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विदेशों में कमाई के मामले में चीनी से आगे निकले इंडियन
एजेंसी/ न्यूयार्क
Updated Thu, 15 Jun 2017 08:46 PM IST
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आईएफएडी
- फोटो : dailyhunt
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दुनियाभर में काम करने वाले भारतीयों ने 2016 में 62.7 अरब डॉलर (आरबीआई की ताजा मुद्रा विनिमय दर के मुताबिक करीब 40.3 खरब रुपये) की राशि भारत में अपने घरों को भेजी। इस आंकड़े के साथ भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में सबसे अधिक रेमीटेंस पाने वाला देश बन गया है। यह बात संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक रिपोर्ट में कही गई है।
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यूएन इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (आईएफएडी) द्वारा कराए गए अध्ययन ‘वन फैमिली एट ए टाइम’ में कहा गया है कि 2016 में दुनियाभर में काम करने वाले सभी देशों के कुल करीब 20 करोड़ प्रवासियों ने रेमीटेंस के रूप में अपने घरों को 445 अरब डॉलर से अधिक राशि भेजी है। इससे करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिली है।
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रेमीटेंस उस राशि को कहते हैं, जो विदेश में काम करने वाले प्रवासी अपने देश में रहने वाले अपने परिवारों को भेजते हैं। गत एक दशक में रेमीटेंस का प्रवाह सालाना औसतन 4.2 फीसदी की दर से बढ़ा है। 2007 में कुल रेमीटेंस जहां 296 अरब डॉलर था, वहीं 2016 में यह बढ़कर 445 अरब डॉलर का हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक कुल रेमीटेंस का 80 फीसदी हिस्सा 23 देशों को मिलता है, जिसमें सबसे आगे हैं भारत, चीन, फीलीपींस, मेक्सिको और पाकिस्तान। वहीं सर्वाधिक रेमीटेंस भेजने वाले 10 देश कुल सालाना भेजे जाने वाले रेमीटेंस में करीब आधा योगदान करते हैं। इनमें अमेरिका, सऊदी अरब और रूस सबसे आगे हैं।
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भारत ने चीन को पीछे छोड़ा
अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में भारत को सबसे अधिक 62.7 अरब डॉलर रेमीटेंस मिला। इसके बाद चीन को 61 अरब डॉलर, फीलीपींस को 30 अरब डॉलर और पाकिस्तान को 20 अरब डॉलर रेमीटेंस मिला है। गत एक दशक में भारत रेमीटेंस हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया है। 2007 में भारत 37.2 अरब डॉलर रेमीटेंस के साथ चीन के बाद दूसरे स्थान पर था। तब चीन को 38.4 अरब डॉलर रेमीटेंस मिला था।
एशिया सब पर भारी
अध्ययन के मुताबिक सबसे अधिक 7.7 करोड़ प्रवासी एशिया के होते हैं, जिनमें से 4.8 करोड़ एशियाई क्षेत्र में ही काम करते हैं। गत एक दशक में एशिया और प्रशांत क्षेत्र को मिलने वाले रेमीटेंस में 87 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई और यह अब 244 अरब डॉलर हो गया है। वहीं इस क्षेत्र के प्रवासियों की संख्या में महज 33 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। एशिया अब भी सर्वाधिक रेमीटेंस हासिल करने वाला क्षेत्र बना हुआ है। कुल रेमीटेंस में इस क्षेत्र का अनुपात 55 फीसदी तो कुल प्रवासियों में इस क्षेत्र का अनुपात 41 फीसदी है।
विकासशील देशों में गरीबी मिटाने में मददगार
अध्ययन में कहा गया है कि विकासशील देशों को मिलने वाले रेमीटेंस में गत एक दशक में 51 फीसदी वृद्घि दर्ज की गई है, वहीं इन देशों के प्रवासियों की संख्या में 28 फीसदी वृद्धि रही है। विकासशील देशों में पहुंचने वाले रेमीटेंस से करोड़ों लोग गरीबी के दलदल से बाहर निकल रहे हैं और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल रही है।