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ट्रंप की योजना ही बनी अमेरिकियों की मुसीबत, क्या फैसला लेंगे वापस?

Tue, 04 Sep 2018 08:01 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 04 Sep 2018 08:01 PM IST
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cancellation of H-1B visa applications prevented new appointments in the US

अमेरिका में कानूनी रूप से देश में आने वाले विदेशियों को सीमित करने के मकसद से ट्रंप प्रशासन पहले की तुलना में एच-1 बी वीजा आवेदनकर्ताओं को देरी के लिए मजबूर कर रहा है। आवेदनकर्ताओं को अतिरिक्त जानकारी प्रदान करने और अनुमोदन में देरी करने से अमेरिका के अस्पताल, होटल, प्रौद्योगिकी और अन्य व्यवसायों से जुड़ी कंपनियों में नई नियुक्तियां रुक गई हैं। इसके चलते अमेरिकी कार्पोरेट जगत ने देश से प्रतिभाशाली इंजीनियरों व प्रोग्रामरों के खोने के दीर्घकालीन प्रभावों पर चिंता जताई है।

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होटल, प्रौद्योगिकी व अस्पताल से जुड़ी कई अमेरिकी कंपनियां ट्रंप की इसी नीति के चलते विदेशी कामगारों को नौकरी पर नहीं रख पा रही हैं। इस कारण उन्हें अच्छी सेवाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। नॉर्थवेल आइसलैंड स्थित एक पैथोलॉजी लैब में नए डॉक्टर का कैबिन खाली है, क्योंकि उसकी डॉक्टर वीजा में बिना कोई कारण के हो रही देरी के कारण पंजाब में फंसी हुई है। यहां के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. एंड्रयू सी. यॉट ने कहा कि इस काम में इतनी देरी होगी ऐसा हमने पहले कभी महसूस नहीं किया।
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अप्रैल 2017 में ट्रंप ने ‘बाय अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन’ नीति के कार्यकारी आदेश पर दस्तखत करते हुए अधिकारियों को आप्रवासन कानून के मजबूती से लागू करने के निर्देश दिए थे। इसका असर अब जमीन पर दिखने लगा है। नेशनल फाउंडेशन ऑफ अमेरिकन पॉलिसी के सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि कुशल श्रमिकों के लिए एच-1 बी वीजा आवेदनों के खारिज होने की दर 2017 के मुकाबले सिर्फ पिछले तीन माह में 41 फीसदी बढ़ी है। उन्हें उम्मीद है कि नई दिल्ली में टू प्लस टू वार्ता में सुषमा स्वराज द्वारा यह मुद्दा उठाने से शायद कुछ असर पड़े।
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‘गोलमेज’ ने दी ट्रंप प्रशासन के बदलाव को चुनौती

अमेरिका के कॉर्पोरेट नेताओं के एक कारोबारी समूह ‘गोलमेज’ ने हाल ही में ट्रंप प्रशासन को उन बदलाव पर चुनौती दी है जो कहते हैं कि हजारों कुशल विदेशी श्रमिकों से देश के आर्थिक विकास और प्रतिस्पर्धा को खतरा है। चूंकि प्रौद्योगिक कंपनियां भारत और चीन से हर साल हजारों कर्मचारियों को नियुक्ति देकर गैर-अप्रवासी वीजा ‘एच-1 बी’ पर निर्भर करती हैं इसलिए उनके पास ट्रंप की नई अप्रवासी नीति के कारण कुशल लोगों की नियुक्तियां प्रभावित होने लगी हैं। इसका दीर्घकालीन असर देश के विकास पर पड़ना तय है।


भारतीयों के वीजा आवेदन ज्यादा हुए खारिज

हाल ही में अमेरिका के एक गैर-लाभकारी निकाय की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी आप्रवासन प्राधिकरण के कारण अन्य देशों की तुलना में भारतीयों की एच-1 बी वीजा आवेदनों को अस्वीकार करने में काफी बढ़ोतरी हुई है। ट्रंप प्रशासन इस वीजा प्रणाली के सुधार के लिए दबाव डालते हुए कह रहा है कि कुछ आईटी कंपनियां अमेरिका के कामगारों को नौकरियों पर रखने से इनकार करने के लिए अमेरिकी कार्य वीजा का दुरुपयोग कर रही हैं। इसका असर नई नियुक्तियों पर पड़ रहा है।

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