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सुबह शीशा देखा तो शक्ल बदल चुकी थी!
बीबीसी
Updated Sat, 24 Aug 2013 06:41 PM IST
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यह कहानी हॉलीवुड की किसी रोमांचक फिल्म की स्क्रिप्ट लगती है। अमरीकी नागरिक माइकल बोटराइट एक दिन उठे तो वह-वह नहीं थे।
फरवरी में कैलिफोर्निया के एक मोटल के कमरे में बेहोश पाए गए बोटराइट को अस्पताल में होश आया तो वह अपनी मातृभाषा अंग्रेजी भूल चुके थे।
वह सिर्फ स्वीडिश भाषा बोल और समझ रहे थे और तो और बोटराइट को आइने में अपनी शक्ल में कोई अजनबी नजर आ रहा था।
आईने में अजनबी
अब अपनी पहचान ढूंढ़ने, अपनी खो चुकी यादों को बटोरने के लिए बोटराइट अमरीका से स्वीडन पहुंच गए हैं। वह अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड से मिले जिन्हें उन्होंने 1984 के बाद से नहीं देखा था।
उन्हें उम्मीद है कि स्वीडन में वह अपनी बिखर चुकी जिंदगी के तारों को दोबारा जोड़ पाएंगे। बोटराइट को अब लगता है कि उनका नाम मुडिओ हैनएक है।
बोटराइट के अनुसार, "जब मुझे होश आया तो मैं ऐसे कांप रहा था कि जैसे मिर्गी का दौरा हो लेकिन ऐसा नहीं था। मुझे कतई अंदाजा नहीं था कि मैं कौन हूं, कहां हूं।"
"तभी एक नर्स ने आकर पूछा कि आप कौन हैं। मैंने कहा कि आप क्या कह रही हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा। "अगले दिन उन्होंने बोटराइट को उनका परिचय पत्र दिखाया, लेकिन उन्होंने उसमें मौजूद व्यक्ति को पहचाना नहीं।
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इसके बाद उन्होंने शीशा देखा तो रोने लगे। वह आइने में मौजूद व्यक्ति को भी नहीं पहचानते थे। उन्होंने कहा "वह कौन है। वह मैं नहीं हूं, मैं उसे नहीं जानता।"उन्होंने अपने बेटे को भी नहीं पहचाना।
स्वीडन में हैं जवाब
डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति शारीरिक या मानसिक आघात लगने से पैदा हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार यह ट्रांजींट ग्लोबल एमनेशिया हो सकता है जिसमें मरीज को शॉर्ट टर्म की बातें याद करने में दिक्कत होती है।
लेकिन सामान्यत यह दिक्कत कुछ घंटे ही रहती है और डॉक्टर अचरज में हैं कि बोटराइट को क्या हो गया है।
बोटराइट को कतई भी अंदाजा नहीं है कि वह बीमार कैसे पड़े थे। वियतनाम जंग के यह सिपाही 1980-90 के दशक में स्वीडन में रह चुके हैं।
वह कहते हैं, "मुझे थोड़ा-बहुत याद है लेकिन मैं पूरी तरह जानना चाहता हूं कि मैं हूं कौन। "मुझे यकीन है कि सवालों के जवाब मुझे यहीं मिलेंगे। सिर्फ यहीं।"
वह कहते हैं कि स्वीडन में आकर वह खुश हैं और याद्दाश्त वापस आने पर उन्हें बेहद खुशी होगी चाहे उनकी यादें चाहे अच्छी हों या बुरी।
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फरवरी में कैलिफोर्निया के एक मोटल के कमरे में बेहोश पाए गए बोटराइट को अस्पताल में होश आया तो वह अपनी मातृभाषा अंग्रेजी भूल चुके थे।
वह सिर्फ स्वीडिश भाषा बोल और समझ रहे थे और तो और बोटराइट को आइने में अपनी शक्ल में कोई अजनबी नजर आ रहा था।
आईने में अजनबी
अब अपनी पहचान ढूंढ़ने, अपनी खो चुकी यादों को बटोरने के लिए बोटराइट अमरीका से स्वीडन पहुंच गए हैं। वह अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड से मिले जिन्हें उन्होंने 1984 के बाद से नहीं देखा था।
उन्हें उम्मीद है कि स्वीडन में वह अपनी बिखर चुकी जिंदगी के तारों को दोबारा जोड़ पाएंगे। बोटराइट को अब लगता है कि उनका नाम मुडिओ हैनएक है।
बोटराइट के अनुसार, "जब मुझे होश आया तो मैं ऐसे कांप रहा था कि जैसे मिर्गी का दौरा हो लेकिन ऐसा नहीं था। मुझे कतई अंदाजा नहीं था कि मैं कौन हूं, कहां हूं।"
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"तभी एक नर्स ने आकर पूछा कि आप कौन हैं। मैंने कहा कि आप क्या कह रही हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा। "अगले दिन उन्होंने बोटराइट को उनका परिचय पत्र दिखाया, लेकिन उन्होंने उसमें मौजूद व्यक्ति को पहचाना नहीं।
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इसके बाद उन्होंने शीशा देखा तो रोने लगे। वह आइने में मौजूद व्यक्ति को भी नहीं पहचानते थे। उन्होंने कहा "वह कौन है। वह मैं नहीं हूं, मैं उसे नहीं जानता।"उन्होंने अपने बेटे को भी नहीं पहचाना।
स्वीडन में हैं जवाब
डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति शारीरिक या मानसिक आघात लगने से पैदा हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार यह ट्रांजींट ग्लोबल एमनेशिया हो सकता है जिसमें मरीज को शॉर्ट टर्म की बातें याद करने में दिक्कत होती है।
लेकिन सामान्यत यह दिक्कत कुछ घंटे ही रहती है और डॉक्टर अचरज में हैं कि बोटराइट को क्या हो गया है।
बोटराइट को कतई भी अंदाजा नहीं है कि वह बीमार कैसे पड़े थे। वियतनाम जंग के यह सिपाही 1980-90 के दशक में स्वीडन में रह चुके हैं।
वह कहते हैं, "मुझे थोड़ा-बहुत याद है लेकिन मैं पूरी तरह जानना चाहता हूं कि मैं हूं कौन। "मुझे यकीन है कि सवालों के जवाब मुझे यहीं मिलेंगे। सिर्फ यहीं।"
वह कहते हैं कि स्वीडन में आकर वह खुश हैं और याद्दाश्त वापस आने पर उन्हें बेहद खुशी होगी चाहे उनकी यादें चाहे अच्छी हों या बुरी।