भारत में 38 फीसदी बढ़ी शराब की खपत, पूरा नहीं हो पाएगा डब्लूएचओ का लक्ष्य
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भारत में शराब की खपत साल 2010 से 2017 के बीच सालाना 38 फीसदी तक बढ़ी है। यह मात्रा हर साल 4.3 से 5.9 लीटर प्रति व्यक्ति (वयस्क) रही है। वहीं इस अवधि में अमेरिका में शराब की खपत (9.3 से 9.8 लीटर) और चीन में (7.1 से 7.4 लीटर) के साथ कम वृद्धि हुई है। जबकि 1990 के बाद से विश्व स्तर पर शराब की खपत 70 फीसदी बढ़ी है। लांसेट जनरल में प्रकाशित हुए एक अध्ययन में ये दावा किया गया है।
इस अध्ययन में 1990 से 2017 के बीच 189 देशों में शराब के उपभोग का अध्ययन किया गया है। जर्मनी के टीयू ड्रेसन के शोधार्थियों ने पाया है कि आबादी के साथ-साथ दुनिया में शराब की खपत में भी इजाफा हो रहा है। आंकड़े बताते हैं कि 1990 में पूरी दुनिया में 20,999 मिलियन लीटर शराब की खपत होती थी, जो 2017 में बढ़कर 35,676 मिलियन लीटर हो गई।
इस रिपोर्ट से पता चलता है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2025 तक शराब की खपत को 10 फीसदी तक लाने का विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक दुनिया की आधी वयस्क आबादी शराब पीना शुरू कर देगी। इन लोगों में से करीब 23 फीसदी ऐसे होंगे, जो महीने में कम से कम एक बार अत्यधिक शराब पिएंगे। इसका मतलब ये हुआ कि शराब के इस्तेमाल के खिलाफ लक्ष्य हासिल करने के लिए विश्व सही दिशा में नहीं जा रहा है।
दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा खपत
आंकड़ों से पता चलता है कि 2010 से 2017 के बीच दक्षिण एशियाई देशों में शराब की खपत सबसे अधिक 34 फीसदी हुई है। जिसमें भारत, वियतनाम और म्यांमार सबसे आगे हैं। वहीं इस मामले में यूरोप की स्थिति काफी बेहतर हुई है।
यहां शराब की खपत इस दौरान 12 फीसदी तक कम हुई है। सबसे कम शराब पीने वाले देश अजरबैजान, किर्गिस्तान, यूक्रेन, बेलारूस और रूस हैं। वहीं अफ्रीका, अमेरिका और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में शराब की खपत सामान्य रही है।
शराब से होने वाले नुकसान
शराब से बहुत से नुकसान होते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार शराब पीने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। करीब 200 बीमारियां शराब पीने के कारण होती हैं। शराब के सेवन से कैंसर, टीबी और किडनी की बीमारी हो जाती है। आने वाले समय में ये खतरा और भी बढ़ने वाला है। इसके अलावा शराब के नशे के कारण कई हादसे भी हो जाते हैं। जिनमें लोग ना केवल घायल होते हैं, बल्कि कई लोगों की जान भी चली जाती है।