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कराची का ‘बिहारी बाहुबली’ ब्रिटेन में गिरफ्तार, लंदन में रहकर भी पाक में चलाता था सल्तनत
Wed, 12 Jun 2019 05:26 PM IST
Priyesh Mishra
वर्ल्ड डेस्क, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, इस्लामाबाद
Published by: Priyesh Mishra
Updated Wed, 12 Jun 2019 05:26 PM IST
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अल्ताफ हुसैन
- फोटो : Social Media
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पाकिस्तान की मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट पार्टी (एमक्यूएम) के नेता और लंदन में स्व-निर्वासन की जिंदगी जी रहे अल्ताफ हुसैन को स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें नफरत फैलान वाले भाषण देने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।
कुछ महीनों पहले ही अल्ताफ की पार्टी एमक्यूएम में दो फाड़ हुआ है और पाकिस्तानी एमक्यूएम में उन्हें बेदखल कर दिया है। हालांकि अल्ताफ अब भी खुद को ही असली एमक्यूएम का नेता कहते हैं। पाकिस्तान का कॉस्मोपोलेटिन शहर कराची, इस पार्टी का गढ़ था।
अल्ताफ हुसैन इससे पहले भी साल 2014 में पैसों की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। अल्ताफ हुसैन ने 1984 में राजनीतिक पार्टी मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट की स्थापना की थी। उनकी पार्टी भारत से आए उन लोगों के हक में आवाज उठाने के लिए पहचानी जाती है, जिन्हें मुहाजिर कहा जाता है।
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अपने ऊपर लगातार हो रहे हमले और सुरक्षाबलों की कार्रवाईयों के कारण अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान को छोड़ ब्रिटेन से राजनैतिक शरण देने की गुहार लगाई। जिसके बाद ब्रिटेन ने 1992 में उन्हें शरण दे दी थी। इसके बाद से वह लंदन में रहकर पाक में अपनी पार्टी का संचालन कर रहे थे।
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कुछ महीनों पहले ही अल्ताफ की पार्टी एमक्यूएम में दो फाड़ हुआ है और पाकिस्तानी एमक्यूएम में उन्हें बेदखल कर दिया है। हालांकि अल्ताफ अब भी खुद को ही असली एमक्यूएम का नेता कहते हैं। पाकिस्तान का कॉस्मोपोलेटिन शहर कराची, इस पार्टी का गढ़ था।
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अल्ताफ हुसैन इससे पहले भी साल 2014 में पैसों की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। अल्ताफ हुसैन ने 1984 में राजनीतिक पार्टी मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट की स्थापना की थी। उनकी पार्टी भारत से आए उन लोगों के हक में आवाज उठाने के लिए पहचानी जाती है, जिन्हें मुहाजिर कहा जाता है।
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अपने ऊपर लगातार हो रहे हमले और सुरक्षाबलों की कार्रवाईयों के कारण अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान को छोड़ ब्रिटेन से राजनैतिक शरण देने की गुहार लगाई। जिसके बाद ब्रिटेन ने 1992 में उन्हें शरण दे दी थी। इसके बाद से वह लंदन में रहकर पाक में अपनी पार्टी का संचालन कर रहे थे।
कौन हैं मुहाजिर
एमक्यूएम मुखिया अल्ताफ हुसैन (फाइल फोटो)
मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के समर्थकों में सबसे ज्यादा संख्या मुहाजिरों की है। 1947 के बंटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान जाने वाले मुस्लिमों को मुहाजिर कहा जाता है। आजादी के बाद पढ़े-लिखे मुहाजिरों ने पाकिस्तान में खूब तरक्की की और नाम कमाया। कारोबार ही नहीं बल्कि सरकारी सेवाओं में भी इनकी पकड़ मजबूत थी। लेकिन बाद में इनकी स्थिति खराब होने लगी। जिसके बाद इन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा।
पाकिस्तान में इनके प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कभी कराची की सभी सीटों पर एमक्यूएम के उम्मीदवार ही जीतते थे। वे लंदन में बैठकर कराची की बड़ी-बड़ी रैलियों को फोन के माध्यम से संबोधित करते थे।
एक तरफ उन्हें दबे कुचले लोगों का मसीहा माना जाता है जो पाकिस्तान में गरीबी में जिंदगी जी रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उन्हें हिंसा का पैरोकार माना जाता है जो कराची सहित पाकिस्तान के अधिकतर भागों में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।
पाकिस्तान में इनके प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कभी कराची की सभी सीटों पर एमक्यूएम के उम्मीदवार ही जीतते थे। वे लंदन में बैठकर कराची की बड़ी-बड़ी रैलियों को फोन के माध्यम से संबोधित करते थे।
एक तरफ उन्हें दबे कुचले लोगों का मसीहा माना जाता है जो पाकिस्तान में गरीबी में जिंदगी जी रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उन्हें हिंसा का पैरोकार माना जाता है जो कराची सहित पाकिस्तान के अधिकतर भागों में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।
अल्ताफ को शरण देने में ब्रिटेन के भी अपने हित
अल्ताफ हुसैन
- फोटो : Social Media
अल्ताफ हुसैन को शरण देने के पीछे ब्रिटेन के भी हित छिपे हुए थे। उसे पाक में कोई ऐसा आदमी चाहिए था जिसकी पहुंच पाकिस्तान के समुद्र और शहर दोनों जगह हों। इसके अलावा अल्ताफ के समर्थक उनके प्रति समर्पित भाव से काम करते थे जिससे ब्रिटेन को अपने हित साधने में आसानी हुई।
अल्ताफ ने कराची विश्वविद्यालय से फार्मेसी की पढ़ाई की। हुसैन ने कराची शहर में मुहाजिरों के ताकत को पहचानकर अपनी राजनैतिक पारी की शुरुआत की। इन्होंने कराची विश्वविद्यालय की राजनीति से पार्टी की शुरुआत की थी।
कराची में हुआ था अल्ताफ का जन्म
अल्ताफ हुसैन का जन्म सितंबर 1953 में पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। अल्ताफ का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था जो विभाजन के पहले उत्तर प्रदेश का निवासी था। उनका परिवार बंटवारे के समय पाकिस्तान जाकर बस गया था।अल्ताफ ने कराची विश्वविद्यालय से फार्मेसी की पढ़ाई की। हुसैन ने कराची शहर में मुहाजिरों के ताकत को पहचानकर अपनी राजनैतिक पारी की शुरुआत की। इन्होंने कराची विश्वविद्यालय की राजनीति से पार्टी की शुरुआत की थी।
भारत का जासूस होने का लगता रहा आरोप
अल्ताफ हुसैन
- फोटो : Social Media
अल्ताफ हुसैन को उनके विरोधी भारत समर्थित होने का आरोप लगाते रहे। वह उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का मोहरा बताते थे। हालांकि इस बात को अल्ताफ ने कभी नहीं माना।
पाकिस्तान के कराची शहर में भारत से पाकिस्तान गए सभी उर्दू भाषी लोगों को 'बिहारी' कहकर एक तरह से उन पर तंज किया जाता है। यहां तक कि बांग्लादेश बनने के बाद जो लोग वहां से पाकिस्तान गए उन्हें भी 'बिहारी' कह कर बुलाया जाता था। इस कारण अल्ताफ को वहां बिहारी बाबू के नाम से प्रसिद्धि मिली।
अल्ताफ हुसैन पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने मुहाजिरों की भावनाओं को राजनीतिक दिशा दी। 1987-88 में एमक्यूएम के उम्मीदवारों ने सिंध सूबे के शहरी क्षेत्रों में भारी जीत दर्ज की। इसके बाद पार्टी पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में तीसरे सबसे बड़े राजनीतिक दल भी बनी।
पाकिस्तान के कराची शहर में भारत से पाकिस्तान गए सभी उर्दू भाषी लोगों को 'बिहारी' कहकर एक तरह से उन पर तंज किया जाता है। यहां तक कि बांग्लादेश बनने के बाद जो लोग वहां से पाकिस्तान गए उन्हें भी 'बिहारी' कह कर बुलाया जाता था। इस कारण अल्ताफ को वहां बिहारी बाबू के नाम से प्रसिद्धि मिली।
अल्ताफ हुसैन पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने मुहाजिरों की भावनाओं को राजनीतिक दिशा दी। 1987-88 में एमक्यूएम के उम्मीदवारों ने सिंध सूबे के शहरी क्षेत्रों में भारी जीत दर्ज की। इसके बाद पार्टी पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में तीसरे सबसे बड़े राजनीतिक दल भी बनी।