Explained: अफगानिस्तान से भारत समेत दुनियाभर में कैसे पहुंचती है हेरोइन, जानें रूट और कीमत समेत सबकुछ
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विस्तार
गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से 21 हजार करोड़ की तीन हजार किलो हेरोइन मिलने का मामला अब तक शांत नहीं पड़ा है। अदाणी ग्रुप के नाम दर्ज मुंद्रा पोर्ट पर मादक पदार्थों का जखीरा मिलने के बाद केंद्र व राज्य सरकार विपक्ष के निशाने पर हैं। दावा किया जा रहा है कि हेरोइन की यह भारी-भरकम खेप अफगानिस्तान से आई थी और उसे ऑस्ट्रेलिया भेजा जाना था। इसके पीछे तालिबान का हाथ बताया जा रहा है। माना तो यह भी जा रहा है कि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद पूरी दुनिया में मादक पदार्थों की तस्करी बढ़ने का अनुमान है। इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि हेरोइन की खेप ऑस्ट्रेलिया भेजने के लिए भारत के रूट का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था? साथ ही, पूरी दुनिया में हेरोइन की सप्लाई के नेटवर्क की भी जानकारी दे रहे हैं।
कैसे बनती है हेरोइन?
गौरतलब है कि अफगानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा हेरोइन उत्पादक देश है। दुनिया भर की 80 फीसदी से ज्यादा हेरोइन का उत्पादन अफगानिस्तान में ही होता है। ईरान-पाकिस्तान समेत दूसरे पड़ोसी मुल्कों के रास्ते दुनियाभर में इसकी तस्करी होती है। बता दें कि गांजा और हशीश के उत्पादन भी अफगानिस्तान में ही सबसे ज्यादा होता है। दरअसल, हेरोइन ओपियम पॉपी नाम के पौधे के फूल से मिलने वाले लेटेक्स से बनती है। एक फूल से करीब 30 ग्राम लेटेक्स मिलता है, जिसे सुखाकर ओपियम (अफीम) बनाया जाता है। ओपियम में 12 फीसद अल्कालॉयड मॉर्फीन होता है, जिसे कुछ रसायनों में मिलाकर हेरोइन तैयार की जाती है।
भारत में हेरोइन भेजने के दो रास्ते
बता दें कि अफगानिस्तान से हेरोइन को भारत भेजने के दो ही रास्ते हैं। पहला सड़क मार्ग द्वारा और दूसरा समुद्री रास्ता। सड़क मार्ग के लिए हेरोइन को पहले अफगानिस्तान की सीमा से सटे पाकिस्तानी इलाकों में भेजा जाता है। वहां से पंजाब और राजस्थान होते हुए मादक पदार्थों की खेप भारत में लाई जाती है। हालांकि, पंजाब के रास्ते आने वाली हेरोइन की मात्रा अधिकतम 500 किलो तक ही होती है। उधर, हेरोइन को समुद्र के रास्ते भारत भेजने के लिए भी पाकिस्तान ही माध्यम बनता है। ऐसे में मादक पदार्थों को पाकिस्तान से पहले मोजाम्बिक भेजा जाता है, जिसके बाद इसे दक्षिण भारत के तटीय इलाकों तक पहुंचाया जाता है। इस रूट का इस्तेमाल हेरोइन को ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचाने के लिए भी किया जाता है।
दुनियाभर में मादक पदार्थों की तस्करी के लिए तीन रास्ते
अहम बात यह है कि अफगानिस्तान से पूरी दुनिया में मादक पदार्थों की तस्करी के लिए कुल तीन रास्तों का ही इस्तेमाल किया जाता है। इनमें पहला बाल्कन रूट है, जिससे पूरे यूरोप में हेरोइन की सप्लाई होती है। इसके बाद नॉर्दर्न रूट (उत्तरी रास्ते) का नंबर आता है, जिससे अमेरिका तक के देशों को कवर किया जाता है। तीसरा रास्ता दक्षिणी रूट है, जिसके माध्यम से मादक पदार्थ ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचाए जाते हैं। अफगानिस्तान के कुल 34 प्रांतों में से 22 में ओपियम की खेती की जाती है। इनमें 98 फीसदी फसल फराह, हेलमंद, कंधार, निमरोज, उरुजगान और जाबुल में होती है। इसके बाद भारत, पाकिस्तान और चीन से लेकर रूस, अमेरिका, कनाडा तक मादक पदार्थों की तस्करी की जाती है। इसके अलावा पश्चिम, मध्य और दक्षिण पूर्व यूरोप से लेकर मध्य, दक्षिण पूर्व एशिया, खाड़ी देश, तुर्की, ईरान, अफ्रीका तक हेरोइन और अफीम अफगानिस्तान से ही पहुंचाया जाता है।
अफगानिस्तान में अफीम का उत्पादन
| साल | क्षेत्र (हेक्टेयर में) |
| 1994 | 70,000 |
| 2002 | 8000 |
| 2010 | 1,10,000 |
| 2017 | 3,30,000 |
| 2019 | 1,60,000 |
| 2020 | 2,20,000 |
सात गुना तक बढ़ जाती है हेरोइन की कीमत
संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, एक किलोग्राम हेरोइन के उत्पादन पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेकिन तस्करी के चलते इसकी कीमत सात गुना तक बढ़ जाती है। यही वजह है कि भारतीय बाजार में हेरोइन के दाम सात करोड़ रुपये प्रति किलो तक आंके गए हैं। अफगानिस्तान के अलावा म्यांमार में दुनियाभर की करीब 25 फीसदी हेरोइन का उत्पादन होता है।
हेरोइन को 'चौथी बीवी' का दर्जा
बता दें कि अफगानिस्तान में हेरोइन के उत्पादन का करीब दो-तिहाई हिस्सा हेलमंद प्रांत में होता है। यहां ओपियम की फसल के महत्व का अंदाजा इस बात से लगता है कि हेलमंद में हेरोइन को चौथी बीवी का दर्जा दिया गया है। दरअसल, यहां रहने वाले लोग उम्र के जिस पड़ाव पर चौथा निकाह करते हैं, उस वक्त मेहर अदा करने के लिए बड़ी रकम का इंतजाम ओपियम की फसल से होने वाली कमाई से ही किया जाता है।