरीब देशों के लिए शिक्षा और गरीबी से निपटना कहीं बड़े मुद्दे हैं.

नफा ज्यादा या नुकसान

वैसे अमरीका में चरस के इस्तेमाल को उदार बनाने से हर कोई खुश नहीं है.

‘हेल्थी एंड ड्रग फ्री कोलोराडो’ मुहिम के निदेशक टॉम गॉरमन कहते हैं कि अमरीका के बाहर से बहुत सा पैसा आता है ताकि ऐसे प्रस्ताव पारित हो सकें.

वो बताते हैं कि 1970 के दशक से ही अमरीका में चरस के इस्तेमाल को कानूनी मंजूरी दिलाने की मुहिमें चलती रही हैं.

गॉरमन इस बात से सहमत हैं कि इससे सरकार को मिलने वाला राजस्व बढ़ेगा. लेकिन उनका कहना है कि इससे जो पैसा मिलेगा वो इसके कारण होने वाले नुकसानों में से 10 प्रतिशत की ही भरपाई कर पाएगा.

गॉरमन के अनुसार इससे ट्रैफिक हादसे बढ़ेंगे, अस्पतालों में आपात सुविधा और इलाज पर खर्च बढ़ेगा जबकि उत्पादकता में कमी आएगी.

"नशीले पदार्थों के खिलाफ जंग आप कभी नहीं जीत सकते हैं, आप सिर्फ यथार्थवादी रवैया अपना कर इसे नियंत्रित कर सकते हैं."

मार्क योसेमन, कॉफी कैफे संघ के अध्यक्ष

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