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पाकिस्तान को ही करनी होगी भारत से बातचीत की पहल, आतंकवादियों के पर भी कतरे: अमेरिका
Sun, 09 Jun 2019 12:52 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 09 Jun 2019 12:52 AM IST
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इमरान खान-प्रधानमंत्री मोदी
- फोटो : social media
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र में दोबारा सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान सरकार की ओर से शांति वार्ता की नई पहल के बीच अमेरिका ने दो टूक कहा है कि दक्षिण एशिया में शांति की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर ही है। उसे ही भारत से वार्ता की पहल करनी होगी। इसके लिए उसे आतंकी संगठनों को दूर रखना होगा।
उल्लेखनीय है कि मोदी के फिर से प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को उन्हें दूसरी बार पत्र लिखकर कहा कि पाकिस्तान कश्मीर सहित सभी मतभेदों को दूर करने के लिए भारत से बात करना चाहता है। इमरान खान ने कहा कि दोनों देशों के लोगों की गरीबी दूर करने के लिए आपसी बातचीत ही एकमात्र समाधान है। क्षेत्रीय विकास के लिए दोनों का साथ मिलकर काम करना अहम होगा।
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका सचमुच यह चाहता है कि पाकिस्तान आतंकियों को गिरफ्तार करे और उन पर मुकदमा चलाए। साथ ही आतंकी समूहों को छुट्टा न घूमने दे, हथियार जमा न करने दे और उन्हें भारत में घुसपैठ और आतंकी हमले करने से रोके। नाम जाहिर न करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि अमेरिका पाकिस्तान की ओर से दीर्घकालीन और स्थिर उपाय चाहता है, जो आतंकियों की गतिविधियों पर रोक लगा सके। जब तक इन समूहों को बाहर नहीं रखा जाएगा तब तक भारत-पाकिस्तान के बीच दीर्घकालिक शांति मुमकिन नहीं है।
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भारत पहले ही ठुकरा चुका है प्रस्ताव
गौरतलब है कि भारत ने पाकिस्तान के बातचीत के प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 13-14 जून को होने वाले शंघाई सहयोग सम्मेलन में दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं होगी।
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उल्लेखनीय है कि मोदी के फिर से प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को उन्हें दूसरी बार पत्र लिखकर कहा कि पाकिस्तान कश्मीर सहित सभी मतभेदों को दूर करने के लिए भारत से बात करना चाहता है। इमरान खान ने कहा कि दोनों देशों के लोगों की गरीबी दूर करने के लिए आपसी बातचीत ही एकमात्र समाधान है। क्षेत्रीय विकास के लिए दोनों का साथ मिलकर काम करना अहम होगा।
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व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका सचमुच यह चाहता है कि पाकिस्तान आतंकियों को गिरफ्तार करे और उन पर मुकदमा चलाए। साथ ही आतंकी समूहों को छुट्टा न घूमने दे, हथियार जमा न करने दे और उन्हें भारत में घुसपैठ और आतंकी हमले करने से रोके। नाम जाहिर न करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि अमेरिका पाकिस्तान की ओर से दीर्घकालीन और स्थिर उपाय चाहता है, जो आतंकियों की गतिविधियों पर रोक लगा सके। जब तक इन समूहों को बाहर नहीं रखा जाएगा तब तक भारत-पाकिस्तान के बीच दीर्घकालिक शांति मुमकिन नहीं है।
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भारत पहले ही ठुकरा चुका है प्रस्ताव
गौरतलब है कि भारत ने पाकिस्तान के बातचीत के प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 13-14 जून को होने वाले शंघाई सहयोग सम्मेलन में दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं होगी।