UN में स्थायी दावेदारी, भारत के समर्थन में अमेरिका-ब्रिटेन-फ्रांस
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दुनिया की तीन बड़ी शक्तियों ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी दावेदारी पर सोमवार को खुलकर समर्थन का एलान किया।
वैश्विक संगठन की इस सबसे शक्तिशाली इकाई में सुधार के लिए इस साल नवंबर से चर्चा होनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से अलग-अलग मुलाकात कर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मसलों पर बातचीत की।
आम सभा की बैठक में हिस्सा लेने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में तीनों देशों के सरकार प्रमुखों ने भारत की दावेदारी और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) व मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजिम (एमटीसीआर) में भारत को शामिल किए जाने के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
इससे पहले मोदी ने थोड़े-थोड़े अंतराल में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय ने इन मुलाकातों को ‘पॉवरफुल मंडे’ की संज्ञा दी।
एनएसजी व एमटीसीआर में भारत को शामिल किए जाने पर समर्थन
स्वरूप ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के मसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने भारत की स्थायी सदस्यता के प्रति समर्थन दोहराया है। मोदी से मुलाकातों में ब्रिटिश पीएम कैमरन और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद ने भी भारत के प्रति समर्थन दिया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों मुलाकातों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और आतंकवाद समेत समेत दुनिया भर के अलग-अलग मसलों पर चर्चा हुई।
सैन फ्रांसिस्को से न्यूयॉक पहुंचे मोदी ने दिन की शुरुआत कैमरन के साथ मुलाकात के साथ की। इसके बाद उन्होंने ओलांद और माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स के साथ चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एक ट्वीट में बताया कि गेट्स से मोदी की सिलिकॉन वैली में मुलाकात नहीं हो पाई थी। इसके बाद पीएमओ ने एक ट्वीट किया कि फ्रांस सालों से भारत का एक अहम साथी है।