फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   America and Britain are trying to reach an agreement directly with China on the issue of climate change by ignoring European union

ब्रसेल्स में सवाल: जलवायु परिवर्तन कूटनीति में क्यों अलग-थलग पड़ गया है यूरोपियन यूनियन?

Tue, 07 Sep 2021 04:48 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 07 Sep 2021 04:48 PM IST
सार

इस साल नवंबर में स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में कॉप-26 यानी संयुक्त राष्ट्र का 26वां जलवायु सम्मेलन होगा। उससे पहले बड़े देशों ने जलवायु परिवर्तन रोकने के उपायों पर सहमति बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। पिछले हफ्ते अमेरिकी दूत जॉन केरी ने इस सिलसिले में अपनी चीन और ब्रिटेन की यात्रा पूरी की...

विज्ञापन
America and Britain are trying to reach an agreement directly with China on the issue of climate change by ignoring European union
क्लाइमेट चेंज - फोटो : FILE PHOTO

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) में इस बात को लेकर गहरी निराशा है कि अमेरिका और ब्रिटेन उसकी अनदेखी कर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सीधे चीन के साथ सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल में अमेरिकी और ब्रिटिश दूतों ने इस सिलसिले में चीन से सीधा संपर्क किया है। लेकिन इन गतिविधियों के बीच ईयू के जलवायु दूत से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया है।

विज्ञापन


इस साल नवंबर में स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में कॉप-26 यानी संयुक्त राष्ट्र का 26वां जलवायु सम्मेलन होगा। उससे पहले बड़े देशों ने जलवायु परिवर्तन रोकने के उपायों पर सहमति बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। पिछले हफ्ते अमेरिकी दूत जॉन केरी ने इस सिलसिले में अपनी चीन और ब्रिटेन की यात्रा पूरी की।
विज्ञापन


कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज-26 (संबंधित पक्षों का सम्मेलन) यानी कॉप-26 के अध्यक्ष आलोक शर्मा का ध्यान भी मुख्य रूप से चीन पर केंद्रित रहा है। शर्मा रविवार को चीन के लिए रवाना हुए। इससे पहले उन्होंने कहा- ‘दुनिया में होने वाले कार्बन उत्सर्जन में चीन का हिस्सा एक चौथाई है। वह सबसे बड़ा उत्सर्जक है। इसलिए चीन क्या करता है, वह बेहद अहम है।’
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बीच ईयू के कार्यकारी उपाध्यक्ष और जलवायु दूत फ्रैन्स टिमेरमैन्स की जून के बाद चीनी दूत शिये झेनहुआ से कोई संपर्क नहीं हुआ है। जबकि पिछले अप्रैल के बाद से जॉन केरी और शिये के बीच 18 बार बातचीत हो चुकी है। केरी अप्रैल में पहली बार अमेरिका के जलवायु दूत के रूप में चीन गए थे। ब्रसेल्स में सूत्रों ने मीडिया से कहा कि जलवायु वार्ता में इस तरह ईयू के अलग-थलग पड़ जाने से यहां ईयू मुख्यालय में निराशा की भावना है।

इस बारे में जब वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू ने टिमेरमैन्स के कार्यालय से संपर्क किया, तो वहां से सफाई दी गई कि टिमेरमैन्स पर दूसरी जिम्मेदारियों का बोझ भी है। उनके एक अधिकारी ने कहा कि जॉन केरी के पास जलवायु वार्ता के अलावा कोई और जिम्मेदारी नहीं है। अधिकारी ने कहा कि ईयू ने जलवायु संरक्षण के लिए फिट फॉर 55 योजना पेश की है, जिस पर ईयू देशों के भीतर आने वाले महीनों में बातचीत की जाएगी। टिमेरमैन्स इसकी तैयारी में भी जुटे रहे हैं।

लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े उत्सर्जक देशों के साथ ईयू का संपर्क में न रहना चिंताजनक है। थिंक टैंक ई3जी में ईयू-चीन रिश्तों के विशेषज्ञ बायफॉर्ड त्सांग ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा- ‘मैं यह आशा करता हूं कि ईयू चीन के साथ जलवायु कूटनीति में अधिक प्रभावी भूमिका निभाएगा। लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है। मेरी राय में इसका बड़ा कारण विभिन्न देशों के द्विपक्षीय संबंध हैं।’

यूरोपीय आयोग के एक प्रवक्ता ने कुछ रोज पहले कहा कि टिमेरमैन्स जल्द ही शिये झेनहुआ से बात करेंगे। प्रवक्ता ने कहा कि टिमेरमन्स का दूसरे अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से संपर्क बना हुआ है। कॉप-26 की तारीख करीब आने के साथ इसमें और तेजी आएगी। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि ईयू की असल समस्या यह है कि हाल में चीन के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। इस कारण चीन जलवायु वार्ता में उसे ज्यादा तरजीह नहीं दे रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed