लाल ग्रह पर उतरा नासा का इनसाइट अंतरिक्ष यान, मंगल के रहस्य सुलझाएगा यह मिशन
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का यान इंसाइट लैंडर भारतीय समयानुसार सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात मंगल ग्रह पर मात्र सात मिनट के बेहद तनावपूर्ण समय में सफलतापूर्वक लैंडिंग कर गया। लाल ग्रह पर उतरकर धरती पर संदेश भेजते ही नासा कंट्रोल रूम में खुशी की लहर दौड़ गई। यह यान मंगल के राज खोलने के लिए इसकी चट्टानी सतह को खोदने के लिहाज से डिजाइन किया गया है।
इंसाइट लैंडर यान ने जो प्रारंभिक संकेत भेजे में उनमें स्पष्ट है कि उसके सौर पैनल खुले हैं और उसे मंगल की धूप मिल रही है। ये संकेत मंगलवार को भारतीय समयानुसार सुबह सात बजे धरती पर मिलने शुरू हो गए। नासा के प्रशासक जिम ब्राइडेनस्टीन ने कहा, ‘इनसाइट मंगल के आंतरिक पर्यावरण का अध्ययन करेगा और हमें वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करेगा जहां हम अंतरिक्षयानों को चंद्रमा और फिर मंगल पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।’ मंगल से पृथ्वी की दूरी लगभग 16 करोड़ किलोमीटर है और अंतरिक्षयान के बारे में रेडियो संकेत से मिल रही जानकारी के धरती तक आने में आठ मिनट से ज्यादा का समय लग रहा है।
यह यान मंगल के एलिसियम प्लानिशिया नामक सपाट मैदान में उतरा है जो इस ग्रह की भूमध्य रेखा के करीब है और लावा से बनी चादर के समान दिखती है। नासा ने सात माह पहले पांच मई को इस खोजी अभियान के लिए यान को धरती से रवाना किया था। इसका मकसद लाल ग्रह के भीतर जमीन में छुपे रहस्यों की पड़ताल करना है।
नासा ने लाइव दिखाई लैंडिंग
इनसाइट की मंगल पर उतरने की पूरी प्रक्रिया सात मिनट तक चली। भारतीय समयानुसार सोमवार रात 1.24 बजे ये मंगल की सतह पर उतरा। सात मिनट तक पूरी दुनिया के वैज्ञानिक दम साधे इस पूरी प्रक्रिया को लाइव देखते रहे। जैसे ही इनसाइट ने मंगल की सतह को छुआ, सभी वैज्ञानिक खुशी से झूमने लगे। नासा के प्रशासक जिम ब्राइडेंस्टाइन ने इनसाइट के टचडाउन का ऐलान करते हुए सभी को बधाई दी।
बता दें कि नासा ने इनसाइट लैंडिंग को लाइव दिखाया। इस मिशन मंगल में करीब 7044 करोड़ रुपये का खर्च आया। इनसाइट को मंगल पर उतारने से पहले इसी साल 5 मई को नासा ने कैलिफोर्निया के वंडेनबर्ग एयरफोर्स स्टेशन से एटलस वी रॉकेट के जरिए लांच किया था। इससे पहले 2012 में मंगल पर पहला यान क्यूरोसिटी भेजा गया था। उस मिशन में मंगल ग्रह पर पानी की मौजूदगी के बारे में पता किया गया।
Our @NASAInSight spacecraft stuck the #MarsLanding!
— NASA (@NASA) November 26, 2018
Its new home is Elysium Planitia, a still, flat region where it’s set to study seismic waves and heat deep below the surface of the Red Planet for a planned two-year mission. Learn more: https://t.co/fIPATUugFo pic.twitter.com/j0hXTjhV6I
इसलिए तनावपूर्ण थे लैंडिंग के सात मिनट
मंगल पर उतरने के लिए इस यान के लिए शुरूआती सात मिनटों को बेहद अहम समझा जा रहा था। इस दौरान कैलिफोर्निया में बैठे नासा के वैज्ञानिक जबरदस्त तनाव में थे। इसका कारण था अंतरिक्ष यान को अपनी रफ्तार 20 हजार किलोमीटर प्रति घंटे तक कम करना। इस पर नियंत्रण बनाना वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि मंगल के गुरुत्वाकर्षण बल का आकलन सटीक नहीं था।
खुलेंगे अरबों साल से अनसुलझे गूढ़ रहस्य
अपने अभियान के दौरान यह यान मंगल पर एक साइज्मोमीटर रखेगा जो इसके अंदर की हलचलें रिकॉर्ड कर सकेगा। इससे पता चलेगा कि मंगल के अंदर कोई भूकंप जैसी हलचल होती भी है या नहीं। यह पहला यान है जो मंगल की खुदाई करके उसकी रहस्यमय जानकारियां जुटाएगा। साथ ही एक जर्मन उपकरण भी मंगल की जमीन के पांच मीटर नीचे जाकर उसके तापमान का पता लगाएगा।
महत्वपूर्ण होगा तीसरा प्रयोग
इसके तीसरे प्रयोग में रेडियो ट्रांसमिशन का इस्तेमाल होगा जिससे यह पता चलेगा कि यह ग्रह अपनी धुरी पर डगमगाते हुए कैसे घूमता है। अभियान से जुड़ी वैज्ञानिक सुजैन स्म्रेकर के मुताबिक, ‘आप एक कच्चा और एक पका अंडा हाथ में लेकर उन्हें अलग-अलग घुमाएं। ये दोनों ही अंडे अलग-अलग तरल पदार्थों के कारण विभिन्न ढंग से घूमेंगे। और यह प्रयोग बताएगा कि मंगल के अंदर तरल चीज है या ठोस।