{"_id":"9520a982-b4f3-11e2-811c-d4ae52bc57c2","slug":"harvard-scientists-develop-tiniest-flying-robots","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुनिया का सबसे नन्हा उड़नेवाला रोबोट","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
दुनिया का सबसे नन्हा उड़नेवाला रोबोट
Updated Sun, 05 May 2013 01:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कीट के आकार का उड़ने वाला एक रोबोट बनाया है। यह रोबोट कीट की तरह फुर्तीला, चालाक और तेज है।
विज्ञापन
यह 'कीट रोबोट' कार्बन फाइबर से बनाया गया है। इसका वजन एक ग्राम से भी कम है।
अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा इजाद किए गए इस कीट रोबोट के पास खास सुपर फास्ट इलेक्ट्रॉनिक मांसपेशियां हैं। ये मांसपेशियां इसके पंखों को गति और ताकत देती हैं।
इसको बनाने वाले हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के नन्हें रोबोट का इस्तेमाल बचाव कार्यों के लिए बखूबी किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए ये कीट रोबोट ढही हुई इमारत के मलबों के बीच के छोटे-छोटे बेहद अंदरुनी हिस्सों में आ-जा सकते हैं।
इस कीट रोबोट को बनाया है डॉ रॉबर्ट वूड के नेतृत्व में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के डॉ केविन मा और उनकी टीम ने। इस टीम का दावा है कि उन्होंने दुनिया का सबसे छोटा उड़ने वाला रोबोट बनाया है।
विज्ञापन
फुर्तीला और चुस्त
वैज्ञानिकों के अनुसार कीट के आकार के इस रोबोट में कीट-पतंगों जैसी गजब की फुर्ती है। अपनी इसी फुर्ती के कारण ही यह किसी भी तरह के गंभीर प्रहार से आराम से बच निकलने में कामयाब हो जाता है।
विज्ञापन
कीट रोबोट की ये चुस्ती काफी हद तक उसके पंखों की गति के कारण संभव हो पाती है।
बेहद तीव्र गति से उड़ते हुए यह रोबोट अपनी उड़ान को संतुलित रख सकता है। हवा में मंडराने या दुश्मन की ओर से किए गए अचानक हमले से निपटने में इसके पंख इसकी मदद करते हैं।
किसी भी जीते जागते कीट की तरह ही इस कीट रोबोट के पंख भी एक सेकेण्ड में 120 बार फड़फड़ाते हैं।
शोधकर्ताओं ने पंख को गति देने के लिए पीजोइलेक्ट्रिक नाम के एक खास तरह का पदार्थ इस्तेमाल किया है। वोल्टेज देने पर यह फैलता-सिकुड़ता है।
बहुत तेजी से वोल्टेज घटाने-बढ़ाने से यह वैसे ही काम करता है जैसे कोई कीट अपनी नन्हीं मांसपेशियों का इस्तेमाल करते हुए अपने पंखों को तेज़ी से फड़फड़ाता हैं।
डॉ मा बताते हैं, “हम किसी भी जैविक मांसपेशियों की ही तरह इसे फैला सकते हैं, सिकोड़ सकते हैं।”
बेहद उपयोगी
इस शोध का मुख्य लक्ष्य किसी उपयोगी रोबोट को बनाने से ज़्यादा यह समझना था कि कोई कीट किस तरह से उड़ता है।
डॉ ने आगे बताया कि इस तरह के उड़ने वाले रोबोट का इस्तेमाल कई तरीके से किया जा सकता है।
उन्होंने बताया, “हम इस तरह के रोबोट का इस्तेमाल आपदा वाली स्थितियों में कर सकते हैं। जब कोई इमारत गिरती है तो हम उसके मलबों में दबे जिंदा लोगों का पता लगाने और उनको बचाने के लिए कीट रोबोट का उपयोग कर सकते हैं।”
इनका इस्तेमाल पर्यावरण की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। इन्हें रिहायशी इलाकों में खास रसायनों या अन्य कारकों का पता लगाने के लिए भेजा जा सकता है।
डॉ मा का तो यहां तक मानना है कि यह रोबोट किसी भी दूसरे कीट पतंगों की तरह फसलों के परागण में भी सहायक हो सकता है।
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के जीवविज्ञानी डॉ जॉन डायर भी कीटों की उड़ान का अध्ययन करते हैं। उन्होंने भी माना है कि ये उड़ने वाले रोबोट “इंजीनियरिंग का कमाल हैं।”