गोलीबारी का मौका हो या दवाई देने का, खुद फैसला लेंगे रोबो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब तक के बने मशीनी रोबो निर्देश पाने पर ही काम किया करते थे। कई बार तो वे उन बातों को अनसुनी कर देते हैं, जिनके बारे में उनके भीतर कोई प्रोग्रामिंग नहीं की गई है। अब ऐसे में रोबो के कुछ कामों को छोड़ दिया जाए तो आम आदमी से इनका वास्ता नहीं के बराबर ही रहता था।
मगर, अब वैज्ञानिक एक ऐसा ‘फेबुलान’ रोबो विकसित करने में जुटे हैं, जो परिस्थितियों के मुताबिक खुद-ब-खुद फैसले ले लिया करेगा। यह रोबो नैतिक रूप से काफी समझदार होगा। टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में मानव रोबो संवाद प्रयोगशाला के वैज्ञानिक मैथ्यिाज शुत्ज कहते हैं, ‘इससे रोबो को नैतिक आधार मिलेगा कि वह किसी भी हालातों में क्या कदम उठाए।’
इस तरह के रोबो के विकास में कंप्यूटर वैज्ञानिकों के अलावा दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, भाषाविज्ञानी, वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी सलाहें ली जा रही हैं। वैज्ञानिक यह भी चाहते हैं कि यह रोबो सही या गलत के बारे में खुद ही फैसला लेने में सक्षम हैं।
स्कूल या अस्पताल में नहीं करेगा गोलीबारी
ऐसा रोबो मौका पड़ने पर न केवल किसी बीमार को जरूरत के मुताबिक दवाएं दे सकेगा, बल्कि लड़ाई के दौरान गोलीबारी करने का भी फैसला खुद ही ले सकेगा। इस तरह का प्रयोग अब तक बिना ड्राइवर के चलने वाली कार में सफल रहा है।
सेना के साथ काम करने पर रोबो सीमा पर लड़ाई के दौरान के हालातों पर नजर भी रखेगा। यहां तक कि क्रूज मिसाइलों को भी चलाने का फैसला वह हालात के अनुसार कर सकेगा। यह रोबो इतना समझदार होगा कि अगर स्कूल या अस्पताल में कोई आतंकी छिपा हो तो यह आतंकी को गोली मारने से पहले सौ बार सोचेगा। ताकि बच्चों या आम आदमी उसका निशाना बने।
रोबो को नैतिक आधार पर उठे सवाल
आम तौर पर किसी रोबो में इनसानों की तरह भावनाएं नहीं होती हैं। संयुक्त राष्ट्र में भी इस बात पर बहस छिड़ चुकी है कि क्या किसी रोबो को किसी की जान लेने का हक है। या फिर किसी को मारने में उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जबकि रोबो महज एक मशीन है, जिसका इनसानी मूल्यों से कोई वास्ता नहीं होता।