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वैश्विक चुनौती: सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने जताई उम्मीद, दोबारा आतंकवाद का केंद्र न बने अफगानिस्तान
Mon, 23 Aug 2021 04:51 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 23 Aug 2021 04:51 PM IST
सार
अफगानिस्तान से सैन्य वापसी के फैसले को लेकर आलोचना का सामना कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का सोमवार को सिंगापुर के प्रधानमंत्री का समर्थन किया। इसके साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान के बेहतर भविष्य को लेकर उम्मीद जताई।
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सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली शेन लूंग
- फोटो : twitter.com/leehsienloong
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विस्तार
सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली शेन लूंग ने सोमवार को कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अफगानिस्तान एक प्रमुख मोर्चा है। वहां से उग्रवादी विचार पनपते हैं और क्षेत्र में पहुंचाए जाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान एक बार फिर से आतंकवाद का केंद्र नहीं बनेगा। ली ने यह बयान एक प्रेस वार्ता में दिया। उनके साथ सिंगापुर दौरे पर आईं अमेरिका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस भी थीं।
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ली ने कहा, 20 साल पहले अफगानिस्तान में अमेरिका के दखल ने आतंकवादियों को अफगानिस्तान को अपनी सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल करने से रोका। उन्होंने कहा, इसके लिए सिंगापुर आभारी है। हम उम्मीद करते हैं कि अफगानिस्तान फिर से आतंकवाद का केंद्र नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि हमने अफगानिस्तान में अपने अधिकारी भेजे हैं क्योंकि यह उग्रवादी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का प्रमुख मोर्चा है।
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बता दें कि तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान की सत्ता हासिल कर ली थी। यह अमेरिका की वहां से सैन्य वापसी पूरी होने से दो सप्ताह पहले हुआ। इसके चलते अफगानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए थे। तालिबान का कब्जा होने के बाद से पूरे अफगानिस्तान से लोग देश छोड़ने की आपाधापी में दिख रहे हैं। तालिबान का ऐसा भय है कि लोग किसी भी तरह अफगानिस्तान छोड़ देना चाहते हैं।
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ली का यह बयान उस समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को इस मुद्दे पर खासी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। सेना की वापसी के फैसले को लेकर मुख्य तौर पर विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी बाइडन प्रशासन पर सवाल उठा रही है। हालांकि, बाइडन ने साफ तौर पर कहा है कि वह अपने फैसले से पलटने वाले नहीं हैं और अफगानिस्तान का हित तब तक नहीं होगा जब तक वह खुद अपनी रक्षा में सक्षम नहीं होगा।