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वाशिंगटन में हजारों ट्रंप समर्थक व उग्रवादी गुट के लोग सड़कों पर उतरे, हिंसक टकराव टला
Sun, 15 Nov 2020 03:55 PM IST
दीप्ति मिश्रा
डिजिटल ब्यूरो, वाशिंगटन
डिजिटल ब्यूरो, वाशिंगटन
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Sun, 15 Nov 2020 03:55 PM IST
सार
- अमेरिका में ट्रंप समर्थकों की रैली पर हमले के बाद तनाव बढ़ा
- ट्रंप ने लगाया वामपंथी एंटिफा गुट पर हमला करने का आरोप
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : ANI
विस्तार
अमेरिकी चुनाव परिणाम आने से पहले जो अंदाजा लगाया गया था, वह अब सच होता दिख रहा है। शनिवार रात जैसा नजारा देश की राजधानी वाशिंगटन की सड़कों पर दिखा, उसने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वाशिंगटन की सड़कों पर हजारों ट्रंप समर्थक और बड़ी संख्या में उनके विरोधी गुटों के लोग प्रदर्शन के लिए उतर आए। दोनों गुटों में हिंसक टकराव होते-होते बचा।
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ट्रंप ने एंटिफा को बताया जिम्मेदार
रविवार सुबह (भारतीय समय के अनुसार) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर टकराव के हालात के लिए वामपंथी एंटिफा गुट को दोषी ठहराया। एंटिफा यानी एंटी फासिस्ट समूह, यह वामपंथी रुझान वाले युवाओं और उग्रपंथी नौजवानों का समूह है, जिस पर ट्रंप पहले भी निशाना साधते रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि एंटिफा के गंदे लोगों ने ट्रंप समर्थकों की रैली में लोगों पर हमला करने की कोशिश की। लोगों ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया, इसलिए एंटिफा ने रात तक इंतजार किया। जब 99 फीसदी लोग जा चुके थे, तब उन्होंने ‘मागा’ समर्थकों पर हमला किया।
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ट्रंप समर्थकों का आरोप- चुनाव नतीजों में धांधली हुई
ट्रंप समर्थकों ने अपनी रैली का नाम मिलियन 'मागा' मार्च रखा था। मागा ट्रंप के नारे- ‘मैक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का संक्षिप्त रूप है। अमेरिकी मीडिया में इस रैली को लाइव दिखाया गया। मीडिया रिपोर्टों मे बताया गया कि रैली में दक्षिणपंथी और धुर दक्षिणपंथी गुटों के हजारों लोग शामिल हुए। ये रैली ट्रंप के इस दावे के समर्थन में हुई कि राष्ट्रपति के चुनाव में ट्रंप की जीत हुई है, लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी धांधली करके जो बाइडन को विजेता बता रही है।
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रैली में रिपब्लिकन नेता भी शामिल हुए
ट्रंप विरोधी प्रदर्शनकारी वाशिंगटन शहर के एक दूसरे हिस्से में इकट्ठे हुए। उन्होंने उस होटल की तरफ जाने की कोशिश की, जहां ट्रंप समर्थक ठहरे हुए थे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से पीछे धकेल दिया। ट्रंप समर्थक रैली में आए समूहों में प्राउड बॉयज, थ्री पर्सेंटर्स, ओथ कीपर्स जैसे धुर दक्षिणपंथी गुट शामिल थे। इसके अलावा कॉन्सिपैरिसी थियरी (साजिश के सिद्धांत) फैलाने वाले कुछ समूहों से जुड़े लोग भी शामिल थे। इसके अलावा रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य और नेता भी बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। रैली के लिए इसके आयोजकों ने पुलिस की अनुमति ली थी।
रैली के बीच से गुजरा ट्रंप का कारवां
ट्रंप ने शुक्रवार को एक ट्वीट में कहा था कि वे भी रैली में आ सकते हैं। शनिवार को जब रैली शुरू हुई, तो उनका कारवां रैली में आए लोगों के बीच से गुजरा। उस दौरान रैली में शामिल लोगों ने उनके पक्ष में जोरदार नारेबाजी की। सीएनएन की खबर के मुताबिक, पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन कितने लोग पकड़े गए, ये पुलिस ने नहीं बताया।
उग्रवादियों को मौका मिल गया
यहां के थिंक टैंक एंटी-डिफेमेशन लीग में सेंटर फॉर एक्स्ट्रीमिज्म (उग्रवाद अध्ययन केंद्र) के उपाध्यक्ष ऑरेन सिगल के मुताबिक, रैली में बड़ी संख्या में लोग ट्रंप के प्रति अपना समर्थन जताने आए, लेकिन इससे उग्रवादियों को भी मैनस्ट्रीम में आकर घुलने-मिलने का मौका मिला। उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में आम कंजरवेटिव और रिपब्लिकन समर्थकों और उग्रवादियों के बीच की विभाजन रेखा धूमिल हो सकती है।
रिपब्लिकन समर्थकों का आरोप, चुनावी जीत को छीन लिया
विश्लेषकों ने कहा है कि रिपब्लिकन समर्थकों में यह भावना फैल रही है उनकी चुनावी जीत को किसी ने चुरा लिया है। इससे फैल रहे आक्रोश का खामियाजा अमेरिका को लंबे समय तक भुगतना पड़ सकता है। फिलहाल, ट्रंप ऐसी भावना फैलाने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं, जबकि जो बाइडन इलेक्टोरल कॉलेज के 306 सदस्य जीत कर स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति चुनाव जीत चुके हैं।