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श्रीलंका की तरह अब बांग्लादेश का पायरा बंदगाह भी चीनी हाथों में जा सकता है

Wed, 03 Apr 2019 02:55 PM IST
Shilpa Thakur वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 03 Apr 2019 02:55 PM IST
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After Sri Lanka port now Bangladesh Payra Port could also fall into Chinese hand
पायरा बंदरगाह - फोटो : ANI

भारत को घेरने की नीति के तहत चीन पड़ोसी देशों में विकास के नाम पर अपनी पैठ मजबूत कर रहा है। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को तो वो अपने हाथों में ले ही चुका है। अब उसकी नजर बांग्लादेश के पायरा बंदरगाह पर भी है।

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दिसंबर, 2016 में चीन और बांग्लादेश ने अपने रिश्ते को मजबूती देने के उद्देश्य से चीन की बहुउद्देशीय परियोजना वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) के तहत एक समझौता किया था। इस परियोजना को बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) भी कहा जाता है। जिसका उद्देश्य एशिया के देशों को चीन द्वारा प्रायोजित परियोजना के माध्य से जोड़ना है। जिसे चीनी 21वीं सदी का 'सिल्क रूट' कहते हैं।
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चीन अपनी कई परियोजनाओं के अलावा बांग्लादेश के पायरा बंदरगाह के विस्तार और विकास में अधिक रुचि ले रहा है। दो चीनी कंपनियों चाइना हर्बर इंजीनियरिंग कंपनी (सीएचईसी) और चाइना स्टेट कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग कंपनी (सीएससीईसी) ने इस बंदरगाह के मुख्य ढांचे के विकास और अन्य कार्यों के लिए 600 करोड़ डॉलर का समझौता किया है।
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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक इस तरह के निवेश से चीन अपनी वास्तविक मंशा को छिपाना चाहता है। इस निवेश से वह बांग्लादेशी बंदरहगों को अपने कब्जे में लेना चाहता है। बिलकुल वैसे ही जैसे उसने श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को अपने कब्जे में लिया है। 

अपनी ओबीओआर परियोजना के जरिए चीन ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर का निवेश किया था। उसने इस कार्य में सबसे अधिक प्राथमिकता हंबनटोटा बंदरगाह को दी थी। चीन ने इस विकास कार्य के नाम पर श्रीलंका को भारी कर्ज के जाल में फंस दिया। वह जब इसे चुकाने की स्थिति में नहीं रहा तो चीन को दिसंबर, 2017 में 99 साल के लिए बंदरगाह लीज पर देना पड़ा। 

चीन ढाका में भी कुछ ऐसी ही रणनीति अपना रहा है। वह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर भी लगभग अपना नियंत्रण स्थापित कर चुका है। 

दुनिया के लिए ऐसे बन रहा खतरा?

चीन अपनी विकास के नाम पर कब्जे की रणनीति से दुनिया के लिए खतरा बनता जा रहा है। अगर पायरा बंदरगाह की बात करें तो यह बांग्लादेश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है। जो पटुआखली में स्थित है। ये बंदरगाह बंगाल की खाड़ी के तट पर है। वह इसपर कब्जे से समुद्री जाल बिछाना चाहता है। 

पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से चीन अरब सागर तक पहुंचना चाहता है। वह श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह के माध्यम से हिंद महासागर में और बांग्लादेश के पायरा बंदरगाह के माध्यम से बंगाल की खाड़ी में पहुंचना चाहता है। वह संबंधित देश को विकास के नाम पर कर्ज में इस हद तक फंसा देता है कि उसे अपने उद्देश्य के पूरा होने को लेकर कोई संदेह ही नहीं रहता है। 

चीन का इन कार्यों के पीछे अपने नागरिकों को नौकरी देने का उद्देश्य भी शामिल है। वह इन विकास कार्यों का ठेका अपनी ही कंपनियों को देता है। इन विकास के नाम पर किए जा रहे कार्यों में काम भी चीनी मजदूर ही करते हैं।



यानी कर्ज भी खुद दे रहा है और कर्ज के पैसे जिस कंपनी और मजदूरों पर खर्च हो रहे हैं, वो भी चीन में ही आ रहे हैं। माना जाता है कि पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में चीन के 60 हजार नागरिक काम कर रहे हैं। जबकि जिन देशों में ये काम हो रहे हैं वहां के नागरिकों को इन कार्यों से दूर ही रखा जाता है। 

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