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अफगानिस्तान की ‘लोया जिरगा’ ने 400 तालिबान कैदियों की रिहाई को दी मंजूरी
Mon, 10 Aug 2020 06:44 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 10 Aug 2020 06:44 AM IST
सार
- युद्धग्रस्त देश में शांति वार्ता का मार्ग होगा प्रशस्त
- वार्ता के लिए तालिबान ने रखी थी रिहाई की शर्त
- अगले सप्ताह कतर में होगी वार्ता की शुरुआत
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Afghanistan President Ashraf Ghani
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विस्तार
अफगानिस्तान की महासभा ‘लोया जिरगा’ ने रविवार को तालिबान के 400 कैदियों की रिहाई को मंजूरी दे दी। तालिबान आतंकियों को रिहा करने का फैसला अफगानिस्तान में करीब दो दशक से चल रहे गृहयुद्ध को खत्म करने के मकसद से शांति वार्ता की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त करेगा। इससे पहले अफगानिस्तान की सरकार करीब 5 हजार तालिबान कैदियों को रिहा कर चुकी है। बदले में तालिबान ने भी करीब 1100 सरकारी बलों, सरकारी कर्मचारियों और राजनीतिक दलों के लोगों को अपनी कैद से मुक्त किया है।
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अफगानिस्तान की आधिकारिक भाषा पश्तो और फारसी में जारी प्रस्ताव में कहा गया कि समस्या को दूर करने के लिए शांति प्रक्रिया की शुरुआत और खून खराबे की समाप्ति के लिए लोया जिरगा ने 400 तालिबान की रिहाई को मंजूरी दी। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने राजधानी काबुल में विधानसभा बुलाई थी, जहां करीब 3,200 अफगान समुदाय के नेताओं ने सरकार को सलाह दी कि तालिबान कैदियों को मुक्त किया जाए।
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लोया जिरगा मुख्य रूप से नए संविधान को अपनाने या युद्ध जैसे राष्ट्रीय या क्षेत्रीय मुद्दे को निपटाने के लिए आयोजित किया जाता है। राष्ट्रपति गनी ने लोया जिरगा के फैसले का स्वागत किया और तालिबान से युद्ध खत्म करने का आग्रह किया। वहीं, तालिबान के राजनीतिक प्रवक्ता सुहेल शाहीन ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया।
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तालिबान ने सरकार से वार्ता शुरू करने के लिए इन कैदियों की रिहाई की शर्त रखी थी। अफगानिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व और तालिबान के बीच बातचीत अगले सप्ताह की शुरुआत में होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यह बातचीत कतर में होगी, जहां तालिबान का राजनीतिक कार्यालय है।
इसके लिए अभी कोई तारीख निर्धारित नहीं की गई है। अफगानिस्तान के इस कदम से अमेरिका को अपने सैनिकों को वापस बुलाने और अपनी सबसे लंबी सैन्य भागीदारी को समाप्त करने के लिए और करीब ले आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस साल नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं। फरवरी में अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौता हुआ था। इसका उद्देश्य अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की वापसी और शांति बहाली था।