बुजुर्गों का सहारा बनने के साथ ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को पढ़ा रहे रोबो
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प्रतिष्ठित कंपनियों के बड़े-बड़े कारखानों में काम करने वाले रोबो अब हमारे घर और स्कूलों में भी जगह बनाने लगे हैं। एक तरफ ये अकेले रह रहे बुजुर्गों को सहारा दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ, स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने में भी मदद कर रहे हैं।
ब्रिटेन में विशेष रूप से कुछ रोबो तैयार किए गए हैं, जो भूलने की बीमारी डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्गों का ख्याल रखने का काम कर रहे हैं। वहीं, कुछ रोबो ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को पढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
ब्रिटेन की स्वास्थ्य एजेंसी एनएचएस की मानें तो इन रोबो की उपस्थिति अच्छे परिणाम दे रही है। हालांकि कृत्रिम बुद्धिमता वाले इन रोबो को और भी कारगर बनाने के लिए शोध जारी है। ब्रिटेन में अकेले रह रहे कई बुजुर्गों के घर में कृत्रिम बुद्धिमता वाला ‘पैरो’ रोबो पहुंच चुका है।
जापान में तैयार किए गए इस रोबो से कोई काम करवाने के लिए एक आवाज लगाना या फिर इसे सिर्फ छूना भर काफी है। चिकित्सकों की मानें तो यह बुजुर्गों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने में सफल हो रहा है। इसके अलावा डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्गों को आराम दिलाने में भी ये मदद कर रहे हैं।
वहीं, कुछ विशेष स्कूलों में भी इसी तरह के रोबो ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को न सिर्फ पढ़ा रहे हैं, बल्कि उनके निर्देश पर गीत गाना और कुछ अन्य गतिविधियां भी करते हैं।
इन पर नियंत्रण पाना आसान
डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्गों को जहां ये रोबो तनाव और चिंता से दूर रखने में सफल साबित हो रहे हैं। वहीं, ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों की हालत में ये काफी कारगर साबित हो रहे हैं।
चिकित्सक कहते हैं कि डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्गों और ऑटिज्म के रोगी बच्चों के साथ संयम बरतना जरूरी होता है।
इस मामले में ये रोबो काफी कारगर हैं। ये इंसान की तरह अपना संयम नहीं खोते और इन्हें नियंत्रित कर पाना भी काफी आसान है।