फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   America ›   India's health and climate are in danger situation says United Nations Studies

खतरे में भारत का स्वास्थ्य और जलवायु : संयुक्त राष्ट्र 

Tue, 17 Jul 2018 08:40 PM IST
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र Updated Tue, 17 Jul 2018 08:40 PM IST
विज्ञापन
India's health and climate are in danger situation says United Nations Studies
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : lawlex

बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच भारत के स्वास्थ्य और जलवायु को लेकर गंभीर खतरे जताए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत उन नौ सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल है, जहां वैश्विक तापमान के चलते शीतलन के कारण स्वास्थ्य और जलवायु को गंभीर खतरा है।

विज्ञापन


‘सस्टनेबल एनर्जी फॉर ऑल’ (एसई फॉर ऑल) ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी के लिए सतत शीतलन समाधान प्रदान करने से उत्पादकता, रोजगार और विकास सहित विशाल वाणिज्यिक तथा आर्थिक अवसर मिलते हैं। इसका आकलन करने एवं उस पर कार्य करने में उद्योगपतियों, सरकारों और वित्त पोषकों को सहयोग करना चाहिए।
विज्ञापन


‘चिलिंग प्रॉस्पेक्ट : सस्टनेबल कूलिंग फॉर ऑल’ नामक रिपोर्ट वैश्विक शीतलन की बढ़ती चुनौतियों एवं अवसरों का आकलन करने वाला पहला अध्ययन है। रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया में करीब 1.1 अरब से अधिक ऐसे लोग हैं, जो शीतलन की कमी के खतरे का तत्काल सामना कर रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


शीतलन लाखों लोगों को गरीबी से बचने की क्षमता देता है, क्योंकि इससे हमारे बच्चे स्वस्थ रहते हैं, टीकाकरण स्थायी रहता है, खाद्य पदार्थ पोषक होते हैं और हमारी अर्थव्यवस्था उत्पादक रहती है। रिपोर्ट में शीतलन की पहुंच को समानता का मौलिक अधिकार बताते हुए कहा गया है कि तापमान का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाने का मतलब यह भी होता है कि कुछ लोगों की जिंदगी और मौत के बीच अंतर कम हो जाता है।

नौ देशों में पाक और चीन भी शामिल :
अध्ययन में कहा गया है कि एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका के सबसे अधिक जनसंख्या वाले नौ देश शीतलन के खतरे का सामना कर रहे हैं। ये देश भारत, बांग्लादेश, ब्राजील, पाकिस्तान, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, चीन, मोजाम्बिक और सुडान हैं।


मध्य वर्ग पर भी खतरा : 
तेजी से बढ़ रहे मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 2.3 अरब लोग एक अलग तरह के खतरे का सामना कर रहे हैं। सीमित आय के कारण उनके पास खरीदारी के भी सीमित विकल्प होते हैं। इसका मतलब है कि वे केवल कम महंगे और कम कुशल शीतलन उपकरणों को खरीदने में सक्षम हो सकते हैं। यह जलवायु पर गहरे प्रभाव के साथ वैश्विक ऊर्जा की मांग को भी बढ़ा सकता है।

पॉइंटर :
1. 52 संकटग्रस्त देशों पर आधारित है अध्ययन
2. साफ भोजन और दवाई की कमी का सामना कर रहे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 47 करोड़ लोग
3. शहरी गरीब गर्म छुग्गियों में रहने को मजबूर 63 करोड़ लोग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed