अफगानिस्तान: काबुल एयरपोर्ट पर बढ़ा उपद्रव, अमेरिका ने अपने नागरिकों को रोका
- हजारों लोग अब भी अफगानिस्तान से बाहर निकलने के लिए घेरे हुए हैं एयरपोर्ट, बढ़ रही हैं सुरक्षा बलों से झड़पें
- तालिबान में नंबर दो की हैसियत वाला मुल्ला बरादर नई सरकार के गठन के लिए अन्य गुटों के नेताओं के साथ बातचीत करने काबुल पहुंचा है
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अमेरिका ने शनिवार को अपने नागरिकों को काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दूर रहने की सलाह जारी की। अमेरिका ने यह सलाह एयरपोर्ट के बाहर भारी भीड़ की सुरक्षा बलों से झड़पों के कारण लगातार उपद्रव की स्थिति बढ़ने के चलते दी है। सुन्नी आतंकी संगठन तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के एक सप्ताह बाद भी हजारों लोग देश से बाहर निकलने के लिए एयरपोर्ट घेरकर बैठे हुए हैं।
अमेरिका की तरफ से अपने नागरिकों के लिए यह सलाह तालिबान के सह-संस्थापक और आगामी संभावित राष्ट्रपति मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के काबुल पहुंचने के बाद जारी की। तालिबान में नंबर दो की हैसियत वाला मुल्ला बरादर नई सरकार के गठन के लिए अन्य गुटों के नेताओं के साथ बातचीत करने काबुल पहुंचा है। हालांकि तालिबान का मुखिया हैबतुल्लाह अखुंदजा अब भी दुनिया के सामने नहीं आया है।
तालिबान अधिकारियों के मुताबिक, मुल्ला बरादर आतंकी नेताओं, पिछली सरकार के नेताओं और नीति निर्माताओं से मिलने के साथ ही धार्मिक विद्वानों व अन्य से मुलाकात करेगा। कतर के दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच समझौता कराने में मुल्ला बरादर की ही अहम भूमिका थी और उसे अमेरिका का समर्थन हासिल होने की भी चर्चा है। पजहॉक अफगान न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, हिज्ब-आई-इस्लामी अफगानिस्तान (एचआईए) के नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार ने कहा था कि संगठन और अफगान नेताओं के बीच औपचारिक वार्ता तालिबान नेताओं के काबुल पहुंचने के बाद ही होगी। इसके बाद ही मुल्ला बरादर यहां पहुंचा है।
इसके बाद अमेरिकी दूतावास की तरफ से जारी एडवाइजरी में कहा गया, काबुल एयरपोर्ट के दरवाजों के बाहर सुरक्षा का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में हमारी सलाह है कि अमेरिकी सरकार के किसी प्रतिनिधि की तरफ से व्यक्तिगत निर्देश मिलने तक अमेरिकी नागरिकों को फिलहाल एयरपोर्ट से दूर ही रहना चाहिए। हालांकि तालिबान अधिकारियों ने कहा है कि एयरपोर्ट के बाहर के उपद्रव के लिए उनका संगठन जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने कहा, पश्चिम को नागरिकों की निकासी के लिए बेहतर योजना बनानी थी।
नाटो ने किया 12 हजार लोगों को निकालने का दावा
नाटो अधिकारियों ने दावा किया है कि तालिबान के काबुल में प्रवेश करने के बाद से अब तक दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय सहायता समूहों के लिए काम करने वाले 12 हजार विदेशियों व अफगान नागरिकों को देश से बाहर एयर लिफ्ट किया जा चुका है। नाटो महासिचव जेन स्टोलटनबर्ग ने कहा, एयरपोर्ट के बाहर हालात बेहद कठिन और खराब हैं। निकासी प्रक्रिया बेहद धीमी है, क्योंकि यह खतरनाक है। हम एयरपोर्ट के बाहर तालिबान सदस्यों या आम लोगों के साथ किसी भी तरह का टकराव नहीं चाहते हैं। हम निकासी योजना को लेकर किसी तरह का आरोपों का खेल शुरू नहीं करना चाहते।
तालिबान का दावा, पेश करेंगे सत्ता का नया मॉडल
तालिबान अधिकारियों ने दावा किया है कि उनका संगठन अगले कुछ सप्ताह में अफगानिस्तान पर शासन के लिए एक नया मॉडल पेश करने की तैयारी में है। इसमें आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय मुद्दों से निपटने के लिए अलग-अलग टीम होंगी। उन्होंने कहा, संकट प्रबंधन के लिए पिछले सरकार के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। उन्होंने कहा, नई सरकार पश्चिमी की परिभाषा के हिसाब से लोकतांत्रिक नहीं होगी, लेकिन यह हर किसी के अधिकारों का संरक्षण करेगी।
पिछली सरकार के अधिकारियों पर हमले, तालिबान ने कहा दोषियों को देंगे दंड
कई अफगान नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय सहायता व सलाहकार समूहों ने अफगानिस्तान में नियंत्रण बनाने के बाद तालिबान की तरफ से विरोध करने वालों के खिलाफ बेहद कठोर रुख अपनाने का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि पिछली सरकार में सरकारी पदों पर रहने वालों, तालिबान की आलोचना करने वालों या अमेरिका के साथ काम करने वालों को तलाशकर हत्या समेत कई तरह की कठोर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि एक तालिबान अधिकारी ने नाम नहीं बताते हुए कहा, हमने सामान्य नागरिकों के खिलाफ उत्पीड़न व अपराध के कुछ मामले सुने हैं। यदि (तालिबान के सदस्यों) ने कानून व्यवस्था की समस्या बनाई है तो इसकी जांच की जाएगी। हम भय, तनाव और घबराहट को समझ सकते हैं। लोग समझ रहे हैं कि हम जवाबदेह नहीं हैं, लेकिन यह मामला नहीं होगा।
हजारों अफगान सैनिकों को ढूंढकर मार रहा तालिबान
सत्ता पर तालिबान का नियंत्रण होने के बाद अफगान सेना के हजारों जवान और अधिकारी अपने हथियारों, सैन्य वाहनों व विमानों के साथ जान बचाकर ईरान और उज्बेकिस्तान में शरण पाने में सफल हो गए हैं। बहुत सारे जवानों ने तालिबान के लिए लड़ने की घोषणा कर अपनी जान बख्शवा ली है, लेकिन एक लाख से ज्यादा जवान, कमांडो और जासूस अब भी अपनी जान बचाने के लिए लगातार छिप रहे हैं, जिन्हें ढूंढकर तालिबान मार रहा है।
न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी अफगानिस्तान कीी पहाड़ियों में छिपे एक अफगान कमांडो फरीद ने कहा कि बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। मेरे चारों तरफ की सामान्य सेना यूनिटों के आत्मसर्मपण करने से मैं यहां फंस गया हूं। मैं जान बचाने की प्रार्थना कर रहा हूं। टोलो न्यूज के मुताबिक, एक प्रांतीय गवर्नर और पुलिस के जवानों समेत देश में बड़ी संख्या में पिछली सरकार के अधिकारी लापता हैं और उनके परिवार उन्हें तलाशने की गुहार लगा रहे हैं।
काबुल के कार्यवाहक प्रांतीय गवर्नर से मिले करजई-अब्दुल्ला
पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई और पिछली सरकार में शीर्ष नेता रहे अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने शनिवार को काबुल के स्वयंभू कार्यवाहक तालिबान गवर्नर अब्दुल रहमान मंसूर से मुलाकात की। अब्दुल्ला के कार्यालय की तरफ से बताया गया कि दोनों नेताओं ने काबुल के नागरिकों की जान, माल और सम्मान की सुरक्षा की प्राथमिकता को लेकर कार्यवाहक गवर्नर से बात की। गवर्नर ने इसके लिए सभी प्रयास करने का आश्वासन दिया है।
फ्रांस ने एयरलिफ्ट किए 570 लोग, स्विट्जरलैंड ने टाली उड़ान
फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार रात को चौथी बार अफगानिस्तान से 99 अफगानों व 4 फ्रांसीसी नागरिकों को एयरलिफ्ट करने का दावा किया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अब तक फ्रांसीसी सैन्य विमान 407 अफगान नागरिकों समेत 570 लोगों को काबुल एयरपोर्ट से लेकर उड़ान भर चुके हैं। उधर, काबुल एयरपोर्ट के बाहर का उपद्रव देखकर स्विट्जरलैंड ने काबुल से अपने नागरिकों को चार्टर विमान में निकालने की योजना स्थगित कर दी है। स्विस विदेश मंत्रालय ने कहा, पिछले कुछ घंटों में काबुल एयरपोर्ट के चारों तक सुरक्षा हालात बेहद खराब हो गए हैं। एक बड़ी संख्या में लोग एयरपोर्ट के बाहर बैठे हैं और सभी जगह बार-बार हिंसक टकराव हो रहे हैं।
रूस रखेगा अच्छे संबंध, ईयू ने किया मान्यता से इनकार
रूस ने मास्को में कहा है कि अफगानिस्तान के साथ अच्छे और मैत्री संबंध बनाना अहम होगा। उधर, यूरोपीय संघ (ईयू) के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लियन ने शनिवार को ब्रुसेल्स में कहा कि ईयू तालिबान को न तो मान्यता देगा और न ही उसके साथ राजनीतिक वार्ता करेगा।