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शिकंजा: बड़ी टेक कंपनियों पर नियंत्रण के लिए अमेरिका सुधार रहा प्रतिस्पर्धा कानून

Sun, 13 Jun 2021 06:11 AM IST
Kuldeep Singh न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन Published by: Kuldeep Singh Updated Sun, 13 Jun 2021 06:11 AM IST
सार

  • विशेषज्ञों के मुताबिक, इनका सीधा लक्ष्य अमेज़न, एपल, फेसबुक और गूगल सहित व्यापार वाणिज्य सूचना और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों को अपने एकाधिकार में ले रही सभी टेक कंपनियां है।

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America is improving competition law to control big tech companies
टेक कंपनियों पर कसेगा शिकंजा

विस्तार

अमेरिकी सांसदों ने संसद में प्रतिस्पर्धा कानूनों में सुधार के लिए 5 विधेयक प्रस्तावित किए हैं। इनका उद्देश्य बड़ी टेक कंपनियों की शक्ति नियंत्रित रखना और मजबूत होती कॉर्पोरेट लामबंदी रोकना है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, इनका सीधा लक्ष्य अमेज़न, एपल, फेसबुक और गूगल सहित व्यापार वाणिज्य सूचना और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों को अपने एकाधिकार में ले रही सभी टेक कंपनियां है।
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खास बात यह है कि विधायकों को दोनों प्रमुख दलों यानी डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन सांसदों का समान समर्थन मिल रहा हैं। इनके जरिए सांसद वह एकाधिकार खत्म करना चाहते हैं जो चंद कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में बना चुकी हैं व प्रभुत्व का दुरुपयोग कर लगातार मजबूत भी हो रही है। उनके लिए छोटी कंपनियों का विलय एकाधिकार बनाए रखने का प्रमुख जरिया बन चुका है।

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अर्थव्यवस्था पर हावी तकनीक

अर्थव्यवस्था व तकनीकी गतिविधियों पर एकाधिकार बहुत हावी हो चुका है। आज कंपनी तय  कर रही हैं कि कौन जीतेगा? कौन हारेगा? किस कारोबार को तबाह करना है? किसे बचाए रखना? अपनी सेवा की कीमतों में वृद्धि और कर्मचारियों को नौकरी पर रखने या हटाने पर भी उनकी शक्तियां अनियंत्रित हो चुकी हैं। जरूरी है कि सभी को बराबरी का मौका मिले। शक्तिशाली कंपनियों को एकाधिकार का फायदा न मिले। -- डेविड सीसी लाइन, डेमोक्रेट सांसद

कानून में बदलाव से होंगे फायदे 

  • कानूनी सुधारों से इन कंपनियों पर नियंत्रण के लिए बनी नियामक एजेंसियों को ज्यादा बजट दिया जा सकेगा। 
  • टेक कंपनियों को मूलभूत बदलाव लाना होगा। उदाहरण के लिए कानून बनने पर फेसबुक और गूगल को किसी भी कंपनी का अपने समूह में विलय करते समय साबित करना होगा कि वह एकाधिकार के लिए विलय नहीं कर रही है। 
  • एपल को अपने एप्स स्टोर पर कारोबारी गतिविधियां चलाने में मुश्किल आ सकती हैं।


भारत,ऑस्ट्रेलिया, यूरोप भी इसी राह पर 
अमेरिका की तरह ही भारत, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी नए कानून लाए जा रहे हैं। टेक कंपनियों के खिलाफ इस प्रतिस्पर्धा विरोधी व्यवहार के आरोपों की जांच भी करवाई जा रही है।

फेसबुक से दूसरी वेबसाइट पर ले जा सकेंगे डिजिटल हिस्ट्री

सोशल मीडिया कंपनियों के एकाधिकार की एक अहम वजह इन पर मौजूद यूजर्स का डिजिटल डाटा और हिस्ट्री है। इसके लिए एक विधेयक में प्रावधान किया जा रहा है कि यूज़र एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर यूजर अपनी डिजिटल हिस्ट्री व कंटेंट शिफ्ट कर सकेंगे। यूजर के डाटा पर यूजर का अधिकार है, सोशल मीडिया कंपनियों का नहीं।

विलय पर ज्यादा फीस
प्रतिस्पर्धा नियामक एजेंसियों को मजबूत करने के लिए ज्यादा फंड की सिफारिश की गई है। इसके तहत कंपनियों द्वारा किए जाने वाले विलय पर ज्यादा फीस लगाई जाएगी, जिसका लाभ एजेंसियों को मिलेगा।

यूट्यूब को प्राथमिकता नहीं 
गूगल अक्सर कंटेंट सर्च करने पर अपने ही यूट्यूब के परिणाम प्रमुखता से दिखाता है। नए कानून के बाद गूगल यूट्यूब को प्राथमिकता नहीं दे सकेगा। इससे निजी वेबसाइट पर वीडियो कंटेंट देने वाले यूजर्स को मदद मिलेगी।

कारोबारी मनमानी पर हमला
कुछ विधेयकों में बड़ी कंपनियों को इस बात से रोका जा रहा है कि वह दूसरी कंपनियों को अपने प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने देने पर अपनी सेवाएं और वस्तुएं खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे। कई बार बड़ी कंपनियां छोटी और प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को अपने प्लेटफार्म पर प्रतिबंधित कर देती हैं। एपल का एप्स स्टोर इसका प्रमुख उदाहरण है।

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